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गर्भपात का दर्द कब तक रहता है?

Language: Hindi | Published: 09 Oct 2022 | Views: 19
गर्भपात का दर्द कब तक रहता है?
गर्भपात हो जाने के बाद क्या होगा?
यदि आपके उत्तक अपने आप निकल जाएं या आपको इन्हें निकलवाना पड़े, दोनों ही स्थितियों में आपको बाद में एक-दो दिन तक माहवारी जैसे हल्के मरोड़ महसूस होंगे और एक या दो हफ्तों तक हल्का रक्तस्त्राव भी रहेगा। जब तक रक्तस्त्राव जारी रहे, डॉक्टर आपको संभोग न करें या अपनी योनि के आसपास कोई भी उत्पाद न लगाने की सलाह दे सकती हैं।

रक्तस्त्राव अंतत: रुक जाएगा और चार से छह हफ्तों बाद आप आपका सामान्य माहवारी चक्र लौट आएगा।

यदि आपको बहुत ज्यादा रक्तस्त्राव होने लगे (एक हफ्ते में एक सैनिटरी पैड लगे), इनफेक्शन के संकेत हों (बुखार, बदन दर्द या योनिस्त्राव से दुर्गंध) या फिर अत्याधिक दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से बात करें क्योंकि ऐसी स्थिति में आपको तुरंत चिकित्सकीय देखभाल की जरुरत होगी।

यदि ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो और आपको कमजोरी महसूस हो, चक्कर आएं तो आप एकदम निढ़ाल या शॉक की स्थिति में जा सकती हैं। यह एक चिकित्सकीय आपातकाल की स्थिति है और किसी को आपको तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।
बार-बार गर्भपात क्यों होता है और इससे गर्भधारण की संभावना पर कितना असर पड़ता है?
यदि आपका लगातार तीन या इससे ज्यादा बार गर्भपात हुआ हो, तो डॉक्टर इसे अंग्रेजी में रिकरंट मिस्कैरिज कहते हैं। यदि आपके साथ ऐसा हो तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। दुर्भाग्यवश, यह सच है कि हर गर्भपात के साथ आपका फिर से गर्भपात होने का खतरा थोड़ा बढ़ता जाता है।

यदि आपके पहले तीन से ज्यादा शुरुआती गर्भपात या फिर दूसरी तिमाही में गर्भपात हुए हैं, तो आपकी अतिरिक्त देखभाल की जाएगी और अतिरिक्त स्कैन भी कराए जाएंगे।

अक्सर, बार-बार गर्भपात झेलने वाली बहुत सी महिलाओं में इसके कारणों का पता नहीं चल पाता है। यदि रिकरंट मिस्कैरिज के कारण का पता न लग पाए, तो इसका मतलब यह भी हो सकता है कि अगली बार गर्भावस्था सफल रहने की संभावना है। हालांकि, यह आपकी उम्र और आपके पिछले गर्भपातों की संख्या पर भी निर्भर करता है।

विशेषज्ञ यह जानने के प्रयास में लगे हैं कि बार-बार गर्भपात होने के क्या कारण हो सकते हैं। जो स्थितियां रिकरंट मिस्कैरिज का संभावित कारण मानी जाती हैं, वे अक्सर एक जैसी नहीं होती। खून के थक्कों से जुड़े विकार थ्रोम्बोफिलिया और एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम (एपीएस) को रिकरंट मिसकैरेज से जोड़ा जाता है। एपीएस को स्टिकी ब्लड सिंड्रोम या ह्यूज़ सिंड्रोम भी कहा जाता है। इसके अलावा आपकी उम्र, आनुवांशिक समस्याएं, ग्रीवा से जुड़े विकार, योनि संक्रमण, हॉर्मोन संबंधी समस्याएं या जीवनशैली से जुड़े कारण भी इसकी वजह हो सकते हैं।

इन सभी संभावित कारणों के बावजूद अक्सर रिकरंट मिस्कैरिज के कारण का पता नहीं लग पाता। इसे अंग्रेजी में अनएक्स्प्लेन्ड (अस्पष्ट) रिकरंट मिस्कैरिज कहते हैं। कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपकी खून की जाचें और अल्ट्रासाउंड स्कैन करवा सकती हैं।

बिना किसी कारण रिकरंट मिस्कैरिज झेलने वाली अधिकांश महिलाएं उचित सहयोग और देखभाल से अंतत: स्वस्थ शिशु को जन्म दे पाती हैं।
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