30 सप्ताह की गर्भावस्था में भ्रूण विकास
आपके शिशु का माप सिर से एड़ी तक अब 39.9 सें.मी. (15.7 इंच) से थोड़ा ज्यादा हो गया है, जो कि तकरीबन एक पत्तागोभी के समान है। लंबाई के आधार पर शिशु की बढ़त अब जल्द ही धीमी पड़ जाएगी, मगर जन्म के समय तक उसका वजन बढ़ना जारी रहेगा। इस चरण पर उसका वजन करीब अब 1.3 किलोग्राम हो गया है।
यदि आप अपने पेट पर टॉर्च या कोई चमकदार रोशनी डालें, तो आप शायद महसूस कर पाएं कि शिशु इसे देखने के लिए अपना सिर घुमाने लगता है। हालांकि, उसकी दृष्टि अभी विकसित हो रही है और जन्म के बाद भी इसका विकसित होना जारी रहेगा। जब शिशु का जन्म होता है, तो वह केवल 20 से 30 सें.मी. की दूरी तक ही चेहरों और चीजों को देख सकता है।
शिशु के चारों तरफ मौजूद एमनियोटिक द्रव हर सप्ताह बढ़ रहा था, मगर शिशु के बड़ा होने के साथ-साथ द्रव का बढ़ना कम होता जा रहा है। अगले कुछ हफ्तों में, एमनियोटिक द्रव की मात्रा अपने चरम पर 800 मि.ली. और 1000 मि.ली. के बीच पहुंच जाएगी। जब आप प्रसव की नियत तिथि तक पहुंचती है, यह घटकर 600 मि.ली. तक हो गया होता है।
इस महीने शायद आपका काफी वजन बढ़ गया होगा। गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनों में हर सप्ताह 450 ग्राम वजन वृद्धि सामान्य मानी जाती है। जन्म से पहले इन अंतिम महीनों में आपके शिशु की पोषण से जुड़ी जरुरतें भी चरम पर पहुंच जाती हैं।
आप शायद अपने बढ़े वजन और आकार से काफी खुश होंगी। आखिरकार, यदि सेहतमंद ढंग से आपका वजन बढ़ रहा है, तो यह शिशु को उसकी जिंदगी की बेहतरीन शुरुआत देने के लिए अच्छा है।
बढ़े हुए रक्त प्रवाह और गर्भावस्था के हॉर्मोनों की वजह से कुछ नकारात्मक दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। चिंता न करें, ये लक्षण आमतौर पर अस्थाई होते हैं और शिशु के जन्म के बाद आपका शरीर फिर से सामान्य रूप में आ जाएगा। हालांकि, ऐसे कुछ लक्षण हैं, जिन्हें अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए, इनके बारे में हमारा यह लेख पढ़ें।
गर्भावस्था में भुलक्कड़ हो जाना यानि चीजों को भूल जाना भी आम है। इसके वास्तविक कारणों का तो पता नहीं है, मगर गर्भावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक बदलाव इसकी वजह हो सकते हैं। यह भी एक अस्थाई दुष्प्रभाव है और शिशु के जन्म के बाद सब सामान्य हो जाएगा।
केजी में 30 सप्ताह में बच्चे का वजन कितना होना चाहिए?