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क्या 4 महीने का बच्चा तरल भोजन कर सकता है?

Language: Hindi | Published: 22 Oct 2022 | Views: 11
क्या 4 महीने का बच्चा तरल भोजन कर सकता है?
शिशु को ठोस आहार देने की शुरुआत इन चीजों से करें

शिशु के बड़ा होने पर उसे ठोस आहार देना शुरू किया जाता है। बच्‍चों को ठोस आहार में क्‍या चीजें देनी हैं, ये जानना आपके लिए बहुत जरूरी है।

शिशु को 6 महीने के होने के बाद ठोस आहार देना शुरू किया जाता है। बच्‍चे के लिए खाना एकदम नया होता है और उसके पेट को इसे पचाने में समय लग सकता है इसलिए आपको इस बात का बहुत ध्‍यान रखना पड़ेगा कि ठोस आहार शुरू करने पर बच्‍चे को सबसे पहले क्‍या खिलाना चाहिए।
यहां हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बता रहे हैं जो शिशु को ठोस आहार शुरू करने पर जरूर देने चाहिए या इन्‍हीं से ठोस आहार की शुरुआत करनी चाहिए।
पहली बार बच्‍चे को कैसे खिलाएं ठोस आहार
आप ब्रेस्‍ट मिल्‍क और ठोस आहार को मिलाकर बच्‍चे को दे सकते हैं। इससे उसे एक दम से नया बदलाव नहीं लगेगा। पहले हमेशा थोड़ी मात्रा में ही खिलाना चाहिए। एक निवाले में एक छोटी चम्‍मच से ज्‍यादा न खिलाएं। जब शिशु को ठोस आहार खाने की आदत हो जाए तब आप उसे दही और सेब आदि मिलाकर खिला सकते हैं।
बच्‍चों को रोज कितना घी खिलाना चाहिए, जानिए फायदे और नुकसान के बारे में
यदि घी का सेवन सही मात्रा में किया जाए तो इससे स्‍वास्‍थ्‍य को कई तरह के लाभ मिलते हैं। घी में सैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं जो आसानी से पच जाते हैं।
घी विटामिनों और खनिज पदार्थों का बेहतरीन स्रोत है। इससे शिशु के विकास में बहुत मदद मिल सकती है। बच्‍चे को एक साल का होने तक नमक नहीं खिलाना चाहिए इसलिए उसके ठोस आहार में स्‍वाद और पोषण बढ़ाने के लिए घी डाला जा सकता है।

6 महीने से अधिक उम्र के बच्‍चे के आहार में घी को शामिल कर सकते हैं। दाल और चावल की खिचड़ी में घी की कुछ बूंदें डालकर इसकी शुरुआत की जा सकती है। आप शिशु के बढ़ने के साथ-साथ घी की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। हालांकि, एक दिन में बच्‍चे को एक चम्‍मच से ज्‍यादा घी नहीं खिलाना चाहिए।
शिशु के विकास के लिए घी बहुत लाभकारी होता है। हालांकि, आपको प्रतिदिन सीमित मात्रा में ही घी का सेवन करना है। ज्‍यादा घी खाने से पाचन संबंधी परेशानियां, भूख में कमी और मोटापे की शिकायत हो सकती है।

6 महीने के शिशु को दिन में बार में सिर्फ आधा चम्‍मच घी खिलाना चाहिए। 8 महीने के शिशु को दो बार कर के ए‍क तिहाई से एक चम्‍मच घी, 10 महीने के शिशु को दिन में तीन बार कर के एक चम्‍मच घी

एक साल के बच्‍चे को दिन में 3 बार कर के एक से डेढ़ चम्‍मच घी और दो साल के बच्‍चे को दिन में तीन बार कर के डेढ़ से दो चम्‍मच घी खिलाना चाहिए।
एक चम्‍मच घी से 112 किलो कैलोरी एनर्जी मिलती है इसलिए घी शिशु के लिए एनर्जी का अच्‍छा स्रोत हो सकता है। रोज सीमित मात्रा में घी खाने से संतुलित रूप से वजन बढ़ता है। घी में कोंजुगेटिड लिनोलिक एसिड होता है जो शिशु को संतुलित वजन पाने में मदद करता है।
घी में मौजूद कैल्शियम बच्‍चों की हड्डियों को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करता है। इसमें कई विटामिन और डीएचए होते हैं जो आंखों, त्‍वचा और इम्‍यूनिटी के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। बच्‍चों में एक्जिमा और खुजली का इलाज घी से किया जा सकता है। प्रभावित हिस्‍से पर बस हल्‍का सा घी मल दें। घी के सेवन से बच्‍चे का पाचन भी ठीक रहता है।
सेब
बच्‍चों को सेब का मीठा और खट्टा स्‍वाद पसंद आएगा। आप ठोस आहार की शुरुआत सेब से कर सकते हैं। वहीं, सेब में फाइबर अधिक और फैट की मात्रा कम होती है इसलिए यह फल शिशु के लिए बहुत लाभदायक होता है। आप सेब का छिलका उतारकर उसकी प्‍यूरी बनाकर बच्‍चे को दे सकती हैं।

चुकंदर
चुकंदर को उबालकर खिलाने से शिशु को अनेक पोषक तत्‍व मिल जाते हैं। चुकंदर में फोलिक एसिड होता है जो शिशु के मस्तिष्‍क के विकास में मदद करता है। कई बच्‍चे बड़े आराम से चुकंदर खा लेते हैं।
बच्‍चों को रोज कितना घी खिलाना चाहिए, जानिए फायदे और नुकसान के बारे में

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यदि घी का सेवन सही मात्रा में किया जाए तो इससे स्‍वास्‍थ्‍य को कई तरह के लाभ मिलते हैं। घी में सैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं जो आसानी से पच जाते हैं।

घी विटामिनों और खनिज पदार्थों का बेहतरीन स्रोत है। इससे शिशु के विकास में बहुत मदद मिल सकती है। बच्‍चे को एक साल का होने तक नमक नहीं खिलाना चाहिए इसलिए उसके ठोस आहार में स्‍वाद और पोषण बढ़ाने के लिए घी डाला जा सकता है।



6 महीने से अधिक उम्र के बच्‍चे के आहार में घी को शामिल कर सकते हैं। दाल और चावल की खिचड़ी में घी की कुछ बूंदें डालकर इसकी शुरुआत की जा सकती है। आप शिशु के बढ़ने के साथ-साथ घी की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। हालांकि, एक दिन में बच्‍चे को एक चम्‍मच से ज्‍यादा घी नहीं खिलाना चाहिए।


शिशु के विकास के लिए घी बहुत लाभकारी होता है। हालांकि, आपको प्रतिदिन सीमित मात्रा में ही घी का सेवन करना है। ज्‍यादा घी खाने से पाचन संबंधी परेशानियां, भूख में कमी और मोटापे की शिकायत हो सकती है।

6 महीने के शिशु को दिन में बार में सिर्फ आधा चम्‍मच घी खिलाना चाहिए। 8 महीने के शिशु को दो बार कर के ए‍क तिहाई से एक चम्‍मच घी, 10 महीने के शिशु को दिन में तीन बार कर के एक चम्‍मच घी

एक साल के बच्‍चे को दिन में 3 बार कर के एक से डेढ़ चम्‍मच घी और दो साल के बच्‍चे को दिन में तीन बार कर के डेढ़ से दो चम्‍मच घी खिलाना चाहिए।


एक चम्‍मच घी से 112 किलो कैलोरी एनर्जी मिलती है इसलिए घी शिशु के लिए एनर्जी का अच्‍छा स्रोत हो सकता है। रोज सीमित मात्रा में घी खाने से संतुलित रूप से वजन बढ़ता है। घी में कोंजुगेटिड लिनोलिक एसिड होता है जो शिशु को संतुलित वजन पाने में मदद करता है।


घी में मौजूद कैल्शियम बच्‍चों की हड्डियों को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करता है। इसमें कई विटामिन और डीएचए होते हैं जो आंखों, त्‍वचा और इम्‍यूनिटी के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। बच्‍चों में एक्जिमा और खुजली का इलाज घी से किया जा सकता है। प्रभावित हिस्‍से पर बस हल्‍का सा घी मल दें। घी के सेवन से बच्‍चे का पाचन भी ठीक रहता है।


नाशपाती
नाशपाती से बच्‍चों का पाचन ठीक रहता है। नाशपाती में प्रचुर मात्रा में फास्‍फोरस और कैल्शियम होता है जाे शिशु की हड्डियों को मजबूत बनाने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। नाशपाती का छिलका उतार कर, उसके बीज निकालने के बाद प्‍यूरी के रूप में शिशु को खिलाएं।


दही
7 से 8 महीने के बच्‍चे को दही खिला सकते हैं। दही बहुत नरम होती है इसलिए शुरुआती ठोस आहार के रूप में दही खिला सकते हैं। ये कैल्शियम का अच्‍छा स्रोत होता है और इससे शिशु का पाचन भी दुरुस्‍त रहता है।
बच्‍चों को रोज कितना घी खिलाना चाहिए, जानिए फायदे और नुकसान के बारे में

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यदि घी का सेवन सही मात्रा में किया जाए तो इससे स्‍वास्‍थ्‍य को कई तरह के लाभ मिलते हैं। घी में सैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं जो आसानी से पच जाते हैं।

घी विटामिनों और खनिज पदार्थों का बेहतरीन स्रोत है। इससे शिशु के विकास में बहुत मदद मिल सकती है। बच्‍चे को एक साल का होने तक नमक नहीं खिलाना चाहिए इसलिए उसके ठोस आहार में स्‍वाद और पोषण बढ़ाने के लिए घी डाला जा सकता है।


6 महीने से अधिक उम्र के बच्‍चे के आहार में घी को शामिल कर सकते हैं। दाल और चावल की खिचड़ी में घी की कुछ बूंदें डालकर इसकी शुरुआत की जा सकती है। आप शिशु के बढ़ने के साथ-साथ घी की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। हालांकि, एक दिन में बच्‍चे को एक चम्‍मच से ज्‍यादा घी नहीं खिलाना चाहिए।


शिशु के विकास के लिए घी बहुत लाभकारी होता है। हालांकि, आपको प्रतिदिन सीमित मात्रा में ही घी का सेवन करना है। ज्‍यादा घी खाने से पाचन संबंधी परेशानियां, भूख में कमी और मोटापे की शिकायत हो सकती है।

6 महीने के शिशु को दिन में बार में सिर्फ आधा चम्‍मच घी खिलाना चाहिए। 8 महीने के शिशु को दो बार कर के ए‍क तिहाई से एक चम्‍मच घी, 10 महीने के शिशु को दिन में तीन बार कर के एक चम्‍मच घी

एक साल के बच्‍चे को दिन में 3 बार कर के एक से डेढ़ चम्‍मच घी और दो साल के बच्‍चे को दिन में तीन बार कर के डेढ़ से दो चम्‍मच घी खिलाना चाहिए।


एक चम्‍मच घी से 112 किलो कैलोरी एनर्जी मिलती है इसलिए घी शिशु के लिए एनर्जी का अच्‍छा स्रोत हो सकता है। रोज सीमित मात्रा में घी खाने से संतुलित रूप से वजन बढ़ता है। घी में कोंजुगेटिड लिनोलिक एसिड होता है जो शिशु को संतुलित वजन पाने में मदद करता है।

यह भी पढ़ें : बच्‍चों को बोतल से दूध पिलाने के नुकसान
घी में मौजूद कैल्शियम बच्‍चों की हड्डियों को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करता है। इसमें कई विटामिन और डीएचए होते हैं जो आंखों, त्‍वचा और इम्‍यूनिटी के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। बच्‍चों में एक्जिमा और खुजली का इलाज घी से किया जा सकता है। प्रभावित हिस्‍से पर बस हल्‍का सा घी मल दें। घी के सेवन से बच्‍चे का पाचन भी ठीक रहता है।


केला और शकरकंद
बच्‍चों के लिए केला सुपरफूड का काम करता है। इसमें फोलेट की उच्‍च मात्रा होती है जो बच्‍चे के दिमाग को एक्टिव रखने में मदद करता है। इसके अलावा शिशु को ठोस आहार की शुरुआत शकरकंद से भी करवाई जा सकती है। इसमें बीटा-कैरोटीन होता है जो आंखों को तेज करता है और इम्‍युनिटी बढ़ाता है।


ठोस आहार देने में इन बातों का रखें ध्‍यान
बच्‍चे आसानी से खाना नहीं खाते हैं। आपको उन्‍हें खेल-खेल में खाना खिलाना पड़ता है।
ठोस आहार शुरू करने से पहले ब्रेस्‍ट मिल्‍क या फॉर्मूला मिल्‍क को चम्‍मच और कटोरी से पिलाना शुरू करें।
बच्‍चे के खाने में चीनी और नमक का इस्‍तेमाल न या कम करें।
खाना ज्‍यादा गर्म या ठंडा नहीं होना चाहिए। बच्‍चे को खिलाने से पहले खाने का तापमान चैक जरूर कर लें।
शिशु के बीमार या खराब मूड में होने पर ठोस आहार देने से बचें। इससे हो सकता है कि उनमें ठोस आहार के प्रति गलत धारण बन जाए।
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