क्या गर्भावस्था के दौरान चाट, गोलगप्पे और स्ट्रीट फूड खाना सुरक्षित है?
प्लेट में गोलगप्पे रखे हुए और पास में रखी अन्य चाट
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या और किस जगह से खाना चाहती हैं। गर्भावस्था के दौरान स्ट्रीट फूड का सेवन अपने आप में असुरक्षित नहीं है। खतरा भोजन को अस्वच्छ तरीकों और अशुद्ध पानी से तैयार करने की वजह से होने वाले इनफेक्शन या पेट में संक्रमण से होता है।
जब आप गर्भवती होती हैं, आपकी प्रतिरक्षण प्रणाली में बदलाव आते हैं और अब उसका मुख्य मकसद गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा करना होता है। इस वजह से आप भोजन विषाक्तता (फूड पॉइजनिंग) पैदा करने वाले कीटाणुओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती हैं।
वहीं, दूसरी तरफ गर्भावस्था में चटपटी चाट खाने की इच्छा होना स्वाभाविक है। आखिरकार भारत अपनी विभिन्न तरह की चाट और स्ट्रीट फूड के लिए लोकप्रिय है।
रेहड़ी/ठेलों पर बिकने वाली खट्टी-मीठी और मसालेदार चाट को खाने के लिए लगभग सभी लालायित रहते हैं। चाट, टिक्की, गोल गप्पे, पकोड़े, भल्ले, वड़े, भेलपूरी, समोसे और भजिया आदि पीढ़ी दर पीढ़ी सभी के पसंदीदा आइटम रहे हैं।
बहरहाल, चूंकि आप गर्भवती हैं, इसलिए अपने खाने की इच्छा को शांत करने का सबसे सुरक्षित तरीका है कि स्ट्रीट फूड या चाट को घर पर ही तैयार किया जाए। अधिकांश चीजें घर पर आसानी से बनाई जा सकती हैं और आप इन्हें अपने स्वादानुसार व पोषण की जरुरत के अनुसार तैयार कर सकती हैं।
आप इन्हें बनाने में तेल, नमक व चीनी की कम मात्रा और पौष्टिक सामग्रियों का अधिक इस्तेमाल कर सकती हैं। हालांकि, ये एकदम बाहर मिलने वाली चाट जैसा स्वाद तो नहीं देंगे, मगर यह भी सच है कि आपको इन्हें इस तरह केवल कुछ समय के लिए ही खाना है। आपको केवल गर्भावस्था के कुछ महीनों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरुरत है।
यदि आप इन खाद्य पदार्थों को घर पर बनाना नहीं चाहतीं, तो आप रेडी-टू-ईट, वैक्यूम सील पैकेट आजमाकर देख सकती हैं। बाजार में इनके बहुत से विकल्प उपलब्ध हैं, सुनिश्चित करें कि आप प्रतिष्ठित ब्रांड का पैकेट चुने और उस पर इस्तेमाल किए जा सकने की तिथि जांच लें।
यदि आप वास्तव में स्ट्रीट फूड से दूर नहीं रह पाएं, तो आपको बाहर खाने को लेकर कुछ सावधानियों को ध्यान में रखना होगा।
सही स्थान चुनें
ध्यान में रखें कि हो सकता है कुछ रेहड़ी या ठेले वाले स्वच्छता और सुरक्षा पर इतना ध्यान नहीं देते हों। कई बार इन्हें चलाने वाले लोग खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने को लेकर प्रशिक्षित नहीं होते या वे कड़ाई से इनका पालन नहीं करते। नीचे दी गई बातों पर ध्यान दें:
रेहड़ी या ठेलों से चाट खाने की बजाय आप किसी प्रतिष्ठित स्नैक चैन या रेस्टोरेंट से इन्हें खाएं, जो अपनी गुणवत्ता, स्वच्छता और सेवा को लेकर जाने जाते हों।
भोजन के अलावा उस जगह का साफ-सुथरा होना भी जरुरी है। खाने की मेज, चम्मच-कांटे और खाने के बर्तन को देखकर आप उस जगह की स्वच्छता का अंदाजा लगा सकती हैं। ऐसी जगहों पर खाना न खाएं जहां मक्खियां, मच्छर या अन्य कीट घूम रहे हों।
स्टाफ को देखें। उनके कपड़े या यूनिफार्म साफ होनी चाहिए। खाना परोसने और रसोई में काम करने वाला स्टाफ खाना बनाते और परोसते समय दस्ताने और टोपी पहने हुए होना चाहिए।
सही भोजन ऑर्डर करें
आप किस जगह खा रही है, इसके साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि आप क्या खा रही हैं। नीचे दी गई बातों को हमेशा ध्यान रखें:
बेहतर यही है कि ताजा बना खाना ही ऑर्डर किया जाए। इसलिए गर्म और पकाया हुआ भोजन ही खाएं, जो आमतौर पर ऑर्डर करने के बाद ही तैयार किया जाता हो।
कच्ची सामग्रियों के इस्तेमाल वाले खाद्य पदार्थ न खाएं। बिना धुले, बिना छिले फल और सब्जियों में मिट्टी के कीटनाशक या टॉक्सोप्लासमोसिस हो सकते हैं। दूषित उत्पाद अक्सर संक्रमाणों जैसे कि हैपेटाइटिस या टाइफॉइड का कारण बनता है।
टॉपिंग भी न डलवाएं। कटे हुए हरे धनिये, पुदीने, अदरक, प्याज और कटे नींबू को यदि सही ढ़ग से धोया या संग्रहित न किया जाए तो इन पर कीटाणु पनप सकते हैं।
पूरा दिन खुले में रखी चटनी, सॉस या मसालों का इस्तेमाल न करें। यही बात पहले से तैयार स्नैक्स और नमकीन पर भी लागू होती है, जो अक्सर काउंटर पर खुले में रखे होते हैं। यह कह पाना मुश्किल है कि ये भोजन कब से इस तरह खुले में रखा है और इस पर मक्खियां भिनभिना रही होंगी। और कुछ नहीं तो इन पर धूल या धुआं तो अवश्य ही पड़ रहा होगा।
आप बाहर डेयरी उत्पादों को सेवन भी शायद न करना चाहें। यह अक्सर बता पाना मुश्किल होता है कि दही या पनीर ताजा है या नहीं। यही बात दूध से बने पेय, डेज़र्ट और आइस क्रीम पर लागू होती है। गर्मी और आर्द्ता के मौसम में यदि इन्हें सही ढंग से फ्रिज में न रखा जाए, तो ये आइटम बहुत जल्दी खराब हो सकते हैं।
बर्फ वाले पेयों, बर्फ के गोलों और चुस्की से भी दूर रहें। हो सकता है बर्फ पीने के लिए सुरक्षित पानी से तैयार न की गई हो। हमेशा सुनिश्चित करें कि जल जीरा, आम पन्ना या नींबू पानी तैयार करने के लिए फिल्टर किए पानी का इस्तेमाल किया जाए।
ताजा तैयार किए गए फलों के रस भी बाहर से न पीएं। आप यह नहीं जानती कि फलों को कब से काटकर रखा हुआ है और कितने समय से वे बिना इस्तेमाल के पड़े हुए हैं। यह बता पाना भी मुश्किल है कि जूसर को कितनी बार साफ किया जाता है और पार संदूषण को रोकने के लिए प्रयास किए जाते हैं या नहीं।
भोजन पैक करवाकर लाने में भी सावधानी बरतें
बहुत से रेस्टोरेंट और स्नैक चैन घर पर डिलीवरी या रेस्टोरेंट से पैक करवाकर ले जाने का विकल्प भी देते हैं। यदि आप भी कुछ भोजन पैक करवाना चाहें तो हमेशा उन जगहों से लें जहां ताजा और शुद्ध भोजन मिलता हो। यह भी अवश्य पूछ लें कि भोजन कितने समय तक खाया जा सकता है। अधिकांश रेस्टोरेंट यही सलाह देते हैं कि भोजन को उसी दिन समाप्त कर दिया जाए।
कभी-कभी अपना पसंदीदा भोजन खाने की इच्छा को पूरा करने में कोई बुराई नहीं है, मगर ध्यान रखें कि सीमित मात्रा में खाना ही बेहतर रहता है। तला हुआ, अत्याधिक मीठा या घी से चूर भोजन अस्वस्थ होते हैं, इसलिए उन्हें अपने भोजन का नियमित हिस्सा न बनाएं।
कोशिश करें कि सेहतमंद भोजन खाएं। इस तरह आपके लिए वे सभी जरुरी पोषक तत्व पाना आसान रहेगा जो कि आपके और शिशु के लिए जरुरी हैं।
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