प्रथम जांच : 12 सप्ताह के भीतर अथवा गर्भावस्था का पता चलने के साथ ही जितनी जल्दी हो सके।
द्वितीय जांच : 14-26 सप्ताह के भीतर।
तृतीय जांच : 28-34 सप्ताह के भीतर।
चतुर्थ जांच : 36 सप्ताह से प्रसव काल तक।
प्रसवपूर्व जांच के दौरान एक गर्भवती महिला की रक्त चाप, वजन, ऊंचाई नापना, खून की जांच, मूत्र में शक्कर एवं प्रोटीन की जांच करना, गर्भवती महिला को टी.टी. इंजेक्शन लगाना, पेट की जांच एवं आयरन की गोलियां दी जाती है ताकि महिला में खून की कमी को पूरी किया जा सके।
प्रसवपूर्व जांच के फायदे
प्रसवपूर्व जांच के द्वारा गर्भवती महिला में समय पर अधिक जोखिम वाले लक्षणों का पता कर सही समय पर उच्च संस्थान पर रेफर कर माँ एवं बच्चे दोनों का स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जाता है।
गर्भवती महिला की जांच कब कब होती है?