गर्भधारण जटिल प्रक्रिया है. इसके लिए कई महीनों तक ओवुलेशन पर ध्यान देना पड़ता है. महिला के शरीर में स्पर्म कितने समय तक जीवित रहता है, इससे भी गर्भधारण पर फ़र्क़ पड़ता है. भागदौड़ और तनावपूर्ण रूटीन की वजह से पुरुषों में शुक्राणुओं (स्पर्म्स) की गुणवत्ता घट रही है. स्पर्म काउंट कम होने से उनकी फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ता है. विज्ञान के मुताबिक, स्वस्थ पुरुष के शरीर में प्रति सेकेंड 1,500 स्पर्म्स (शुक्राणु) बनते हैं. जानिए शुक्राणुओं के जीवनकाल के बारे में.
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सेक्स के दौरान सैकड़ों शुक्राणुओं में से सिर्फ़ एक-दो ही महिला के अंडों के साथ मिलकर प्रजनन प्रक्रिया को पूरा करते हैं. शुक्राणु महिला के शरीर में 24 से 48 घंटों तक जीवित रह सकते हैं.
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शुक्राणुओं को अनुकूल माहौल मिले, जैसे जगह गर्म और नमी हो तो वे 3 से 5 दिन तक जीवित रह सकते हैं. अनुकूल माहौल न हो तो शुक्राणु जल्दी मर जाते हैं. मानव शरीर गर्म और मॉइस्ट होता है, इसलिए शुक्राणु ज़्यादा समय तक जीवित रहते हैं. शरीर के बाहर ये कुछ मिनटों, ज़्यादा से ज़्यादा दो घंटे तक जीवित रहते हैं. शुक्राणुओं की संख्या की बात करें तो एक इजैक्यूलैट में अनुमानित 280 मिलियन शुक्राणु होते हैं.
जब शुक्राणुओं की संख्या 10 मिलियन से कम हो जाती है, तो प्रजनन क्षमता कम हो जाती है. शुक्राणु की संख्या 40 मिलियन और 300 मिलियन के बीच है तो पुरुष सामान्य श्रेणी में आता है.
स्पर्म को परिपक्व होने, प्रजनन के लिए पूरी तरह तैयार होने में लगभग 46 से 72 दिनों तक का समय लग जाता है. जितने भी स्पर्म शरीर से बाहर निकलते हैं उनमें से सभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं होते हैं. लगभग 90% स्पर्म ख़राब होते हैं. यह सामान्य बात है. जब स्पर्म अंडे की तरफ़ जाते हैं तो उस दौड़ में बहुत से पीछे छूट जाते हैं, स़िर्फ हेल्दी स्पर्म ही अंडों तक पहुंच पाते हैं.
क्या शुक्राणु 7 दिनों तक जीवित रह सकते हैं?