वैसे तो पीरियड्स का आना अपने आप में ही किसी मुसीबत से कम नहीं लगता। अपने डेली रूटीन वर्क के बीच, महीने के वो तीन-चार दिन हम जैसे तैसे निकालते हैं और पीरियड्स जाने के बाद हम खुश होते है कि चलो, अब महीने भर की छुट्टी। लेकिन कई बार अगर कोई प्रॉब्लम हो तो यह पीरियड महीने में दो बार भी आ जाते हैं और तब सोचिए कि इन्हें मैनेज करना कितना मुश्किल होता होगा।
क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि एक ही महीने में आपको दो बार पीरियड हो गए। माने 15 दिन में? है ना! मेरी एक फ्रेंड के साथ भी ऐसा ही हुआ था। पहले इग्नोर किया। फिर अल्ट्रासाउंड कराया। कोई डरने की बात नहीं थी, बस हॉर्मोन इधर-उधर हो गए थे। इलाज हो गया।
दरअसल, दो पीरियड के बीच की औसत अवधि 28 दिनों की होती है, लेकिन ये 21 से 35 दिनों के बीच बदल सकती है। हर महिला की पीरियड साइकल में फर्क होता है। लेकिन जब किसी महिला को एक या दो महीने में केवल एक बार पीरियड्स होने लगें या फिर एक महीने में दो-तीन बार हों, तो उसे इररेगुलर पीरियड कहा जाता है। यह उस महिला के लिये बहुत ही सीरियस समस्या है। इस समस्या से आगे चल कर नई शादीशुदा लड़कियां आसानी से मां नहीं बन पाती। इसके अलावा कई और भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं। जितनी जल्दी हो सके इस समस्या से छुटकारा पाना चाहिए। कुछ महिलाओं में नियमित रूप से दो सप्ताह का मासिक चक्र होता है, जबकि कुछ महिलाओं के लिए ये एक अस्थाई समस्या है। अगर आप अपने पीरियड्स में आकस्मिक बदलाव का अनुभव कर रहे हैं, तो जितना जल्दी संभव हो सकें अपनी डॉक्टर यानि गाइनोलॉजिस्ट से मिलें।
क्या महीने में दो बार पीरियड होना नॉर्मल है?