गर्भावस्था के चौथे महीने के सामान्य लक्षण
कहा जाता है कि गर्भावस्था की पहली तिमाही सबसे कठिन होती है और आपने मातृत्व की यात्रा के पहले तीन महीने पूरे कर लिए हैं।
गर्भावस्था के चौथे महीने के लक्षण, कुछ इस प्रकार हैं:
गर्भाशय में शिशु के बढ़ने के कारण मलाशय की नसों में दबाव पड़ता है और इस वजह से कुछ महिलाएं बवासीर व अत्यधिक पीड़ा का अनुभव करती हैं। यह समस्या हर गर्भवती महिला को नहीं होती है किंतु कुछ महिलाएं इसका अनुभव जरूर करती हैं ।
गर्भावस्था के हॉर्मोन में वृद्धि के कारण आपके मसूड़े अधिक नर्म और संवेदनशील हो जाते हैं जिस वजह से कई गर्भवती महिलाओं के मसूड़ों से खून आता है और अक्सर ब्रश करते समय यह खून देखा जा सकता है। आमतौर पर यह लक्षण प्रसव के बाद नहीं दिखता है।
मूत्राशय में अत्यधिक दबाव होने के कारण आपको बार-बार पेशाब जाना पड़ सकता है।
गर्भावस्था के चौथे महीने में बच्चे की वृद्धि के कारण कई महिलाओं को सांस लेने में समस्या हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शिशु को अधिक जगह देने के लिए गर्भाशय बढ़ता है और यह वृद्धि आस-पास के आवरण व अंगों पर अधिक दबाव डालती है ।
ज़्यादातर गर्भवती महिलाओं के लिए सीने में जलन की समस्या एक सामान्य लक्षण है। गर्भावस्था के दौरान पाचन शक्ति में कमी के कारण ही यह समस्या उत्पन्न होती है। इस समस्या से बचने के लिए अधिक से अधिक पानी पिएं और एक बार में बहुत सारा भोजन न खाएं । ऐसा करने से शरीर को भोजन पचाने में सरलता होती है ।
गर्भावस्था के दौरान आपकी त्वचा में कई बदलाव होते हैं। हॉर्मोन में वृद्धि के कारण कई महिलाओं की त्वचा में दाग हो सकते हैं। ऐसे समय पर त्वचा की देखभाल के लिए मॉइस्चराइज़र का उपयोग करें।
गर्भावस्था के दौरान निप्पल और उसके आस-पास का घेरा गहरे रंग का हो जाता है और स्तनों की नसें भी अधिक स्पष्ट दिखाई देती हैं।
गर्भावस्था के दौरान 4 महीने का शिशु, माँ के शरीर में हो रहे अनेक परिवर्तनों का कारण बन सकता है, नकसीर उनमें से एक है। रक्तस्त्राव कभी भी एक अच्छा संकेत नहीं रहा है लेकिन गर्भावस्था के दौरान, कुछ महिलाओं को नाक में हल्के स्राव का अनुभव होता है। यह मुख्य रूप से गर्भावस्था को प्रबंधित करने के लिए शरीर द्वारा अधिक मात्रा में रक्त निर्माण किए जाने के कारण होता है। यदि यह समस्या अत्यधिक समय तक रहती है, तो कृपया डॉक्टर से परामर्श करें।
गर्भावस्था के चौथे महीने में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव पेट का आकार होता है, किन्तु बाहरी बदलाव के साथ-साथ शरीर के अंदर भी कुछ बदलाव होते हैं।
गर्भाशय बढ़ने पर आप अपनी पीठ, जांघों और पेट व कमर के क्षेत्र में दर्द महसूस कर सकती हैं, यह दर्द अगले 5 महीनों तक रहेगा।
गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोनल बदलावों के कारण महिलाओं के स्तन का आकार और पूर्णता बढ़ जाती है।
शरीर में हॉर्मोन का उच्च स्तर होने से पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और यह कब्ज़ कुछ महिलाओं में कब्ज़ का कारण भी बनती है ।
गर्भाशय में शिशु की वृद्धि के कारण मूत्राशय व मूत्रमार्ग में भी दबाव बढ़ता है और इसी वजह से गर्भवती महिलाओं में मूत्र की आवृति और रिसाव होना एक आम बात है।
कुछ महिलाएं अपने हाथों में झुनझुनी या कार्पेल टनल सिंड्रोम का अनुभव करती हैं, यह मुख्यतः कलाई के आस-पास के ऊतकों में सूजन के कारण होता है और सर्जरी के बाद यह समस्या ठीक हो जाती है ।
शारीरिक रक्त की मात्रा में वृद्धि होने के कारण टांगों की नसें मोटी हो जाती हैं और इसे वैरिकॉज़ वेन्स (नसें) भी कहा जाता है, प्रसव के बाद यह समस्या भी ठीक हो जाती है।
गर्भावस्था के दौरान पाचन धीमा होने से सीने में जलन की समस्या भी हो सकती है।
शरीर में हॉर्मोनल बदलाव होने से योनि सराव में बढ़ोतरी होती है जो शिशु को पोषित करता है।
4 महीने गर्भावस्था लक्षण?