Google AdSense Header Slot

क्या गर्भवती होने पर भूखा सोना ठीक है?

Language: Hindi | Published: 22 Oct 2022 | Views: 15
क्या गर्भवती होने पर भूखा सोना ठीक है?
प्रेग्‍नेंसी में भूख कम लगती है ज्‍यादा, इससे पता चल सकता है लड़का होगा या लड़की

गर्भावस्‍था में महिलाओं की भूख बढ़ जाती है जो कि नॉर्मल बात है। हालांकि, ऐसा जरूरी नहीं है कि हर महिला को प्रेग्‍नेंसी में ज्‍यादा भूख लगे।
किसी को कम भूख लगती है तो किसी को ज्‍यादा। माना जाता है कि प्रेग्‍नेंसी में भूख लगने का संबंध बच्‍चे के जेंडर से होता है। इस आर्टिकल हम इसी बात पर चर्चा करने वाले हैं कि प्रेग्‍नेंसी में भूख लगने का संबंध बच्‍चे के जेंडर से कैसे होता है।
भारत में गर्भस्‍थ शिशु के लिंग का पता लगाना गैर-कानूनी है, लेकिन आप भी इस बात से इनकार नहीं करेंगें कि कंसीव करने की खबर से लेकर डिलीवरी तक कपल्‍स के मन में यही सवाल रहता है कि लड़का होगा या लड़की। अब आप अल्‍ट्रासाउंड के जरिए तो अपने बच्‍चे का जेंडर पता नहीं कर सकते हैं, लेकिन फिर भी गर्भावस्‍था में कई लक्षण ऐसे होते हैं जो आपको आपके बच्‍चे के जेंडर का संकेत दे सकते हैं। इनमें से एक गर्भवती महिला को लगने वाली भूख भी है।

क्‍या कहती है रिसर्च
पेट में लड़का होने पर लड़की होने की तुलना में महिलाओं को 10 पर्सेंट भूख ज्‍यादा लगती है।

इस स्‍टडी के लिए हार्वर्ड स्‍कूल ऑफ पब्लिक हेल्‍थ में बॉस्‍टन बेथ इजराइल डेकोनेस मेडिकल सेंटर में 244 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया था। इन महिलाओं से इनकी प्रेग्‍नेंसी की दूसरी तिमाही की डायट के बारे में पूछा गया था।
​लड़का होने पर कितनी लगती है भूख

सर्वे के परिणामों के मुताबिक, बेटा पैदा करने वाली महिलाओं ने 8 पर्सेंट प्रोटीन, 9 पर्सेंट कार्बोहाइड्रेट, 11 पर्सेंट एनीमल फैट और 15 पर्सेंट वेजिटेबल ऑयल लड़की पैदा करने वाली महिलाओं की तुलना में ज्‍यादा खाया था। अधिक खाना खाने के अलावा लड़का पैदा करने वाली महिलाओं का वजन भी ज्‍यादा नहीं बढ़ा था।

शोधकर्ताओं का कहना है कि भ्रूण के टेस्टिकल्‍स द्वारा स्रावित टेस्‍टोस्‍टेरोन गर्भ में लड़का होने वाली महिलाओं में एक्‍स्‍ट्रा फूड क्रेविंग को ट्रिगर करती है।
​कब पता चल सकता है जेंडर
अल्‍ट्रासाउंड ही बच्‍चे के जेंडर के बारे में बताने का सबसे सही और विश्‍वसनीय तरीका है। आमतौर पर प्रेग्‍नेंसी के 7वें हफ्ते के आसपास शिशु का जेनिटेलिया शुरू होता है।

हालांकि, प्रेग्‍नेंसी के 14वें हफ्ते तक अधिकतर बच्‍चे एक जैसे ही दिखते हैं। 18 से 20 सप्‍ताह के बाद अल्‍ट्रासाउंड से बच्‍चे के लिंग के बारे में ज्‍यादा स्‍पष्‍ट बताया जा सकता है।
​अन्‍य तरीके
इसके अलावा और भी कई ऐसे प्रेग्‍नेंसी के लक्षण होते हैं जो बच्‍चे के जेंडर के बारे में उसके जन्‍म से पहले ही आपको संकेत दे सकते हैं।

माना जाता है कि प्रेग्‍नेंसी में मॉर्निंग सिकनेस ना होने का मतलब पेट में लड़का होना होता है। कहते हैं कि अगर पेट में लड़का हो तो गर्भवती महिला की स्किन पर मुहांसे नहीं होते हैं। नमकीन या खट्टी चीजें खाने का मन करना भी बेटा पैदा होने का संकेत है। हालांकि, इन सब बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

आईवीएफ यानि इन विट्रा फर्टिलाइजेशन में इस प्रक्रिया के शुरू होने के बाद से ही आपको जल्‍दी अपने बच्‍चे का जेंडर पता चल सकता है। इसमें स्‍क्रीनिंग थोड़ी महंगी हो सकती है लेकिन रिजल्‍ट 100 फीसदी सही होता है।
Share this article:

Facebook | Twitter | WhatsApp