दो साल के बच्चे को रोज चाहिए सिर्फ इतना दूध, इससे ज्यादा पीने के नुकसान जान उड़ जाएंगे आपके होश
हम सभी जानते हैं कि हेल्दी लाइफ और हेल्दी बॉडी के लिए दूध पीना बहुत जरूरी होता है और टॉडलर बच्चों को तो रोज दूध पिलाया जाता है ताकि उनका सही तरह से विकास हो सके और उनके शरीर को पर्याप्त पोषण मिल सके लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि टॉडलर बच्चों को एक दिन में कितना दूध पिलाना चाहिए?
दो साल के बच्चे को रोज चाहिए सिर्फ इतना दूध, इससे ज्यादा पीने के नुकसान जान उड़ जाएंगे आपके होश
दूध को अक्सर एक संपूर्ण फूड के तौर पर देखा जाता है क्योंकि यह कैल्शियम, विटामिन डी, फैट और प्रोटीन से भरपूर होता है। लगभग हर घर में टॉडलर बच्चों को सुबह उठते ही सबसे पहले नाश्ते में दूध पिलाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि बढ़ते बच्चों के लिए दूध बहुत आवश्यक है और इससे बच्चों की हड्डियों को ताकत मिलती है। पैरेंट्स ये तो जानते हैं कि बच्चों की ग्रोथ के लिए दूध जरूरी है लेकिन उन्हें ये मालूम नहीं होता कि टॉडलर बच्चों को कितना दूध पिलाना चाहिए।
दूध में मौजूद पोषक तत्व टॉडलर बच्चों के हेल्दी विकास में मदद करते हैं और शारीरिक कार्यों को बनाए रखते हैं। हालांकि, ऐसे कई अन्य फूड्स भी हैं जिनमें दूध के जितने ही न्यूट्रिएंट्स होते हैं जैसे कि लीन मीट, मछली और टोफू।
आमतौर पर अगर बच्चा दूध नहीं पीता है तो संतुलित आहार की मदद से उसे जरूरी पोषक तत्व दिए जा सकते हैं। हालांकि, बच्चे की डाइट से दूध को हटाने से पहले माता-पिता को डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए।
टॉडलर बच्चों को कितना दूध पीना चाहिए
12 महीने के हेल्दी बच्चे को ब्रेस्टमिल्क या फॉर्मूला से गाय का दूध पिलाना शुरू कर सकते हैं। एक से दो साल के बच्चे को दिन में दो से तीन कप और दो से पांच साल के बच्चे को 2 से 2.5 कप दूध पिलाना चाहिए।
ब्रेस्टफीडिंग करनी है या नहीं
बच्चे को गाय या अन्य कोई एनीमल मिल्क पिलाना शुरू करने का यह मतलब नहीं है कि आप उसे ब्रेस्टफीडिंग करवाना बंद कर दें। आप टॉडलर बच्चों को भी स्तनपान करवा सकती हैं। अगर बच्चे को गाय या भैंस के दूध से एलर्जी है तो वो सोया मिल्क पी सकता है।
टॉडलर बच्चों के लिए दूध के फायदे
बच्चों को ग्रोथ के लिए इस समय इन तीन न्यूट्रिएंट्स की बहुत जरूरत होती है और दूध से ये तीनों आसानी से मिल जाते हैं।
ज्यादा दूध पीने पर क्या होता है
कई बार पैरेंट्स बच्चे को जरूरत से ज्यादा दूध पिला देते हैं जिसकी वजह ये कुछ परेशानियां होने लगती हैं। गाय के दूध में फैट होता है और इससे बच्चे का पेट जल्दी भर जाता है और बच्चा बाकी चीजें नहीं खा पाता है। इससे पोषण में असंतुलन पैदा होता है और बच्चे को कब्ज जैसी समस्याएं घेरने लगती हैं।
अन्य पोषक तत्वों पर असर
दूध में फैट और कार्ब ज्यादा होता है इसलिए इसके अधिक सेवन से खासतौर पर दो साल से अधिक उम्र के बच्चों में कैलोरी अधिक हो सकती है। कैलोरी ज्यादा मिलने पर बच्चे को वजन बढ़ सकता है और उसे टाइप 2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियां आगे चलकर घेर सकती हैं।
3 साल के बच्चे को कितना दूध देना चाहिए?