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38 सप्ताह की गर्भवती होने पर मुझे क्या महसूस होना चाहिए?

Language: Hindi | Published: 11 Oct 2022 | Views: 20
38 सप्ताह की गर्भवती होने पर मुझे क्या महसूस होना चाहिए?
प्रेग्नेंसी वीक 38, जानिए लक्षण, शारीरिक बदलाव और सावधानियां
प्रेग्नेंसी वीक 38 में गर्भस्थ शिशु का विकास
प्रेग्नेंसी वीक 38 में मेरे शिशु का विकास कैसा है?

प्रेग्नेंसी वीक 38 के दौरान आपके शिशु का वजन 3 किलोग्राम और लंबाई 49.8 के करीब हो जाती है। गर्भावस्था के 38 सप्ताह (प्रेग्नेंसी वीक 38) में भी आपके शिशु के शरीर पर फैट चढ़ने की प्रक्रिया जारी रहती है, हालांकि इस समय यह थोड़ी धीरे हो जाती है। आप देखेंगी कि इस समय आपका वजन बढ़ना रुक गया है या वजन घटने लगा है।

प्रेग्नेंसी वीक 38 के दौरान आपके शिशु की जो मसल्स चूसने और निगलने की क्रिया में मदद करती हैं, वो विकसित हो चुकी होती है, जिस वजह से वो एम्नियोटिक फ्लूड का सेवन कर पाता है। इसकी वजह से आपके शिशु की आंतों में वेस्ट मैटेरियल बनने लगता है। शिशु की आंतों से निकली सेल्स और लानूगो हेयर जैसे वेस्ट मैटेरियल एक हरे-काले रंग के तत्व मैकोनियमका निर्माण करते हैं। प्रेग्नेंसी वीक 38 तक शिशु अपने सभी लानूगो हेयर झाड़ चुका होता है।

हालांकि, कुछ शिशुओं में जन्म के बाद भी लानूगो के कुछ पैच रह जाते हैं। लेकिन, प्रेग्नेंसी वीक 38 के दौरान शिशु के शरीर पर वर्निक्स की सफेद परत रहती है, जो कि जन्म से ठीक पहले उसकी त्वचा द्वारा अवशोषित कर ली जाती है। अगर शिशु की डिलिवरी की ड्यू डेट निकल जाती है और उसका पाचन तंत्र काम करने लगता है, तो लेबर के दौरान या उससे पहले शिशु एम्नियोटिक फ्लूड के में ही वेस्ट मैटेरियल छोड़ देते हैं। इस समय शिशु के सिर की परिधि उसके पेट के बराबर होता है। प्रेग्नेंसी वीक 38 के दौरान शिशु के पंजों के नाखून फिंगरटिप तक विकसित हो जाते हैं।
प्रेग्नेंसी वीक 38 में शारीरिक और दैनिक जीवन में परिवर्तन
प्रेग्नेंसी वीक 38 के दौरान मेरे शरीर में क्या-क्या बदलाव होते हैं?

प्रेग्नेंसी वीक 38 के दौरान आपके पेल्विस में शिशु के होने से आपके ब्लैडर पर प्रेशर पड़ता है। जिससे आपको बार-बार पेशाब आ सकता है। साथ ही इस दौरान आपको खाने में भी परेशानी हो सकती है। इसलिए एक बार में भरपेट खाने से बेहतर है कि आप दिन में चार से पांच बार छोटी-छोटी मील का सेवन करें। आपको पेट पर पड़ रहे प्रेशर के कारण पर्याप्त नींद लेने में भी परेशानी हो सकती है। इसके लिए आप प्रेग्नेंसी वीक 38 के दौरान दिन में सोने की कोशिश करें। ऐसा करने से आप तरोताजा महसूस करेंगी और थकान कम महसूस होगी।
प्रेग्नेंसी वीक 38 के दौरान मुझे किन बातों के बारे में जानकारी होनी चाहिए?

अगर आपके गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है, तो आपको और आपके पार्टनर को उसके सर्कम्सिशन (circumcision) के बारे में निर्णय लेना होगा। मेल बेबीज के पेनिस की फोरस्किन को हटाने की सर्जिकल प्रक्रिया को सर्कम्सिशन कहते हैं। कुछ माता-पिता के लिए पुरुष शिशु का सर्कम्सिशन एक धार्मिक प्रक्रिया भी हो सकती है। जबकि अन्य माता-पिता के लिए यह निर्णय लेना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, सर्कम्सिशन से जुड़ी जानकारी या समस्याओं और इस प्रक्रिया के दौरान दर्द निवारण के तरीकों को जानने के लिए अपने हेल्थ केयर प्रोवाइडर से बात करें।
प्रेग्नेंसी वीक 38 में डॉक्टरी सलाह
प्रेग्नेंसी वीक 38 के दौरान मुझे डॉक्टर को क्या-क्या बताना चाहिए?
प्रेग्नेंसी वीक 38 के दौरान अगर आपकी ड्यू डेट गुजर चुकी है, तो प्रीनेटल केयर की जरूरत होती है। आपका हेल्थ केयर प्रोवाइडर आपके स्वास्थ्य की पूरी जांच करेगा। वो लेबर के लिए आपके सर्विक्स के पतला होने या खुलने की भी जांच करेगा। अगर आपकी ड्यू डेट को गुजरे हुए एक हफ्ते से ज्यादा का समय हो चुका है, तो आपका हेल्थ केयर प्रोवाइडर शायद आपके शिशु की हृदयगति एक इलेक्ट्रोनिक फीटल मॉनिटर के द्वारा चेक कर सकता है। इसके अलावा, वो शिशु की हलचल और एम्नियोटिक फ्लूड की मात्रा का अंदाजा लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड की मदद भी ले सकता है।
प्रेग्नेंसी वीक 38 के दौरान मुझे किन टेस्ट्स के बारे में जानकारी होनी चाहिए?
प्रेग्नेंसी वीक 38 के दौरान आपका डॉक्टर एक से ज्यादा पेल्विक टेस्ट करवाने के लिए सलाह दे सकता है। इससे डॉक्टर को आपके शिशु की गर्भ में पोजीशन के बारे में अंदाजा लग जाता है। पेल्विक एग्जामिनेशन के दौरान डॉक्टर सर्विक्स के खुलने, मुलायम या पतला होने की जांच करने के लिए आपको सर्वाइकल टेस्ट की सलाह भी दे सकता है।

प्रेग्नेंसी वीक 38 से डिलीवरी तक आपको हर हफ्ते में दो बार डॉक्टर के पास जाना चाहिए। ताकि, डॉक्टर निम्नलिखित टेस्ट्स की मदद से आपकी गर्भावस्था के विकास का पता लगा सके।
वजन की जांच (इस समय आपका वजन बढ़ना बंद हो सकता है या घटना शुरू हो सकता है)
ब्लड प्रेशर की जांच (दूसरी तिमाही के मुकाबले इस समय उच्च हो सकता है)
यूरिन में ग्लूकोज और प्रोटीन की जांच
पैरों में वेरीकोज वेन और हाथों-पैरों पर सूजन की जांच
शिशु की हृदय गति
बाहर से यूट्रस के आकार की जांच
यूट्रस के ऊपरी हिस्से की लंबाई की जांच, जिसे फंडस कहते हैं
गर्भ में शिशु की पोजीशन की जांच, ताकि डिलीवरी के समय शिशु की स्थित का पता लग सके

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