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क्या स्तनपान करने वाले बच्चे अधिक वजन वाले हो सकते हैं?

Language: Hindi | Published: 21 Oct 2022 | Views: 15
क्या स्तनपान करने वाले बच्चे अधिक वजन वाले हो सकते हैं?
स्तनपान कराने से मां और बच्चे दोनों को होते हैं इतने सारे फ़ायदे, जानकर हो ज़ायेंगे हैरान, टीबी से संक्रमित माता क्या करें, जानिए

एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा

जिले में एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। आशा तथा आंगनबाड़ी कर्मियों द्वारा माताओं को शिशु के स्तनपान की जरूरत पर जागरूक किया जा रहा है। सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डा. जन्मेजय कुमार ने इसके कई फ़ायदे बताएँ जानिए।

जागरण संवाददाता, औरंगाबाद : जिले में एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। आशा तथा आंगनबाड़ी कर्मियों द्वारा माताओं को शिशु के स्तनपान की जरूरत पर जागरूक किया जा रहा है। सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डा. जन्मेजय कुमार ने बताया कि आवश्यक नवजात देखभाल में स्तनपान की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह शिशु को विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

शिशुओं में मृत्यु की संभावना लगभग 20 प्रतिशत तक कम हो जाती

जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने वाले नवजात शिशुओं में मृत्यु की संभावना लगभग 20 प्रतिशत तक कम हो जाती है। इसके साथ ही पहले छह महीने तक केवल स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया एवं निमोनिया जैसी संक्रमण से होने वाली मृत्यु की संभावना 11 से 15 गुना तक कम हो जाती है। बताया कि स्तनपान 200 से अधिक बीमारियों से रक्षा करता है। मोटापा को कम करता है। बनावटी दूध से एलर्जी की समस्या उत्पन्न होती है परंतु स्तनपान एलर्जी से बचाता है। स्तनपान कराने वाली माता को स्तन कैंसर का खतरा कम होता है। बताया कि लंदन में एक शोध के अनुसार शिशु अगर मां का दूध नहीं पीते हैं तो उनमें हिंसात्मक की प्रवृति ज्यादा होती है।
एक घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाना है स्तनपान

डा. जन्मेजय के अनुसार शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर उसका स्तनपान सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। इसके साथ ही माता को छह माह तक सिर्फ स्तनपान तथा इसके साथ उसके अनुपूरक आहार की शुरुआत के साथ दो साल तक स्तनपान जरूर कराया जाना चाहिए। शिशुओं में डायरिया तथा निमोनिया से बचाव के लिए स्तनपान महत्वपूर्ण है। स्तनपान से शिशु का संपूर्ण शारीरिक तथा मानसिक विकास होता है और दूसरे संक्रामक रोगों से बचाव होता है।शिशु को अस्थमा और मोटापा से रखता है सुरक्षितडा. जन्मेजय ने बताया कि स्तनपान शिशुओं को अस्थमा, मोटापा, टाइप वन डायबिटीज, सांसों की गंभीर समस्याओं, सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम, डायरिया व उल्टी, कानों के संक्रमण आदि से सुरक्षित रखता है।
स्तन कैंसर जैसे रोगों से रखता है सुरक्षित
स्तनपान माता को भी स्तन कैंसर जैसे रोगों से सुरक्षित रखता है। इसके अलावा उन्हें टाइप टू डायबिटीज, ओवेरियन कैंसर आदि होने की संभावना कम होती है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे पांच की रिपोर्ट के मुताबिक 35.5 फीसदी बच्चों को ही जन्म के पहले एक घंटे में स्तनपान मिल पाता है। वहीं 62 फीसदी बच्चों को ही छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराया जाता है। टीबी संक्रमित माताएं करा सकती हैं स्तनपानडा. जन्मेजय कुमार ने बताया कि टीबी संक्रमित माताएं भी अपने नवजात को स्तनपान करा सकती हैं।

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