सिजेरियन ऑपरेशन के बाद क्यों होता है सिरदर्द और कैसे कर सकते हैं इसका इलाज
शिशु को पेट से बाहर निकालने के लिए जो सर्जरी की जाती है, उसे सिजेरियन ऑपरेशन (cesarean operation) कहते हैं। इस ऑपरेशन के बाद महिलाओं को कई तरह की समस्याएं होती हैं।
headache after cesarean delivery
नॉर्मल डिलीवरी न हो पाने की स्थिति में सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery) करवाई जाती है। इस ऑपरेशन में कई घंटे लगते हैं और गर्भवती महिला को एनेस्थीसिया देकर सर्जरी की जाती है।
कई महिलाओं को ऑपरेशन के बाद सिरदर्द होता है। आमतौर पर एनेस्थीसिया और डिलीवरी के स्ट्रेस के कारण यह सिरदर्द होता है।
एनेस्थीसिया की वजह से सिरदर्द
ऑपरेशन से पहले स्पाइनल एपिड्यूरल और स्पाइनल ब्लॉक, दो तरह से एनेस्थीसिया दिया जा सकता है। स्पाइनल एपिड्यूरल के साइड इफेक्ट में बहुत तेज सिरदर्द शामिल है। जब स्पाइनल फ्लूइड स्पाइनल कॉर्ड के आसपास की झिल्लियों से रिसने लगे तो सिरदर्द होता है और इसमें मस्तिष्क पर दबाव कम हो जाता है।
आमतौर पर ऑपरेशन के 48 घंटे के बाद सिरदर्द शुरू हो जाता है। इलाज के बिना ही स्पाइन की झिल्लियां कुछ हफ्तों में ठीक हो जाती हैं।
एनेस्थीसिया की वजह से सिरदर्द, उल्टी और मतली, लो ब्लड प्रेशर, सनसनाहट महसूस होना और कमर दर्द जैसे लक्षण महसूस होते हैं।
नॉर्मल और सिजेरियन के अलावा और भी कई तरीकों से हो सकती है डिलीवरी
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यह प्रसव का सबसे आम तरीका है और इस तरह की डिलीवरी को सबसे सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है। इसमें दर्द को कम करने या प्रसव को जल्दी करने के लिए किसी भी तरह की दवा का उपयोग नहीं किया जाता है। कुछ महिलाओं को शिशु की हार्ट रेट मॉनिटर करने जैसी मेडिकल हेल्प की जरूरत पड़ सकती है।
नॉर्मल डिलीवरी को महिलाओं के लिए सबसे सही माना जाता है, क्योंकि इसके बाद रिकवर करने में कम समय लगता है।
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यदि प्रेगनेंसी में कोई परेशानी हो तो सिजेरियन डिलीवरी करवाई जाती है। इस प्रक्रिया में मां के पेट पर कट लगाकर बच्चे को बाहर निकाला जाता है। यह एक बड़ा ऑपरेशन होता है। कई महिलाएं प्रसव पीड़ा से बचने के लिए सिजेरियन का विकल्प पहले से ही चुन लेती हैं।
वहीं, अगर प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की जटिलता का पता चले या पेट में जुड़वां या तीन बच्चे हों या बच्चा उल्टा हो गया हो तो इस स्थिति में सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ता है। इस सर्जरी के बाद प्रेगनेंट महिला को रिकवर करने में अधिक समय लगता है।
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इसमें कई तरह से डिलीवरी करवाई जाती है, जैसे कि :
फोरसेप्स : बड़े चम्मच जैसा दिखने वाला उपकरण जिसे फोरसेप्स कहते हैं। डॉक्टर इससे शिशु के सिर को पकड़ कर बर्थ कैनाल से बाहर निकालते हैं।वैक्यूम एक्सट्रैक्शन : फोरसेप्स की तरह ही वैक्यूम डिलीवरी होती है। इसमें डॉक्टर शिशु के सिर पर प्लास्टिक कप लगाकर बर्थ कैनाल से बाहर खींचते हैं।एपिसिओटोमी : इसमें योनि मुख और गुदा के बीच के ऊतक पर एक कट लगाया जाता है। इस ऊतक को पेरिनियम कहते हैं। जब शिशु को जल्दी से डिलीवर करवाना होता है, तभी इस तरह की डिलीवरी करवाई जाती है।एमनिओटोमी : इसमें डॉक्टर एमनिओटिक थैली के खुलने वाली जगह पर एक छोटा प्लास्टिक हुक लगाते हैं। इसमें योनि से तेजी से पानी निकलता है।
हो सकता है कि जिन महिलाओं की पहले सिजेरियन डिलीवरी हुई हो, उनकी बाद में नॉर्मल डिलीवरी हो। जब तक लेबर पेन शुरू नहीं होता, तब तक सिजेरियन ऑपरेशन नहीं किया जाता है। पहली बार में ऑपरेशन से डिलीवरी होने पर दूसरी बार नॉर्मल डिलीवरी हो तो यूट्राइन रप्चर का खतरा रहता है।
इस तरह कई प्रकार की डिलीवरी होती हैं और प्रेगनेंट महिला की स्थिति के आधार पर ही डॉक्टर यह तय करते हैं कि प्रेगनेंट महिला की किस तरह की डिलीवरी करनी है।
सी सेक्शन केबाद सिरदर्द के अन्य कारण
एनेस्थीसिया के अलावा ब्लड प्रेशर में उतार चढ़ाव, आयरन की कमी, मांसपेशियों में तनाव, नींद की कमी और हार्मोनल असंतुलन के कारण भी सिरदर्द हो सकता है।
कुछ स्थितियों में डिलीवरी के बाद प्रीक्लैंप्सिया के कारण भी सिरदर्द हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर और डिलीवरी के बाद पेशाब में अधिक प्रोटीन के कारण ऐसा होता है।
इसकी वजह से तेज सिरदर्द, आंखों में धुंधलापन, पेट दर्द, पेशाब कम आने की दिक्कत हो सकती है।
अगर आपकाे डिलीवरी के तुरंत बाद ये लक्षण दिख रहे हैं तो बिना देरी किए डॉक्टर को दिखाएं।
ऑपरेशन के बाद सिरदर्द का इलाज
डिलीवरी के बाद महिलाओं को सिर और आंखों के पीछे तेज दर्द महसूस हो सकता है। इसके अलावा कंधों और गर्दन में भी चुभने वाला दर्द होता है।
दर्द निवारक दवा, कैफीन और आराम करने से सिरदर्द कम हो सकता है। अगर आपको स्पाइनल एपिड्यूरल दिया गया है और इलाज से आराम नहीं मिल पा रहा है तो डॉक्टर दर्द को कम करने के लिए एपिड्यूरल ब्लड पैच दे सकते हैं।
नॉर्मल और सिजेरियन के अलावा और भी कई तरीकों से हो सकती है डिलीवरी
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यह प्रसव का सबसे आम तरीका है और इस तरह की डिलीवरी को सबसे सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है। इसमें दर्द को कम करने या प्रसव को जल्दी करने के लिए किसी भी तरह की दवा का उपयोग नहीं किया जाता है। कुछ महिलाओं को शिशु की हार्ट रेट मॉनिटर करने जैसी मेडिकल हेल्प की जरूरत पड़ सकती है।
नॉर्मल डिलीवरी को महिलाओं के लिए सबसे सही माना जाता है, क्योंकि इसके बाद रिकवर करने में कम समय लगता है।
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यदि प्रेगनेंसी में कोई परेशानी हो तो सिजेरियन डिलीवरी करवाई जाती है। इस प्रक्रिया में मां के पेट पर कट लगाकर बच्चे को बाहर निकाला जाता है। यह एक बड़ा ऑपरेशन होता है। कई महिलाएं प्रसव पीड़ा से बचने के लिए सिजेरियन का विकल्प पहले से ही चुन लेती हैं।
वहीं, अगर प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की जटिलता का पता चले या पेट में जुड़वां या तीन बच्चे हों या बच्चा उल्टा हो गया हो तो इस स्थिति में सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ता है। इस सर्जरी के बाद प्रेगनेंट महिला को रिकवर करने में अधिक समय लगता है।
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इसमें कई तरह से डिलीवरी करवाई जाती है, जैसे कि :
फोरसेप्स : बड़े चम्मच जैसा दिखने वाला उपकरण जिसे फोरसेप्स कहते हैं। डॉक्टर इससे शिशु के सिर को पकड़ कर बर्थ कैनाल से बाहर निकालते हैं।वैक्यूम एक्सट्रैक्शन : फोरसेप्स की तरह ही वैक्यूम डिलीवरी होती है। इसमें डॉक्टर शिशु के सिर पर प्लास्टिक कप लगाकर बर्थ कैनाल से बाहर खींचते हैं।एपिसिओटोमी : इसमें योनि मुख और गुदा के बीच के ऊतक पर एक कट लगाया जाता है। इस ऊतक को पेरिनियम कहते हैं। जब शिशु को जल्दी से डिलीवर करवाना होता है, तभी इस तरह की डिलीवरी करवाई जाती है।एमनिओटोमी : इसमें डॉक्टर एमनिओटिक थैली के खुलने वाली जगह पर एक छोटा प्लास्टिक हुक लगाते हैं। इसमें योनि से तेजी से पानी निकलता है।
हो सकता है कि जिन महिलाओं की पहले सिजेरियन डिलीवरी हुई हो, उनकी बाद में नॉर्मल डिलीवरी हो। जब तक लेबर पेन शुरू नहीं होता, तब तक सिजेरियन ऑपरेशन नहीं किया जाता है। पहली बार में ऑपरेशन से डिलीवरी होने पर दूसरी बार नॉर्मल डिलीवरी हो तो यूट्राइन रप्चर का खतरा रहता है।
इस तरह कई प्रकार की डिलीवरी होती हैं और प्रेगनेंट महिला की स्थिति के आधार पर ही डॉक्टर यह तय करते हैं कि प्रेगनेंट महिला की किस तरह की डिलीवरी करनी है।
सर्जरी या डिलीवरी के बाद सिरदर्द होना बहुत ही आम बात है। अगर आपको ऑपरेशन के बाद सिरदर्द हो रहा है तो यह एनेस्थीसिया या डिलीवरी के स्ट्रेस की वजह से हो सकता है।
ऐसे में आराम करें और पानी पिएं। दर्द निवारक दवा से भी काफी आराम मिलता है। अगर आपका दर्द बढ़ रहा है और इलाज से भी आराम नहीं मिल पा रहा है तो आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
अब अगर आपका सिजेरियन ऑपरेशन हुआ है और आपको सिर में दर्द महसूस हो रहा है तो ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कई महिलाओं को ऑपरेशन के बाद सिरदर्द की शिकायत होती है और आप इसमें अकेले नहीं हैं। हालांकि, आपको थोड़ी समझदारी दिखानी है और समय पर दवा एवं इलाज लेना है ताकि परेशानी को बढ़ने से पहले ही समय पर रोका जा सके।
ऑपरेशन के बाद दर्द?