गर्भपात के कितने समय बाद गर्भावस्था के लक्षण दूर हो जाते हैं?

Language: Hindi | Published: 11 Nov 2022 | Views: 3
गर्भपात के कितने समय बाद गर्भावस्था के लक्षण दूर हो जाते हैं?
अगर किसी महिला का गर्भपात हो गया हो तो उसे दूसरी बार गर्भवती होने के लिए कम से कम छह महीने का इंतज़ार करना चाहिए.

एबॉर्शन कराने से भविष्य में प्रेग्नेंट होने में कोई परेशानी नहीं होती है। एबॉर्शन दो तरह से होता है। मेडिकल एबॉर्शन और सर्जिकल एबॉर्शन। मेडिकल एबॉर्शन के सर्जिकल एबॉर्शन की तुलना में कम जोखिम होते हैं। क्योंकि मेडिकल एबॉर्शन प्रारंभिक गर्भावस्था के दौरान किया जाता है। यदि प्रेग्नेंसी के शुरुआती दौर में एबॉर्शन करा लिया जाए तो इसके जोखिम बेहद कम होते हैं। आमतौर पर मेडिकल एबॉर्शन गर्भावस्था की पहली तिमाही में किया जाता है। कई शोध के अनुसार, मेडिकल एबॉर्शन के कारण भविष्य में किसी तरह की प्रेग्नेंसी कॉम्पलीकेशन जैसे प्रीटर्म बर्थ, लो बर्थ वेट, प्रेग्नेंसी लॉस और एक्टॉपिक प्रेग्नेंसी आदि की समस्या नहीं होती है। सर्जिकल एबॉर्शन में डाइलेशन और क्यूराटेज (D & C) किया जाता है। सर्जिकल एबॉर्शन के कुछ मामलों में यूट्रिन वॉल पर स्कार पड़ सकते हैं। डॉक्टर इसे आशरमेंस सिंड्रोम (Asherman’s syndrome) कहते हैं। इससे महिला के गर्भवती होने के चांसेस बहुत कम हो जाते हैं।


मिसकैरिज के बाद प्रेग्नेंसी के बारे में सोचा जा सकता है। अबॉर्शन के कुछ ही दिनों बाद महिला के पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। साथ ही 14 से 28 दिनों में ऑव्युलेशन की प्रॉसेस होने लगेगी। ये प्रॉसेस अबॉर्शन के एक हफ्ते बाद शुरू हो सकती है। अगर अबॉर्शन के एक हफ्ते बाद तक अनसेफ सेक्स किया जाता है तो महिला में बिना पीरियड्स के आए ही प्रेग्नेंसी के चांसेस रहते हैं। सभी महिलाओं में पीरियड्स के दिनों की संख्या समान नहीं होती है। इस कारण दिन कम या ज्यादा हो सकते हैं। कुछ महिलाओं में ऑव्युलेशन देर से होने की भी संभावना रहती है। मिसकैरिज के बाद प्रेग्नेंसी में वैसे ही लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे कि साधारण तौर पर गर्भावस्था में लक्षण दिखआई देते हैं। कुछ लक्षण जैसे,

टेंडर ब्रेस्ट
गंध या स्वाद के प्रति संवेदनशीलता
मितली व उल्टी होना
थकान लगना
पीरियड्स का मिस होना।

अगर आपको अबॉर्शन के छह सप्ताह बाद तक भी पीरियड्स नहीं होते हैं तो होम प्रेग्नेंसी टेस्ट करके देखें। अगर रिजल्ट पॉजिटिव आता है तो अपने डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर प्रेग्नेंसी की जांच करेंगे कि कहीं वो लेफ्टओवर प्रेग्नेंसी हाॅर्मोन तो नहीं हैं।
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