ऐसे बनते हैं जुड़वा बच्चे
जुड़वा बच्चे दो तरह के होते हैं— एक-दूसरे से अलग दिखने वाले या मैनोज़ाइगॉटिक या बिल्कुल एक से दिखने वाले जुड़वा या डायज़ाइगॉटिक। मैनोज़ाइगॉटिक जुड़वा बच्चों का निर्माण तब होता है जब एक एग से किसी स्पर्म द्वारा फर्टिलाइज़ किया जाता है, लेकिन दो एम्ब्रीओ निर्माण होता है। इस तरह जन्म लेने वाले जुड़वा बच्चों की आनुवांशिक संरचना एक ही होती है। जबकि डायज़ाइगॉटिक जुड़वा बच्चे तब बनते हैं जब दो अलग स्पर्म्स दो एग्स को फर्टिलाइज करते हैं और दो अलग दिखनेवाले बच्चे पैदा होते हैं। ऐसे बच्चों की आनुवांशिक संरचना अलग होती है।
होता है अनुवाशिंकी असर
अगर आपके परिवार में पहले भी जुड़वा बच्चे पैदा हो चुके हैं, तो काफी सम्भावना है कि आपको भी जुड़वा बच्चे हों। यह आनुवांशिक प्रवृतियों की वजह से होता है। यही नहीं, अगर आप भी अपने भाई या बहन की जुड़वा हैं तो जुड़वा बच्चों की मां बनने की आपकी सम्भावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। हालांकि, ऐसा माना जाता है कि ऐसी सम्भावनाएं माता और उसके परिवार पर आधारित होती हैं, पिता के नहीं।
ऐसी महिलाओं में होती है अधिक संभावना
महिलाएं जिनका बीएमआई 30 या उससे अधिक हो उनमें जुड़वा बच्चों को जन्म देने की सम्भावना अधिक होती है। हालांकि, ऐसी स्थिति में केवल फ्रैटर्नल एक से दिखने वाले जुड़वा बच्चे होते हैं। साथ ही, ऐसी भी जानकारी मिलती रही है कि ऊंची महिलाएं भी जुड़वा बच्चों को अधिक जन्म देती हैं। जहां यह बात प्रचलित है कि उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के लिए गर्भधारण करना मुश्किल हो सकता है। कुछ स्टडीज़ में ऐसा पाया गया है कि उम्र बढ़ने के साथ आपको जुड़वा बच्चे होने की सम्भावना बढ़ जाती है। दरअसल जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन के निर्माण में भी कमी आती है, जो एग ओवरीज़ को ओव्यलैशन के लिए रीलिज़ करने में एक अहम भूमिका निभाता है। तो जैसे-जैसे रीलिज़ होनेवाले एग की संख्या बढ़ने लगती है, वैसे जुड़वा बच्चों के लिए गर्भधारण करने की सम्भावना बढ़ जाती ह
ये होते है शुरूआती लक्षण
1- भूख लगना
जुड़वां गर्भावस्था के लक्षणों में से सबसे बड़ा लक्षण यह है कि आपको हमेशा भूख लगेगी। जुड़वां गर्भावस्था में महिला को सामान्य गर्भावस्था में महिला की तुलना में अधिक खाने की जरूरत महसूस होती है। यदि आप भी जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती हैं तो आपको भी लगातार भूख लगेगी।
2- ब्लीडिंग और स्पोटिंग
एक महिला जो जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती है उसको स्पोटिंग और ब्लीडिंग होने की संभावना अधिक होती है। अगर आप गुलाबी और भूरे रंग के धब्बे नोटिस करते है तो यह अत्यंत सामान्य बात है। यदि आपके ब्लीडिंग हो रही है और साथ में बुखार और लाल खून के धब्बे नहीं है तो डरने की कोई बात नही हैं।
3- मॉर्निग सिक्नेस
जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती महिला के प्रारंभिक लक्षण में मॉर्निग सिक्नेस बहुत ज्यादा होती है। पचास प्रतिशत से अधिक महिलाएं अपनी गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण में ही मतली और जी मिचलाना का अनुभव शुरू कर देती हैं। महिला जिनके जुड़वा बच्चे होने वाले है अन्य गर्भवती महिलाओं की तुलना में मॉर्निग सिक्नेस का अनुभव अधिक करती है।
4- वजन बढ़ना
जुड़वां गर्भावस्था में वजन सामान्य गर्भावस्था की तुलना में अधिक होता है क्योंकि आपके दो बच्चे, दो प्लासन्टा और अधिक एमनियोटिक द्रव के साथ होते है। एक औसत गर्भावस्था में सामान्य वजन 25 पाउंड होता है जबकि जुड़वां गर्भावस्था में यह 30 से 35 पाउंड के बीच हो सकता हैं।
5- दो दिल
बच्चे के दिल की धड़कन पहली बार सुनना हर माता पिता के लिए सबसे यादगार अनुभव होता है। बच्चे के जन्म से पहले आप डॉपलर प्रणाली के माध्यम से अपने बच्चे के दिल की धड़कन सुन सकते हैं। गर्भावस्था के नौवें सप्ताह से जुड़वा बच्चों के दिल की धड़कन अलग-अलग से सुनी जा सकती है। हालांकि, यह इतना आसान नहीं है क्योंकि इनकी पहचान को कभी-कभी अलग नहीं किया जा सकता है।
7 सप्ताह की गर्भवती होना, वो भी एक से ज्यादा बच्चों के साथ, ये वाकई एक बहुत खबूसूरत अहसास है जो एक माँ से बेहतर और कोई नहीं समझ सकता, खासकर वो जो पहली बार माँ बनने जा रही हैं। अपनी गर्भावस्था की शुरुआत में आपने जो कुछ भी उम्मीद की थी उसके लक्षण आपको इस समय के करीब दिखाई देने लगेंगे। आपको अपनी पैंट्स टाइट लगने लगेंगी और इस बात का अहसास होने लगेगा कि आपके अंदर कुछ बढ़ रहा है। इस समय भ्रूण अपने विकास के एक बहुत ही महत्वपूर्ण पड़ाव पर हैं। पिछले सप्ताह की तुलना में 7वें सप्ताह में बच्चों का आकार दोगुना बढ़ जाएगा।
आम शारीरिक परिवर्तन
चूंकि इस समय के दौरान आपके शिशुओं का विकास सबसे तेज गति से होता है, इसलिए गर्भवती महिला के शरीर द्वारा अनुभव किए जाने वाले बदलाव भी काफी अधिक होते हैं।
आपको और लोगों के मुकाबले ज्यादा गर्मी महसूस हो सकती हैं जिससे आप पंखे या एसी में रहना पसंद करेंगी, आपके शरीर में होने वाला ये बदलाव ब्लड सर्कुलेशन में बढ़ोतरी की वजह से होता है।
कई महिलाओं को उनकी त्वचा की रंगत कम लगने लगती है। इसका प्रभाव आप अपने पेट के पास बनने वाली एक काली रेखा के रूप में देख सकती हैं। शरीर के अन्य हिस्सों में आपको पिगमेंटेशन के छोटे-छोटे धब्बे दिखाई दे सकते हैं, जो डिलीवरी के बाद अपने आप कम हो जाते हैं। यहाँ तक कि आपकी हथेलियां भी काली पड़ सकती हैं।
स्तनों में सूजन बनी रहने की वजह से ये काफी संवेदनशील हो जाते हैं। यहाँ तक संभावना है कि आपको इस हिस्से में नसें उभरी हुई दिखाई देने लगती है। क्योंकि निपल का रंग गहरा होने लगता है और उसका आकार भी बड़ा हो जाता है, इसलिए निपल के आसपास का हिस्सा भी गहरा होने लगता है।
जैसे-जैसे बच्चों का विकास होता है वैसे-वैसे गर्भाशय का आकार बढ़ता है, इसलिए सबसे ज्यादा परिवर्तन गर्भाशय में ही देखने को मिलता है। इसका आकार एक नाशपाती जैसा दिखता है। ये धीरे-धीरे पेट के दाएं ओर से खिसकना शुरू करता है, इस तरह की गतिशीलता आंतरिक लिगामेंट को सामान्य से ज्यादा कसने लगती है और जब अपना शरीर जल्दी से मोड़ती हैं, तो आपको इससे काफी दर्द होता है।
इस चरण में ओवुलेशन पूरी तरह से रुक जाता है और नए अंडों का उत्पादन पूरी तरह से बंद हो जाता है। अंडाशय (ओवरी) द्वारा निर्मित सिस्ट हार्मोन का उत्पादन करती है जो आपकी गर्भावस्था को बनाए रखने में मदद करती है।
चूंकि ब्लड वेसल्स तेजी से बढ़ रहे होते हैं, इसलिए इस चरण के आसपास योनि स्राव भी बढ़ सकता है। इसके अलावा, ये स्राव आपकी योनि को चिकना करता है और आपको डिलीवरी के लिए तैयार करता है। ये स्राव गाढ़ा और सफेद रंग का होगा क्योंकि योनि सामान्य से थोड़ी अधिक एसिडिक हो जाती है।
गर्भाशय को अतिरिक्त रक्त प्रवाह प्रदान करने के लिए आपके शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाएगी। गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान रक्त की मात्रा बढ़ने के कारण आपका पल्स रेट भी बढ़ सकता है।
दूसरी तिमाही तक, आपके शिशु गर्भ में काफी जगह घेर लेते हैं आपके शरीर के अंदर अधिक जगह घेरना शुरू कर देते हैं, तो आपके अंग उन्हें समायोजित करने के लिए इधर-उधर खिसकते हैं। आपका हृदय भी थोड़ा बाईं ओर खिसक जाता है। दूसरी ओर, फेफड़े ऊपर की ओर आने लगते हैं, जिससे आपकी छाती थोड़ी फैल जाती है। इस कारण फेफड़े की लंबाई पहले की अपेक्षा में बहुत अधिक फैल जाती है, जिससे उन्हें अच्छे से साँस लेने और छोड़ने में आसानी होती है।
शरीर में इतने ज्यादा पोषक परिवर्तन होते हैं कि इससे किडनी में सूजन आ जाती है, क्योंकि इसका काम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है । टोक्सिन का स्राव और इसका बाहर निकलना बहुत अधिक होता है, जिससे आपको पेशाब लगने का अहसास ज्यादा होने लगेगा।
यद्यपि आप सामान्य से अधिक भूख महसूस करेंगी, लेकिन थोड़ा सा भोजन करने पर आपका पेट भरा हुआ महसूस होगा, क्योंकि आपका पेट पहले की अपेक्षा में धीमी गति से खाली होगा। इसके परिणामस्वरूप गर्भवती महिलाओं में एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ जाती है। फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन न करने या कम करने से आपको कब्ज की परेशनी हो सकती है।
जुड़वां गर्भावस्था के 7वें सप्ताह के लक्षण
7वें सप्ताह में जुड़वां या उससे ज्यादा बच्चों की गर्भावस्था के संकेत, काफी साफ तौर पर नजर आने लगेंगे ।
मतली और मॉर्निंग सिकनेस बढ़ जाएगी, विशेषतः एकाधिक शिशुओं के मामले में क्योंकि हार्मोन पहले की तुलना में अधिक मात्रा में स्रावित होने लगते हैं।
खाने की क्रेविंग बढ़ सकती हैं और आपको खाने की कोई भी चीज देखकर उसे खाने का मन करेगा। जब तक आप स्वस्थ आहार का पालन करती हैं, तब तक आप सामान्य से अधिक भोजन बिलकुल कर सकती हैं । इसके विपरीत, कुछ महिलाओं को विशिष्ट खाद्य पदार्थों के प्रति अरुचि का अनुभव होता है। यह उन खाद्य पदार्थों के साथ ज्यादा हो सकता है जिनमें एक विशेष गंध या सुगंध होती है, जो आपकी मॉर्निंग सिकनेस को और मतली की समस्या को और बढ़ा सकती है । खाने के प्रति पैदा होने वाली अरुचि ज्यादातर हार्मोन के उतार-चढ़ाव के कारण होती है।जब तक आपको सभी पोषक तत्व पर्याप्त रूप से मिल रहे हैं तब तक परेशानी वाली कोई बात नहीं है। आप चाहें तो हल्के स्वाद वाले सूखे खाद्य पदार्थ जैसे दही या बिस्कुट का भी सेवन स्नैक्स के रूप में कर सकती हैं।
गर्भावस्था के दौरान, कुछ महिलाओं को मुंहासों का अनुभव हो सकता है। हालांकि, कोई भी उपचार करने से पहले बेहतर होगा कि आप अपने डॉक्टर से सलाह ले लें ।
आपको बहुत ज्यादा थूक बनने लगता है, जो बार-बार उलटी होने की वजह से होता है। आप सोते समय भी लार टपका सकती हैं।
गर्भाशय के बढ़ने के कारण महिलाओं को पेट में मामूली मरोड़ यानि क्रैम्प्स का अनुभव हो सकता है। चिंता न करें, जब तक ये क्रैम्प्स बहुत तीव्र और बार-बार न हो रहे हों तब तक कोई परेशानी वाली बात नहीं है।
जुड़वां गर्भावस्था के 7वें सप्ताह में पेट
एक सप्ताह में बच्चों की होने वाली अचानक वृद्धि से आपके पेट का बढ़ता आकार स्पष्ट होने लगेगा। पेट का आकार बढ़ने की वजह से कुछ महिलाओं को त्वचा पर कुछ हल्की रेखाएं या धारियां भी दिख सकती हैं, जिसका रंग थोड़ा लाल होगा। ये स्तनों और जांघों पर भी देखी जाती हैं। इस समय आपके शरीर में स्ट्रेच मार्क्स आने शुरू हो जाते हैं।
जुड़वां गर्भावस्था के 7वें सप्ताह में अल्ट्रासाउंड
अधिकांश डॉक्टर इस चरण तक आपको यह बात स्पष्ट कर देते हैं कि आपके गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे पल रहे हैं! वैसे आप यह जानकारी दो सप्ताह पूर्व भी प्राप्त कर सकती हैं, लेकिन इस सप्ताह में यह तथ्य अधिक प्रबल होता है, यही वजह है कि ज्यादातर डॉक्टर सातवें हफ्ते तक इंतजार करते हैं और कभी-कभी इससे पहले के सप्ताह से आपको इसके लिए तैयार करते हैं। सातवें सप्ताह के अल्ट्रासाउंड में दो या उससे अधिक बच्चों की उपस्थिति को आसानी से देखा जा सकता है। हालांकि अभी शिशुओं के आकार में बहुत अधिक विकास नहीं हुआ होता है, जब तक कि आपके प्रत्येक शिशु में उनके शारीरिक अंग ठीक से विकसित नहीं होते हैं, तब तक आप थोड़ा धैर्य बनाए रख सकती हैं।
आहार
गर्भावस्था का 7वां सप्ताह सामान्यतः ऐसा समय होता है, जब अधिकतर महिलाओं को खाने की अधिक इच्छा हो सकती है। कुछ मामलों में, ऐसे चीजें जो आपको पहले बिलकुल पसंद नहीं थीं या जिनमें शायद पहले आपको रूचि नहीं थी वो अचानक से आपको स्वादिष्ट लगने लगेंगी। कुछ लोगों का कहना है कि क्रेविंग यानी खाने की त्रीव इच्छा होना इस बात का संकेत होती है कि आपको पोषक तत्वों की और जरुरत है। उदाहरण के लिए, आइसक्रीम खाने का मन करना कैल्शियम की कमी का संकेत हो सकता है या मांस की क्रेविंग होना प्रोटीन की आवश्यकता को पूरा करने का संकेत हो सकता है।
क्रेविंग के अलावा, कुछ खाद्य पदार्थों को आपके आहार का एक हिस्सा होना चाहिए ताकि सभी पोषक तत्वों का एक संतुलित आहार सुनिश्चित किया जा सके। शुरूआत में जब आपको मॉर्निंग सिकनेस की समस्या होती है, उस दौरान विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन करना बहुत मुश्किल हो जाता है। आप उन फलों या सब्जियों को चुनें जिसमें तेज गंध न हो ताकि, आप अपनी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकें।
देखभाल संबंधी टिप्स
गर्भावस्था के दौरान खुद का बहुत खयाल रखने की जरूरत होती है और इस दौरान आपको खासकर स्वस्थ भोजन खाना चाहिए और नीचे बताई गई बातों पर ध्यान देना चाहिए।
क्या करें
जितना जल्दी हो सके अपनी मेडिकल जांच करवाएं। अपने सवालों की एक सूची तैयार करें और उसे अपने डॉक्टर के साथ साझा करें, ताकि आपको सभी उत्तर मिल सकें।
प्रतिदिन या सप्ताह में कम से कम दो या तीन बार अपने पेट की तस्वीर लें ऐसा करने से आप अंदाजा लगा सकती हैं कि आपकी गर्भावस्था कैसे धीरे-धीरे आगे बढ़ी है। ऐसा करने से आप अंदाजा लगा सकती हैं कि आपकी गर्भावस्था कैसे धीरे-धीरे आगे बढ़ी है।
क्या अल्ट्रासाउंड 7 सप्ताह में जुड़वा बच्चों को मिस कर सकता है?