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अगर बच्चा माँ का दूध न पिए तो क्या करे?

Language: Hindi | Published: 13 Oct 2022 | Views: 19
अगर बच्चा माँ का दूध न पिए तो क्या करे?
मां का दूध नहीं पी पा रहा है बच्‍चा, तो कप से भी पिला सकती हैं मिल्‍क, इससे भी होते हैं कई फायदे

कुछ बच्चे किसी कारणवश मां का दूध नहीं पी पाते हैं। ऐसे बच्चों को कप की मदद से दूध पिलाया जा सकता है।
समय से पूर्व प्रसव के कारण या मां का दूध खींचने में शिशु के अक्षम होने के कारण कई बच्चे स्तनपान नहीं कर पाते हैं। ऐसे बच्चों को विकल्प के तौर पर कप की मदद से दूध पिलाया जाता है।कप से दूध पिलाना सबसे आसान तरीकों में से एक है। अगर आपको लगता है कि नवजात शिशु को कप से दूध पिलाना सेफ नहीं है, तो ऐसा न सोचें क्‍योंकि कप से दूध पिलाने पर भी शिशु को कुछ फायदे तो मिलते ही हैं।
​बच्चों को कब दें कप में दूध?

6 माह तक बच्चे को सिर्फ और सिर्फ मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। मां के दूध में अनेक पोषक तत्‍व होते हैं जिसका बच्‍चे के लिए कोई और विकल्‍प नहीं है। हालांकि, कुछ बच्चों को किसी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या या स्‍तन से दूध न खींच पाने की दिक्‍कत हो रही है, तो आप उसे कप से भी दूध पिला सकती हैं। निम्‍न स्थितियों में बच्‍चे को कप से दूध पिलाया जा सकता है -
बच्चा प्रीमैच्योर पैदा हुआ है और फिलहाल मां का दूध नहीं पी सकता है।
न्यूरोलॉजिकल या अन्य तरह की समस्या के कारण बच्चा ब्रेस्ट फीड या बोतल से दूध नहीं पी पाता है।
बच्चा मां के स्‍तन से दूध नहीं खींच पाता है, जिस कारण उसे कप से दूध पिलाया जाता है।
जब बच्चे को किसी कारणवश मां से दूर रखा जाता है।
मां का दूध बच्चे के लिए पर्याप्त नहीं होता है।
​बच्चे को कप में दूध पिलाने के फायदे
कई स्थितियों में शिशु को कप से दूध पिलाया जाता है। इसके निम्न फायदे हैं -
यह बच्चे को दूध पिलाने के अन्य विकल्पों में सबसे आसान और सस्ता तरीका है।
इसके लिए आपको बोतल की तरह ज्‍यादा चीजों की जरूरत नहीं पड़ती है।
यदि शिशु काफी छोटा है तो ब्रेस्‍ट मिल्‍क को कप में डालकर शिशु को पिलाएं।
कप में दूध पिलाना काफी सुरक्षित होता है। इसमें हाइजीन की ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती है।
दूध पिलाने के बाद कप को बस धोने की जरूरत होती है जबकि दूसरे तरीकों जैसे फिंगर फीडिंग से बच्चे को संक्रमण होने का खतरा बना रहता है।
शिशु जन्म के तुरंत बाद कप या चम्‍मच से दूध पी सकता है। 7 माह में जन्मे शिशु को भी कप के जरिए दूध पिलाया जा सकता है।
​बोतल से दूध पिलाना
अक्‍सर मांएं 6 महीने के बाद शिशु को स्तनपान की बजाय बोतल से दूध पिलाना शुरू कर देती हैं जबकि बोतल की निप्पल पर कीटाणु पनपने और उसकी सफाई को लेकर दिक्‍कत रहती है। वहीं कप से दूध पिलाने में इस तरह की परेशानियां कम ही आती हैं।

बोतल से दूध पिलाने के कारण बच्चे के दांत टेढ़े-मेढ़े आ सकते हैं जबकि कप से दूध पिलाने में ऐसी कोई समस्या नहीं होती है।

कप में दूध पीने वाले बच्चे आसानी से कभी भी स्तनपान के लिए तैयार हो सकते हैं जबकि बोतल से दूध पीने वाले बच्चों को ब्रेस्‍ट से दूध खींचने में दिक्कत हो सकती है।

यदि बच्चा हर बार कप से दूध पीता है, तो कभी कभी उसे फिंगर फीडिंग कराएं ताकि बच्चा चूसना सीख सके।
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