शायद इस दुनिया में लेबर पेन से ज्यादा दर्दनाक और कुछ नहीं होगा। कहते हैं कि एक बच्चे को जन्म देने में जितना दर्द होता है, उतना किसी और चीज में नहीं होता है। प्रसव पीड़ा के दर्द को कम करने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं जिनमें एपिड्यूरल और स्पाइनल ब्लॉक शामिल है।
एपिड्यूरल ब्लॉक
विदेशों में लेबर पेन को कम करने के लिए इस तरीके का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसमें दर्द निवारक और संवेदनात्मक गुण होते हैं। एपिड्यूरल एक टयूब जैसा उपकरण है जिसे पीठ में लगाया जाता है। दर्द के संकेतों को मस्तिष्क तक पहुंचने से दवा रोक देती है। इंजेक्शन लगने के बाद महिला को पेट के नीचे ज्यादा कुछ महसूस नहीं होता है और वो होश में रहते हुए भी पुश कर पाती है।
स्पाइनल ब्लॉक
स्पाइनल ब्लॉक पेट के नीचे के हिस्से को सुन्न कर देता है लेकिन इसमें दवा रीढ़ की हड्डी के आसपास फ्लूइड के रूप में एक शॉट दिया जाता है। ये जल्दी असर करता है लेकिन इसका प्रभाव सिर्फ एक या दो घंटे के लिए रहता है।
इसके अलावा स्पाइनल और एपिड्यूरल ब्लॉक को एक साथ भी लिया जा सकता है। इसमें दोनों प्रकार के एनेस्थीसिया का फायदा मिलता है। ये जल्दी काम करता है और इसमें अधिक समय तक दर्द महसूस नहीं होता है।
भले ही इस तरह लेबर पेन कम हो जाता हो, लेकिन इसके कुछ साइड इफेक्ट भी होते हैं।
खुजली और मतली
एपिड्यूरल में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं की वजह से खुजली हो सकती है। डॉक्टर खुजली से राहत पाने के लिए दवा दे सकते हैं। ओपोइड दर्द निवारक दवाओं के कारण कभी-कभी पेट खराब हो सकता है और आपको मतली या उल्टी हो सकती है।
नसों को नुकसान
अगर दवा नसों में चली जाए तो कुछ मामलों में एपिड्यूरल की वजह से दौरे भी पड़ सकते हैं। एपिड्यूरल के लिए इस्तेमाल होने वाली सुई नस को नुकसान पहुंचा दे तो शरीर के निचले हिस्से को महसूस करने की शक्ति कुछ समय या हमेशा के लिए खो सकती है।
फिलहाल भारत में लेबर पेन को कम करने के इन तरीकों का अधिक इस्तेमाल नहीं किया जाता है, लेकिन फिर भी आप डॉक्टर से इसके बारे में सलाह जरूर ले सकती हैं।
क्या प्रसव पीड़ा दर्द रहित हो सकती है?