प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही
सीधा लेटने पर यूट्रस आईवीसी के ऊपर प्रेशर डालता है। हो सकता है कि इसके कारण सीधा लेटने पर आपको सांस लेने में दिक्कत हो या फिर आपको भारीपन महसूस हो। इस वजह से आपको चौथे महीने के बाद से पीठ के बल सोना बंद कर देना चाहिए। इस समय सीधे लेटने की वजह से एसिडिटी वगैरह भी हो सकती है।
पीठ के बल सोना खतरनाक क्यों है – गर्भावस्था के दो महीने के बाद गर्भ में पल रहे शिशु का ठीक-ठाक वजन हो जाता है। ऐसे में जब आप पीठ के बल लेटती हैं तो शिशु आपके शरीर के निचले हिस्से से दिल तक रक्त पहुंचाने वाली नस पर दबाव डाल सकता है। ऐसे में आपको बेहोशी आ सकती है। या फिर आपको नींद आने जैसा महसूस हो सकता है। हालांकि, यह बहुत ज्यादा देर तक पीठ के बल लेटे रहने से होता है। इसलिए,कोशिश करें कि गर्भावस्था के 16 हफ्तों के बाद पीठ के बल न सोएं बल्कि सोने के लिए सही पोजिशन का इस्तेमाल करें।
क्या है सोने की सही पोजिशन – डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स के मुताबिक गर्भावस्था में बायीं तरफ करवट लेकर सोना सबसे सही पोजिशन होता है। इससे शिशु का बेहतर विकास होता है। साथ ही आपके शरीर को ज्यादा आराम मिलता है। बायीं ओर करवट लेकर सोने से आपके गर्भनाल से आपके शिशु को सभी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। साथ ही आपका रक्त प्रवाह भी दुरुस्त बना रहता है। इस तरह से सोने का एक और फायदा है। इससे आपके शरीर के अंदर मौजूद विषाक्त तत्व भी बाहर निकल जाते हैं और आप कई तरह के संक्रमण आदि से बच जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक गर्भावस्था में पर्याप्त मात्रा में आराम भी बहुत जरूरी है। इस दौरान कम से कम 7-9 घंटे की नींद जरूरी है।
गर्भवती महिला को सीधा क्यों नहीं सोना चाहिए?