नहीं, यह सुरक्षित नहीं है। शिशु की आंखों में काजल या सुरमा नहीं लगाने की सलाह दी जाती है।
काजल के इस्तेमाल से नवजात की आंखों में पानी आ सकता है, खुजलाहट हो सकती है और यहां तक की एलर्जी भी हो सकती है। जब शिशु को स्नान कराते समय काजल धुल जाता है, तो यह आखों और नाक के बीच छोटे और संकरे छिद्र से नीचे जा सकता है। काजल या सुरमा यह छिद्र अवरुद्ध कर सकता है, जिससे संक्रमण पैदा होने का खतरा रहता है।
व्यवसायिक तौर पर बनने वाले ज्यादातर काजलों और सुरमे में सीसे की काफी अधिक मात्रा होती है, जो आपके शिशु के लिए हानिकारक है। अगर सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का पालन न किया गया हो, तो सामग्रियां या पैकेजिंग भी दूषित हो सकती है। कुछ ब्रांड्स 100 फीसदी प्राकृतिक या सीसा मुक्त होने का दावा करते हैं, मगर यह किस हद तक सही है, कहना मुश्किल है। हो सकता है वह भी असुरक्षित हों।
लम्बे समय तक इनका उपयोग करने से शरीर में अधिक मात्रा में सीसा एकत्रित हो सकता है, जिससे आपके शिशु का मस्तिष्क, अंग और अस्थि मज्जा (बोन मैरो) बनना प्रभावित हो सकता है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं की सीसे के विषाक्तीकरण की वजह से एनीमिया, कम बौद्धिक स्तर और प्रकुंचन (दौरों) की समस्या हो सकती है।
इसके अलावा, आंख के बीच का हिस्सा (कॉर्निया) धूल-मिट्टी, गंदगी और जलन के प्रति अतिसंवेदनशील होता है। मैली उंगुलियां, तेज़ धार और असमतल नाखून आपके शिशु की आंखों को चोट पहुंचा सकते हैं। आंखों में लंबे समय तक और बार-बार सीसे के पहुंचने से दर्द और तकलीफ हो सकती है। गंभीर मामलों में यह शिशु की आंखों की रोशनी को भी प्रभावित कर सकता है।
नवजात की आंखों में काजल लगाना देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित एक सदियों पुराना रिवाज है। आपके शुभचिंतक, रिश्तेदार और मित्र आपके शिशु को बुरी नजर से बचाने के लिए उसकी आंखों में सुरमा या काजल लगाने की सलाह दे सकते हैं। पुरानी परंपरा के अनुसार काजल या सुरमा लगाने से शिशु की आंखें उज्ज्वल, बड़ी और आकर्षक दिख सकती हैं। मगर, कोई शोध यह बात साबित नहीं करता है।
यदि आप वास्तव में अपने शिशु को सुरमा या काजल लगाना चाहती हैं, तो क्यों न इसे आँखों के अलावा कहीं और लगाया जाए? कुछ माताएं पैर के तलवे, कान के पीछे या माथे की कपालरेखा पर एक छोटा सा टीका लगाती हैं। ये सब सुरक्षित विकल्प हैं।
क्या बच्चों को काजल लगाना चाहिए?