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क्या गर्भनाल आपके नाभि से जुड़ी है?

Language: Hindi | Published: 13 Oct 2022 | Views: 16
क्या गर्भनाल आपके नाभि से जुड़ी है?
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गर्भनाल मां और बच्चे को जोड़ती है। इसी नाल के जरिए मां जो कुछ खाती है, उसका पोषण बच्चे को मिलता है।
गर्भनाल सिर्फ पौष्टिक चीजों को ही बच्चे तक नहीं पहुंचाती बल्कि विषैली चीजों को बच्चे तक पहुंचने से भी रोकती है। गर्भनाल का एक सिरा गर्भाशय से जुड़ा होता है और दूसरा शिशु की नाभि से। डिलीवरी के बाद गर्भनाल को महिला के शरीर से निकाल दिया जाता है और आखिरी सिरा जो कि बच्चे की नाभि से जुड़ा होता है, वह कुछ दिनों में अपने आप सूखकर निकल जाती है।
जरूरी है गर्भनाल का निकलना

सी-सेक्शन होने पर गर्भनाल को उसी समय निकाल दिया जाता है। असल में गर्भनाल का निकलना काफी जरूरी है। यदि ऐसा न किया गया तो गर्भनाल से बहते खून के कारण महिला के शरीर में इंफेक्शन हो सकता है। इसके बाद गर्भनाल निकालने के लिए सर्जरी भी की जा सकती है।
​गर्भावस्था में गर्भनाल कहां होती है

गर्भावस्था के दौरान गर्भनाल अपनी जगह बदलती रहती है। हालांकि, गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में यह गर्भाशय के निचले हिस्से में स्थित हो सकती है। लेकिन जैसे-जैसे गर्भावस्था बढ़ती जाती है, गर्भनाल गर्भाशय के ऊपरी हिस्से में पहुंच सकती है।

गर्भनाल के साइज का पता 18 सप्ताह बाद अल्ट्रासाउंड से चलता है। जैसा कि पहले ही बताया गया है कि शिशु के जन्म के बाद इसे निकाल दिया जात है। हालांकि, बच्चे के जन्म के बाद हल्का संकुचन हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को डिलीवरी के बाद भी दबाव बनाना पड़ता है।
​गर्भनाल कैसे काम करती है

यह गर्भवती महिला के शरीर से बच्चे को ऑक्सीजन और पोषक तत्व (जैसे विटामिन, ग्लूकोज, और पानी) वितरित करती है और बच्चे से अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकालती है।

यह उन हार्मोन का उत्पादन करती है जो शिशु को बढ़ने और विकसित होने में मदद करते हैं। यह रक्‍त‍ वाहिकाओं की मदद से बच्चे के शरीर में एंटीबॉडी को जाने देती है। ये एंटीबॉडी शिशु के जन्म से पहले तक उसे कुछ जीवाणु संक्रमण और वायरल बीमारियों से बचाती है।
​कैसे रखें गर्भनाल का ख्याल

प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित चेकअप के लिए जाएं ताकि आपके स्वास्थ्य का पता चलता रहे खासकर बीपी के बारे में। हाई बीपी की वजह से गर्भनाल में परेशानी उत्पन्न हो सकती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान दी गई दवाएं ही लें। ओवर डोज कभी न करें। बिना डाॅक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें। हालांकि, कई दवाईयां गर्भ में पल रहे शिशु के लिए सही मानी जाती हैं। इसके बावजूद खुद से किसी भी दवा का सेवन कभी न करें। इससे गर्भनाल पर भी असर पड़ सकता है।
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प्रेग्नेंसी के दौरान सभी वैक्सीनेशन समय-समय पर लगवाएं। इनमें कई ऐसे वैक्सीनेशन होंगे जो आपको डिप्थीरिया आदि से बचाते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकिंग बिल्कुल न करें। यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए काफी हानिकारक है।

सी-सेक्शन की जरूरत न हो, तो सी-सेक्शन कभी न करवाएं। इसके लिए पहले डॉक्टर से सलाह लें। ध्यान रखें कि सी-सेक्शन के कारण आपकी दूसरी प्रेग्नेंसी में जटिलताएं आ सकती है। इसमें प्लेसेंटा प्रीविया और प्लेंसेंटा एक्रेटा भी शामिल हैं।
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