प्रेगनेंसी के सातवें महीने में आपका वजन काफी बढ़ता है जिसके कारण आपके पीठ में दर्द की समस्या सामने आ सकती है। इस दौरान संतुलित आहार लेने की कोशिश करें और उन सभी पदार्थों से परहेज करने जो मोटापा का कारण बन सकते हैं।
गर्भावस्था के सातवें महीने में लक्षण
गर्भावस्था के सातवें महीने में कुछ नए लक्षण नजर आते हैं। जरूरी नहीं कि सभी लक्षण अच्छा ही महसूस कराएं। कुछ लक्षण परेशानियां भी लेकर आते हैं। इस दौरान आपको कुछ ऐसा महसूस हो सकता है :
ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन : जैसे-जैसे गर्भावस्था का समय बढ़ेगा और आप सातवें महीने में कदम रखेंगी, वैसे-वैसे आपको ब्रेक्सटन हिक्स महसूस हो सकते हैं। यह हल्के-हल्के संकुचन होते हैं, जो 30 सेकंड से एक मिनट तक रह सकते हैं। ब्रेक्सटन हिक्स को ‘फाल्स लेबर’ भी कहा जाता है (1)।
योनि स्राव में वृद्धि : गर्भावस्था में योनि स्राव होना सामान्य है। शुरुआती समय में यह किसी भी तरह के संक्रमण को गर्भाशय तक पहुंचने से रोकता है। समय के साथ-साथ शिशु का सिर श्रोणि भाग पर दबाव डालता है, जिस कारण योनि से रिसाव होने लगता है। हालांकि, यह सामान्य है, लेकिन अगर आपको इस स्राव से दुर्गंध आने लगे, तो एक बार डॉक्टर से संपर्क कर लें।
स्तनों से रिसाव होना : गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में स्तनों से रिसाव होना शुरू हो जाता है। यह गाढ़ा और पीले रंग का पदार्थ होता है, जिसे ‘कोलोस्ट्रम’ कहते हैं। यह रिसाव दिन में किसी भी समय हो सकता है। जैसे-जैसे डिलीवरी का समय नजदीक आता है यह एकदम रंगहीन हो जाता है और ऐसा होना सामान्य प्रक्रिया है। यह जरूरी नहीं कि ऐसा सभी के साथ हो, लेकिन अगर किसी को ऐसा अनुभव हो, तो इसे सामान्य समझें।
अपच : गर्भावस्था में अपच की समस्या होना आम है। इस दौरान अक्सर पेट फूलना, छाती में जलन व जी-मिचलाना जैसा महसूस हो सकता है। यह समस्या तीसरी तिमाही में ज्यादा बढ़ जाती है। शिशु के विकसित होने से पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता, जिस कारण अपच की समस्या होने लगती है।
गर्भावस्था के सातवें महीने में देखभाल
गर्भावस्था का सातवां महीना आखिरी तिमाही की शुरुआत है। इस दौरान खास देखभाल की जरूरत होती है। आपकी जीवनशैली कैसी है, आप क्या खा रही हैं और किन चीजों से आप परहेज करती हैं, यह सब आपकी गर्भावस्था पर असर डालता है। अब हम बात करने जा रहे हैं गर्भावस्था के खान-पान की।
गर्भावस्था के सातवें महीने में खाएं ये चीजें | Pregnancy Ke 7 Month Me Kya Khana Chahiye
गर्भावस्था के सातवें महीने में आपको अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना होगा। यह गर्भावस्था की आखिरी तिमाही है, इसलिए आप जो भी खाएं पौष्टिक खाएं, ताकि आपको और शिशु को भरपूर पोषण मिले। जानिए इस दौरान क्या खाना चाहिए (4) :
आयरन युक्त खाद्य पदार्थ : तीसरी तिमाही में खून की कमी से बचने के लिए भरपूर मात्रा में आयरन युक्त भोजन खाना चाहिए।
कैल्शियम युक्त भोजन : गर्भावस्था में बच्चे के विकास के लिए कैल्शियम जरूरी है। खासतौर से तीसरी तिमाही में। हालांकि, इस दौरान अतिरिक्त कैल्शियम लेने की जरूरत नहीं होती।
मैग्नीशियम युक्त खाना : मैग्नीशियम, कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह पैरों में होने वाली ऐंठन से राहत दिलाता है।
डीएचए से भरपूर खाना : डीएचए एक फैटी एसिड है, जो शिशु के दिमागी विकास के लिए जरूरी है। इसके लिए आप कम स्तर की मरकरी वाली मछली, संतरे का जूस, दूध व अंडा ले सकते हैं (5)।
फोलिक एसिड : शिशु के रीढ़ की हड्डी और दिमागी विकास के लिए फोलिक एसिड लेना जरूरी है। यह शिशु को स्पाइना बिफिडा जैसे विकार से बचाने में मदद करता है (6)। इसके लिए डॉक्टर गर्भवती को फोलिक एसिड के सप्लीमेंट्स भी देते हैं।
फाइबर युक्त भोजन : सातवें महीने के दौरान गर्भाशय काफी बढ़ जाता है, जिस कारण पेट का पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता। इस वजह से अक्सर गर्भवती को कब्ज की समस्या रहती है। इससे बचने के लिए जितना हो सके फाइबर युक्त भोजन खाएं।
विटामिन-सी : आयरन को ठीक से अवशोषित करने के लिए विटामिन-सी का सेवन करना जरूरी है। विटामिन-सी के लिए आप संतरा व नींबू अपने खान-पान में शामिल कर सकती हैं।
गर्भावस्था के सातवें महीने में न खाएं ये चीजें
गर्भावस्था के सातवें महीने में सीने में जलन, पैरों में सूजन व कब्ज जैसी समस्याएं होना आम है। खान-पान में परहेज करने से इन समस्याओं से राहत पाई जा सकती हैं। जानिए, गर्भावस्था के सातवें महीने में क्या नहीं खाना चाहिए :
मसालेदार और ज्यादा फैट वाली चीजें : आपको इस दौरान ऐसी सभी चीजें खाने से बचना चाहिए, जिनमें तेल-मसालों का ज्यादा इस्तेमाल किया गया हो। इनसे सीने में जलन की समस्या बढ़ सकती है।
सोडियम का ज्यादा इस्तेमाल : शरीर में सूजन आना आम बात है। इससे बचने के लिए आपको सोडियम की मात्रा कम करनी होगी। ज्यादा नमक वाली चीजें जैसे चिप्स, डिब्बाबंद आहार व बाजार का अचार खाना कम करना चाहिए।
कैफीन, अल्कोहल : गर्भावस्था में शराब, तंबाकू, सिगरेट और कैफीन युक्त चीजें जैसे चाय-कॉफी के सेवन से बचना चाहिए। इनसे शिशु के विकास में बाधा पहुंचती है (7)।
जंक फूड : इस दौरान जंक फूड जैसे- पीज्जा, बर्गर और बाहर की चाट-पकौड़ियां खाने से बचें। ये चीजें आपके पाचन को खराब करती हैं और इनमें पोषक तत्व भी नहीं होते हैं। अगर ज्यादा ही मन करे, तो आप घर में ही ताजी सब्जियों जैसे गाजर, खीरा, टमाटर का सैंडविच खा सकती हैं। सैंडविच बनाने के लिए आप गेहूं के आटे की ब्रेड का इस्तेमाल करें।
चूंकि व्यायाम करना काफी फायदेमंद होता है, तो जानिए सातवें महीने के व्यायाम के बारे में।
गर्भावस्था के सातवें महीने के लिए व्यायाम
व्यायाम हर किसी के लिए जरूरी है। यह आपको न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रखता है, बल्कि तरोताजा भी रखता है। चूंकि, यह गर्भावस्था की आखिरी तिमाही है, इसलिए ऐसा कोई आसन नहीं करना चाहिए, जिससे शिशु को नुकसान पहुंचे। आप चाहें, तो इस दौरान अनुलोम-विलोम और हल्की-फुल्की सैर कर सकती हैं, लेकिन ज्यादा शारीरिक गतिविधियां इस महीने में करने से मना की जाती हैं। फिर भी अगर आप व्यायाम करने की इच्छुक हैं, तो एक बार विशेषज्ञ से संपर्क करें, वो आपकी शारीरिक स्थिति देखकर उचित व्यायाम बताएंगे।
सातवें महीने के व्यायाम के बाद आइए अब जानते हैं कि इस दौरान कौन-कौन से मेडिकल टेस्ट होते हैं।
गर्भावस्था के सातवें महीने के दौरान स्कैन और परीक्षण
गर्भावस्था में नियमित रूप से डॉक्टर से चेकअप करवाना जरूरी है, ताकि शिशु के विकास और स्वास्थ्य पर नियमित रूप से नजर बनाई जा सके। जानिए, गर्भावस्था के सातवें महीने में कौन-कौन सी जांच की जाती हैं :
इस दौरान डॉक्टर शिशु के विकास की पूरी जांच करेंगे। शिशु के दिल की धड़कन की जांच के लिए फीटल हार्ट रेट मॉनिटरिंग, आपका रक्त संचार, गर्भाशय का आकार व किसी तरह का संक्रमण पता लगाने के लिए पेशाब की जांच की जाती है।
इसके अलावा, बायोफिजिकल प्रोफाइल टेस्ट (Biophysical profile test) व कॉन्ट्रैक्शन स्ट्रेस टेस्ट (CST) किया जाता है। यह टेस्ट अल्ट्रासाउंड की मदद से होता है, जिसमें शिशु के दिल का स्वास्थ्य जांचा जाता है। यह जांच गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में होती है।
आपने जान लिया कि इस महीने में क्या-क्या जांच होती है। अब जानते हैं कि आपको क्या-क्या सावधानियां बरतने की जरूरत होगी।
गर्भावस्था के सातवें महीने के दौरान सावधानियां
इस दौरान, आपको अपनी दैनिक क्रियाओं में सतर्कता बरतनी होगी। यहां हम कुछ सावधानियां बताने जा रहे हैं, जो गर्भावस्था का सातवां महीना स्वस्थ तरीके से पार करने में आपकी मदद करेंगी।
गर्भावस्था के सातवें महीने में क्या करें?
खानपान : इस दौरान सबसे ज्यादा जरूरी है सही खान-पान। गर्भावस्था के सातवें महीने में आप ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन करें। डॉक्टर की सलाह लेकर अखरोट और समुद्री भोजन का इस्तेमाल कर सकती हैं।
नियमित रूप से सैर करें : सातवें महीने में नियमित रूप से सैर करना, आपके लिए फायदेमंद रहेगा। इससे आपको प्रसव के दौरान आसानी होगी।
नियमित रूप से जांच कराएं : डॉक्टर से नियमित रूप से जांच करवाना जरूरी है। इसमें किसी तरह की लापरवाही न बरतें। अगर जांच में लगे कि शिशु के लिए अतिरिक्त पोषण की जरूरत है, तो अपनी खुराक में सुधार लाने की जिम्मेदारी आपकी है।
जरूरी सप्लीमेंट्स लें : गर्भावस्था में आप जो खा रही हैं, केवल उतना ही आपके लिए और शिशु के लिए काफी नहीं है। शिशु का ठीक ढंग से विकास हो, उसके लिए डॉक्टर के बताए हुए जरूरी सप्लीमेंट्स लेना आवश्यक है।
खुद को व्यस्त रखें : डिलीवरी का समय जितना नजदीक आएगा महिला की घबराहट उतनी ही बढ़ सकती है। इसलिए, ज्यादा न सोचते हुए खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करें। आप चाहें, तो अपनी पसंदीदा किताब पढ़ सकती हैं या पसंदीदा संगीत सुन सकती हैं।
गर्भावस्था के सातवें महीने में क्या न करें?
गलत अवस्था में न सोएं : इस दौरान आप किस अवस्था में सोती हैं, यह काफी मायने रखता है। सीधा सोने से बचें। गर्भवती के लिए बाईं ओर करवट लेकर सोने की स्थिति सबसे सही मानी गई है (8)।
आगे की ओर न झुकें : सातवें महीने में झुकने के लिए पूरी तरह से मना किया जाता है। अब आपका बेबी बंप बढ़ चुका है, ऐसे में आगे की ओर झुकने से उस पर दबाव पड़ सकता है, जो शिशु के लिए हानिकारक है।
सातवें महीने में कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो चिंता का विषय बन सकती हैं। जानिए इनके बारे में।
गर्भावस्था के सातवें महीने के दौरान चिंताएं
गर्भावस्था का सातवां महीना कई अनुभव लेकर आता है। एक ओर जहां आप अपने अंदर शिशु की हलचल को महसूस करके सुखद अनुभव लेंगी, वहीं दूसरी ओर कुछ अन्य परेशानियां भी आ सकती हैं। अगर सातवें महीने के दौरान आपको नीचे बताई गई समस्याएं होती हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
अधिक रक्तस्राव होने पर : सातवें महीने में अधिक रक्तस्राव होने को नजरअंदाज न करें। कई बार अपरा (placenta) नीचे की ओर गर्भाशय ग्रीवा तक आ जाती है, जिस कारण रक्तस्राव होने लगता है (9)।
पेट में जोर से दर्द : बढ़ते गर्भाशय के कारण पेट में हल्का-फुल्का दर्द होना सामान्य है, लेकिन अगर यह दर्द आपको तेजी से और असहनीय होने लगे, तो ऐसे में समय बर्बाद न करते हुए डॉक्टर से संपर्क करें।
एक घंटे में चार बार से ज्यादा संकुचन : इस दौरान होने वाले संकुचन को ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन (फॉल्स लेबर पेन) कहा जाता है। यह ज्यादातर गर्भावस्था के सातवें महीने से शुरू होते हैं और एक घंटे में एक या दो बार हो सकते हैं। इस दौरान आपको पेट की मांसपेशियों में कसाव महसूस होगा। अगर यह संकुचन एक घंटे में चार बार से ज्यादा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कभी-कभी इससे समय पूर्व प्रसव का खतरा बढ़ सकता है (1)।
लगातार उल्टियां होने पर : अगर आपको उल्टियां हो रही हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। शरीर में पानी की कमी होने पर डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है, जिस कारण उल्टी होती है
क्यों गर्भावस्था के 7 महीने के लिए खतरनाक है?