प्रेग्नेंसी के इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। प्रेग्नेंसी में कुछ ऐसे लक्षण भी होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है।
pregnancy symptoms
गर्भावस्था के दौरान शरीर में तेजी से बदलाव आते हैं और इस स्थिति में यह समझ पाना मुश्किल होता है कि दर्द या कोई लक्षण कितना सामान्य या गंभीर है। अगर आपके मन में गर्भावस्था में होने वाली किसी समस्या को लेकर मन में शंका पैदा हो रही है तो, उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।
गर्भावस्था के लक्षण कई ऐसे होते हैं जिन्हें तुरंत मेडिकल उपचार की जरूरत होती है। यहां हम आपको प्रेग्नेंसी के कुछ ऐसे ही लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें प्रेगनेंट महिला को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
प्रेग्नेंसी के लक्षण
यदि बच्चा सामान्य से कम मूव या किक कर रहा है तो ये चिंता की बात हो सकती है। प्रेग्नेंसी के 16वें हफ्ते में शिशु का मूव करना महसूस होने लगता है। अगर बच्चे की मूवमेंट में कमी लग रही है तो तुरंत डॉक्टर से बात करें।
वजाइनल ब्लीडिंग या स्पॉटिंग भी एक गंभीर लक्षण है। हालांकि, प्रेग्नेंसी में सेक्स या योनि की जांच के बाद हल्की-सी स्पॉटिंग होना आम बात है।
रोजाना खूब तरल पदार्थ और पानी पीने से मूत्र मार्ग में जमा बैक्टीरिया पेशाब के जरिए बाहर निकल जाता है। इससे इंफेक्शन से बचाव होता है। शरीर को हाइड्रेट रखें और प्यास लगने पर पानी पिएं। इस तरह आपके शरीर से बैक्टीरिया निकल जाएगा और आपमें संक्रमण का खतरा कम रहेगा।
विटामिन सी की खुराक बढ़ाने से ई.कोलाई के पनपने की संभावना कम हो सकती है जिससे मूत्र मार्ग में संक्रमण से बचाव होता है। विटामिन सी पेशाब में एसिड के स्तर को बढ़ाता है जो कि संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करता है। लाल शिमला मिर्च, संतरा और कीवी में प्रचुरता में विटामिन सी पाया जाता है।
लौंग को माइक्रोबियल-रोधी, वायरल-रोधी और फंगस-रोधी गुणों से युक्त माना जाता है। लौंग का तेल ई.कोलाई को खत्म करने में मदद करता है और यूटीआई को रोकता है। वैसे आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श के बाद ही लौंग के तेल का प्रयोग करना चाहिए।
यूटीआई होने पर क्रैनबैरी जूस भी बहुत फायदेमंद होता है लेकिन इसमें चीनी मिलाने की जरूरत नहीं है। क्रैनबैरी मूत्रमार्ग में इंफेक्शन होने से रोकती है और संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया के विकास को भी रोकने में मदद कर सकती है।
शरीर को सुरक्षा प्रदान करने के रूप में इस्तेमाल होने वाले फ्लोरा को प्रोबायोटिक्स से मदद मिलती है। ये पेट में हानिकारक बैक्टीरिया को हटाकर हेल्दी बैक्टीरिया बनाते हैं। प्रोबायोटिक दही और कच्ची चीज आदि से आपको प्रोबायोटिक्स मिल सकते हैं।
प्रेगनेंट महिलाएं यदि पर्याप्त मात्रा में पानी एवं तरल पदार्थों का सेवन करेंगी तो इससे उन्हें ज्यादा पेशाब आएगा और इस तरह मूत्राशय में बैक्टीरिया विकसित नहीं हो पाएगा। वहीं, अगर गर्भवती महिला बहुत लंबे समय तक पेशाब को रोक कर रखती है तो इससे मूत्रमार्ग में बैक्टीरिया बढ़ जाता है जिससे संक्रमण पैदा होता है।
वहीं, बार-बार पेशाब करने से मूत्राशय से बैक्टीरिया बाहर निकल जाता है। इसलिए यूटीआई से बचने और इसका इलाज करने के लिए पेशाब करते रहें।
प्रेग्नेंसी में महिलाओं को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और ऐसे में अगर यूटीआई हो जाए तो परेशानी और बढ़ जाती है। इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने निजी अंगों की साफ-सफाई रखें, ढीले कपड़े पहनें और संतुलित आहार लें जिससे आप यूटीआई से बच सकें।
योनि से होने वाले डिस्चार्ज में बदलाव आना जैसे कि सफेद से पतला, गुलाबी या खूनी रंग लिए हुए। प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में 37वें हफ्ते के बाद डिस्चार्ज बढ़ना आम बात है और ये प्रसव के लिए शरीर के तैयार होने का संकेत भी हो सकता है।
पेल्विक हिस्से में दबाव होना (शिशु के नीचे की ओर आने जैसा महसूस होना), कमर के निचले हिस्से में पहली बार दर्द होना, मासिक धर्म की तरह ऐंठन या पेट दर्द होना और प्रेग्नेंसी के 37वें हफ्ते से पहले ही 6 या इससे ज्यादा बार संकुचन महसूस होता है पानी पिएं और आराम करें। अगर एक घंटे तक ये लक्षण नहीं जाते हैं और बढ़ जाते हैं तो डॉक्टर को बताएं।
पेशाब करते समय दर्द या जलन होना, पेशाब करने के बाद भी पेशाब आने जैसा महसूस होना, पेशाब कम या न आना, यूरिन में झाग या खून के धब्बे आना और पेशाब से तेजू बदबू आना मूत्राशय में संक्रमण का संकेत हो सकता है।
ठड लगना या 100.4 डिग्री फारेनहाइट या इससे ज्यादा बुखार होना। उल्टी के साथ दर्द या बुखार होना।
नजर में अचानक से बदलाव आना या डबल विजन, धुंधला दिखने जैसी समस्या होना प्रीक्लैम्प्सिया का संकेत हो सकते हैं।
बार-बार या तेज सिरदर्द जो कि आराम करने या दवा लेने पर भी न जाए या सिरदर्द के साथ धुंधला दिखाई देना या सुन्नपन महसूस होना।
चेहरे पर सूजन या आंखों के आसपास लगातार पफीनेस रहना, हाथों में सूजन, पैरों या एड़ियों में अचानक या गंभीर सूजन आना (खासतौर पर सुबह के समय)। जब अंगूठे से दबाने के कुछ सेकंड बाद तक भी स्किन लाल रहती है तो ये सूजन गंभीर हो सकती है।
तेजी से वजन बढ़ना, गिरने या दुर्घटना के कारण पेट में चोट लगना, शरीर के ऊपरी हिस्से, बांह, टांगों, हथेलियों या तलवों पर लगातार तेज खुजली होना या पूरे शरीर पर खुजली महसूस होना।
यदि गर्भवती महिला को ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श करें। प्रेग्नेंसी में जरा-सी भी लापरवाही मां और बच्चे के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
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