13 वें सप्ताह गर्भावस्था लक्षण?

Language: Hindi | Published: 04 Jan 2022 | Views: 48
13 वें सप्ताह गर्भावस्था लक्षण?
Pregnancy 13th Week में दिखने लगेगा बेबी बंप, अब एंजॉय कर सकती हैं अपनी प्रेगनेंसी

Pregnancy के 13वें week के symptoms: प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में पहली तिमाही की तुलना में राहत रहेगी लेकिन बच्‍चे के पोषण का पूरा ख्‍याल रखना होगा। अपने बढ़ते वजन पर भी निगाह रखनी होगी।

pregnancy 10th week
चूंकि, अब आप दूसरी तिमाही में कदम रख चुकी हैं इसलिए अब मिसकैरेज का खतरा तेजी से कम होगा। थकान और मतली से राहत मिलेगी जिससे आप अपनी प्रेगनेंसी इंजॉय कर पाएंगी।
आपकी प्रेगनेंसी की पहली तिमाही खत्‍म हो गई है। 13वें हफ्ते के साथ आपकी दूसरी तिमाही शुरू हो गई है। 12वां हफ्ता खत्‍म होते-होते आपके शरीर में हॉर्मोंस का उतार-चढ़ाव स्थिर हो जाता है। इसलिए आपको मॉर्निंग सिकनेस या सुबह उठते ही जी मिचलाने की समस्‍या से लगभग निजात मिल गई होगी। अगर ऐसा अभी तक नहीं हुआ है तो कुछ रोज में हो जाएगा। आइए जिक्र करते हैं 13वें हफ्ते के कुछ और लक्षणों का।
प्रेगनेंट महिला के शरीर में बदलाव
इस सप्‍ताह के साथ आपकी प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही शुरू हो चुकी है। पेट अब बाहर निकलने लगा है। अब आपको अपने मैटरनिटी कपड़े पहनने शुरू कर देने चाहिए।
पहली तिमाही के अंत में ही हार्मोंस का स्‍तर सामान्‍य हो जाता है इसलिए अब आपको ज्‍यादा परेशानियां नहीं होंगीं। हार्मोंस के कारण कुछ महिलाओं की सेक्‍स ड्राइव बढ़ सकती है।
प्रेगनेंसी में सांस फूलने को न करें नजरअंदाज, कारण कर देंगे हैरान

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सांस फूलना खासतौर पर प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में नॉर्मल बात है और गर्भावस्‍था के शुरुआती समय में भी ऐसा होता है। कुछ महिलाओं को गर्भावस्‍था की पहली तिमाही से सांस लेने में दिक्‍कत महसूस हो सकती है।

अगर सीढ़ी चढ़ने जैसे काम करने पर सांस फूल रहा है तो ये सामान्‍य बात है, लेकिन अगर आपको अस्‍थमा जैसी कोई सांस की बीमारी है तो इसकी वजह से आपको परेशानी उठानी पड़ सकती है।
अगर सांस फूलने के साथ कोई अन्‍य लक्षण नहीं दिख रहा है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहींं है और शिशु को प्‍लेसेंटा से पर्याप्‍त ऑक्‍सीजन मिल रहा है इसलिए शिशु को कोई नुकसान नहीं होगा। गहरी सांस लेने से भ्रूण ऑक्‍सीजन युक्‍त खून मिलेगा।
प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सांस फूलने के कारणइस समय भ्रूण इतना बड़ा नहीं हुआ होता है कि उसकी वजह से सांस लेने में दिक्‍कत आए।

पेट से फेफड़ों और दिल को अलग करने वाला ऊतक का मस्‍कुलर बैंड डायफ्राम 4 प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में 4 सेमी तक बढ़ जाता है। डायफ्राम की मूवमेंट से फेफड़ों में हवा भरने में मदद मिलती है।

डायफ्राम में बदलाव के साथ-साथ प्रेगनेंट महिला को अक्‍सर प्रोजेस्‍टेरोन हार्मोन बढ़ने की वजह से तेज सांसें आने लगती हैं।
दूसरी तिमाही में गर्भवती महिला को सांस फूलने की दिक्‍कत ज्‍यादा स्‍पष्‍ट महसूस हो सकती है। गर्भ में बढ़ रहे भ्रूण की वजह से इस समय सांस फूल सकती है। हालांकि, दिल के काम करने के तरीके में कुछ बदलाव आने के कारण भी ऐसा हो सकता है।

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में खून की मात्रा तेजी से बढ़ने लगती है। इस खून को पूरे शरीर और प्‍लेसेंटा में पहुंचाने के लिए दिल को ज्‍यादा काम करना पड़ता है।

दिल के ज्‍यादा काम करने की वजह से प्रेगनेंट महिला को सांस लेने में दिक्‍कत हो सकती है।


प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में शिशु के सिर की पोजीशन की वजह से सांस लेने में आसानी या और ज्‍यादा दिक्‍कत हो सकती है। शिशु के घूमने और पेल्विस की तरफ आने से पहले उसका सिर पसलियों के अंदर और डायफ्राम पर दबाव महसूस हो सकता है जिससे सांस लेने में दिक्‍कत होती है।

नेशनल वुमेंस हैल्‍थ रिसोर्स सेंटर के मुताबिक, प्रेगनेंसी के 31वें हफ्ते और 34वें हफ्ते में इस तरह की सांस फूलने की दिक्‍कत होती है।



आपके बच्‍चे का आकार
अब तक आपका बच्‍चे के शरीर का आकार एक मटर की फली के बराबर हो गया होगा। इसका वजन लगभग 28 से 30 ग्राम के आसपास होगा। बच्‍चा अभी से अपना अंगूठा चूसने लगा होगा।
सिर, बांह और टांगों के आसपास के ऊतक धीरे धीरे हड्डियों में मजबूती लेने लगेंगें। अब बच्‍चा एमनिओटिक फ्लूइड में यूरिन करना शुरू कर सकता है। अब से लेकर प्रेगनेंसी खत्‍म होने तक शिशु ऐसे ही यूरिन करेगा। अल्‍ट्रासाउंट में बच्‍चे के यौन अंग दिख सकते हैं। आप डॉपलर मशीन के इस्‍तेमाल से शिशु की दिल की धड़कन सुन सकते हैं।



प्रेगनेंसी के 13वें सप्‍ताह के लक्षण
प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में गर्भपात का जोखिम काफी कम हो जाता है। पहली तिमाही की कुछ समस्‍याएं खत्‍म या कम हो जाती हैं जैसे जी मिचलाना, ब्रेस्‍ट में दर्द वगैरह। लेकिन कुछ बढ़ भी जाती हैं, जैसे कमर का दर्द, पेट के निचले हिस्‍से में दर्द।

बेबी बंप :चूंकि आपका बच्‍चा बड़ा हो रहा है इसलिए अब आपका बेबी बंप एकदम स्‍पष्‍ट दिखने लगा होगा। आपकी कमर का आकार भी अब बढ़ गया होगा। अपने शरीर के नए आकार के अनुसार आपको अब कपड़ों की खरीदारी कर लेनी चाहिए।
स्‍ट्रेच मार्क्स : आपके पेट के साथ-साथ ब्रेस्‍ट पर भी स्‍ट्रेच मार्क्स दिखने लगे होंगे। यह बढ़ते वजन और बढ़ते आकार की वजह से हो रहा है। लेकिन बहुत तेजी से वजन बढ़ना भी ठीक नहीं है। इससे प्रेगनेंसी के समय होने वाली डायबिटीज, हाई बीपी वगैरह का डर बढ़ जाता है। इसलिए संतुलित आहार लें, हल्‍की फुल्‍की कसरत करती रहें।
सीने में जलन : सीने में जलन और लेटने में दिक्‍कत हो रही होगी। इसके लिए हल्‍का भोजन लें। दिन में तीन बार अधिक खाने की जगह कई बार थोड़ा-थोड़ा खाएं।
राउंड लिगामेंट पेन : इस समय आपका गर्भाशय तेजी से बढेगा। इसकी वजह से पेट के निचले हिस्‍से में तेज दर्द हो सकता है जिसे राउंड लिगामेंट पेन कहते हैं। उठने या पोजीशन बदलने पर यह दर्द महसूस होता है।
ब्रेस्‍ट लीक होना : ब्रेस्‍ट में भी बदलाव आएगा। प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही शुरू होते ही स्‍तनों में कोलोस्‍ट्रम बनना शुरू हो जाएगा। इसकी वजह से ब्रेस्‍ट से डिस्‍चार्ज होना शुरू हो सकता है।

प्रेगनेंसी में सांस फूलने को न करें नजरअंदाज, कारण कर देंगे हैरान

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सांस फूलना खासतौर पर प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में नॉर्मल बात है और गर्भावस्‍था के शुरुआती समय में भी ऐसा होता है। कुछ महिलाओं को गर्भावस्‍था की पहली तिमाही से सांस लेने में दिक्‍कत महसूस हो सकती है।

अगर सीढ़ी चढ़ने जैसे काम करने पर सांस फूल रहा है तो ये सामान्‍य बात है, लेकिन अगर आपको अस्‍थमा जैसी कोई सांस की बीमारी है तो इसकी वजह से आपको परेशानी उठानी पड़ सकती है।


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अगर सांस फूलने के साथ कोई अन्‍य लक्षण नहीं दिख रहा है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहींं है और शिशु को प्‍लेसेंटा से पर्याप्‍त ऑक्‍सीजन मिल रहा है इसलिए शिशु को कोई नुकसान नहीं होगा। गहरी सांस लेने से भ्रूण ऑक्‍सीजन युक्‍त खून मिलेगा।
प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सांस फूलने के कारणइस समय भ्रूण इतना बड़ा नहीं हुआ होता है कि उसकी वजह से सांस लेने में दिक्‍कत आए।

पेट से फेफड़ों और दिल को अलग करने वाला ऊतक का मस्‍कुलर बैंड डायफ्राम 4 प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में 4 सेमी तक बढ़ जाता है। डायफ्राम की मूवमेंट से फेफड़ों में हवा भरने में मदद मिलती है।

डायफ्राम में बदलाव के साथ-साथ प्रेगनेंट महिला को अक्‍सर प्रोजेस्‍टेरोन हार्मोन बढ़ने की वजह से तेज सांसें आने लगती हैं।
दूसरी तिमाही में गर्भवती महिला को सांस फूलने की दिक्‍कत ज्‍यादा स्‍पष्‍ट महसूस हो सकती है। गर्भ में बढ़ रहे भ्रूण की वजह से इस समय सांस फूल सकती है। हालांकि, दिल के काम करने के तरीके में कुछ बदलाव आने के कारण भी ऐसा हो सकता है।

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में खून की मात्रा तेजी से बढ़ने लगती है। इस खून को पूरे शरीर और प्‍लेसेंटा में पहुंचाने के लिए दिल को ज्‍यादा काम करना पड़ता है।

दिल के ज्‍यादा काम करने की वजह से प्रेगनेंट महिला को सांस लेने में दिक्‍कत हो सकती है।



प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में शिशु के सिर की पोजीशन की वजह से सांस लेने में आसानी या और ज्‍यादा दिक्‍कत हो सकती है। शिशु के घूमने और पेल्विस की तरफ आने से पहले उसका सिर पसलियों के अंदर और डायफ्राम पर दबाव महसूस हो सकता है जिससे सांस लेने में दिक्‍कत होती है।

नेशनल वुमेंस हैल्‍थ रिसोर्स सेंटर के मुताबिक, प्रेगनेंसी के 31वें हफ्ते और 34वें हफ्ते में इस तरह की सांस फूलने की दिक्‍कत होती है।
प्रेगनेंट महिलाएं इस समय क्‍या करें
विटामिन, खनिज पदार्थों और गुड फैट युक्‍त आहार लें। एंटीऑक्‍सीडेंट फल खाएं। अंडे, बींस और ऑयली फिश को अपने आहार में शामिल करें। मर्करी युक्‍त सीफूड न खाएं। फल और सब्जियों को अच्‍छी तरह से धोने के बाद ही खाएं और कच्‍चे अंडे खाने से बचें। कैफीन और एल्‍कोहल से दूर रहें।

डॉक्‍टर की सलाह पर अभी भी एक्‍सरसाइज कर सकती हैं। प्रेगनेंसी में पैदल चलना भी फायदेमंद होता है।
ध्‍यान रहे कि आपकी होने वाली संतान आपके भोजन से ही पोषण ले रही है, साथ ही आप जो हानिकारक चीजें खा या पी रही हैं उनका उतना ही असर उस पर भी होता है। इसलिए शराब, सिगरेट जैसी हानिकारक चीजों से दूर रहें।
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