प्रेगनेंसी में पेट के बल सोना सही या गलत?
प्रेगनेंसी के समय में पेट के बल सोना गलत हो सकता है। प्रेगनेंसी के महीने आगे बढ़ने पर गर्भाशय भी बढ़ता है और भारीपन महसूस होता है जिससे प्रेगनेंट महिला को सोने में दिक्कत होती है।
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कुछ महिलाओं को पेट के बल सोना अच्छा लगता है लेकिन गर्भावस्था के दौरान हो सकता है कि उन्हें इस पोजीशन में कंफर्टेबल महसूस न हो। बेबी बंप निकलने के कारण पेट के बल सोना और भी मुश्किल हो जाता है।
इस आर्टिकल में हम आपको यही बताने जा रहे हैं कि गर्भावस्था के दौरान पेट के बल सोना चाहिए या नहीं।
क्या गर्भावस्था में पेट के बल सो सकते हैं
प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में पेट के बल सो सकती हैं। गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में सीने में जलन हो सकती है। पेट के बल सोने पर पाचन प्रक्रिया धीमी हो सकती है जिससे खाना लंबे समय तक पेट में ही रहता है। इससे कब्ज और सीने में जलन और बढ़ जाती है।
गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में बेबी बंप इतना बढ़ जाता है कि पेट के बल सोने में दिक्कत होती है।
मीरा राजपूत को प्रेगनेंसी में इस शहर के खाने की हुई थी क्रेविंग, गर्भावस्था में क्यों होती है क्रेविंग
गर्भवती महिलाओं को इस समय कुछ खास चीजें खाने का मन करता है जिसे क्रेविंग कहते हैं। हो सकता है कि प्रेगनेंसी से पहले आपको मीठा खाना बिल्कुल पसंद न हो, लेकिन गर्भावस्था में आपको मीठी चीजों की ही क्रेविंग हो।
मीरा ने बताया कि मीशा के टाइम पर उन्हें मसालेदार खाना खाने की इच्छा होती थी। उन्हें इंडियन चाइनीज और चिली मैक्सिकन रैप खाने का बहुत मन करता था। पहली प्रेगनेंसी में उन्हें स्पाइसी फूड खाने का बहुत मन करता था।
मीरा राजूपत का कहना है कि उनकी दूसरी प्रेगनेंसी क्रेविंग फर्स्ट टाइम से बिल्कुल अलग थी। जहां मीशा के टाइम पर उनका तीखा और मसालेदार खाना खाने का मन करता था, वहीं दूसरी प्रेगनेंसी में उन्हें कोई क्रेविंग नहीं हुई।
उन्हें घर का सिंपल खाना पसंद आता था और यहां तक कि उन्हें डेजर्ट खाने तक की क्रेविंग नहीं हुई। इस बारे में मीरा कहती हैं कि हर बच्चा अलग होती है इसलिए क्रेविंग भी अलग होती है।
मीरा ने अपनी प्रेगनेंसी के दिनों में दिल्ली का खाना बहुत मिस किया। मीरा खुद भी दिल्ली की हैं, इसलिए उन्हें दिल्ली का खाना बहुत पसंद है। मीरा बताती हैं कि उन्हें दिल्ली के तंदूरी मोमोज और छोले भठूरे खाने का बहुत मन करता था।
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अधिकतर महिलाओं को गर्भावस्था की पहली तिमाही में क्रेविंग शुरू हो जाती है और प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में सबसे ज्यादा रहती है और प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में कम होने लगती है। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ क्रेविंग डिलीवरी के बाद भी रहती है। यहां तक कि कई महिलाओं को कोई एक चीज खाने का एक या दो दिन मन करता है और फिर कुछ और खाने की इच्छा होती है।
हो सकता है कि प्रेगनेंसी में आपको वो चीजें खाने का भी मन करे जो आप पहले बिल्कुल पसंद नहीं करती थीं। फ्रॉन्टियर इन साइकोलॉजी में पेश की गई रिसर्च के अनुसार, लगभग 50 से 90 फीसदी प्रेगनेंट महिलाओं को किसी खास चीज की क्रेविंग होती है।
डॉक्टर क्रेविंग के लिए हार्मोंस में बदलाव को जिम्मेदार मानते हैं। चूंकि, गर्भावस्था के दौरान शरीर को अधिक खून बनाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, शायद इसलिए भी क्रेविंग होती है।
कब नहीं सोना चाहिए पेट के बल
जब आपको पेट के बल सोने में दिक्कत होने लगी, तब इस पोजीशन में सोना बंद कर दें। आप प्रेगनेंसी के सोलहवें से 18वें सप्ताह तक पेट के बल सो सकती हैं। इसके बाद पेट के बल सोने में परेशानी हो सकती है।
कुछ महिलाओं को पेट बढ़ने के कारण पीठ के बल सोना भी मुश्किल हो सकता है। पीठ के बल सोने से पीठ दर्द, सांस लेने में दिक्कत और पाचन कमजोर हो सकता है।
पेट के बल सोने के नुकसान
पेट के बीच के हिस्से में अधिक वजन बढ़ने के कारण रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आ सकता है जिससे पीठ दर्द हो सकता है। इससे ब्रेस्ट पर भी अधिक दबाव पड़ता जिसके कारण ब्रेस्ट में दर्द महसूस होता है।
मीरा राजपूत को प्रेगनेंसी में इस शहर के खाने की हुई थी क्रेविंग, गर्भावस्था में क्यों होती है क्रेविंग
गर्भवती महिलाओं को इस समय कुछ खास चीजें खाने का मन करता है जिसे क्रेविंग कहते हैं। हो सकता है कि प्रेगनेंसी से पहले आपको मीठा खाना बिल्कुल पसंद न हो, लेकिन गर्भावस्था में आपको मीठी चीजों की ही क्रेविंग हो।
मीरा ने बताया कि मीशा के टाइम पर उन्हें मसालेदार खाना खाने की इच्छा होती थी। उन्हें इंडियन चाइनीज और चिली मैक्सिकन रैप खाने का बहुत मन करता था। पहली प्रेगनेंसी में उन्हें स्पाइसी फूड खाने का बहुत मन करता था।
मीरा राजूपत का कहना है कि उनकी दूसरी प्रेगनेंसी क्रेविंग फर्स्ट टाइम से बिल्कुल अलग थी। जहां मीशा के टाइम पर उनका तीखा और मसालेदार खाना खाने का मन करता था, वहीं दूसरी प्रेगनेंसी में उन्हें कोई क्रेविंग नहीं हुई।
उन्हें घर का सिंपल खाना पसंद आता था और यहां तक कि उन्हें डेजर्ट खाने तक की क्रेविंग नहीं हुई। इस बारे में मीरा कहती हैं कि हर बच्चा अलग होती है इसलिए क्रेविंग भी अलग होती है।
मीरा ने अपनी प्रेगनेंसी के दिनों में दिल्ली का खाना बहुत मिस किया। मीरा खुद भी दिल्ली की हैं, इसलिए उन्हें दिल्ली का खाना बहुत पसंद है। मीरा बताती हैं कि उन्हें दिल्ली के तंदूरी मोमोज और छोले भठूरे खाने का बहुत मन करता था।
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अधिकतर महिलाओं को गर्भावस्था की पहली तिमाही में क्रेविंग शुरू हो जाती है और प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में सबसे ज्यादा रहती है और प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में कम होने लगती है। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ क्रेविंग डिलीवरी के बाद भी रहती है। यहां तक कि कई महिलाओं को कोई एक चीज खाने का एक या दो दिन मन करता है और फिर कुछ और खाने की इच्छा होती है।
हो सकता है कि प्रेगनेंसी में आपको वो चीजें खाने का भी मन करे जो आप पहले बिल्कुल पसंद नहीं करती थीं। फ्रॉन्टियर इन साइकोलॉजी में पेश की गई रिसर्च के अनुसार, लगभग 50 से 90 फीसदी प्रेगनेंट महिलाओं को किसी खास चीज की क्रेविंग होती है।
डॉक्टर क्रेविंग के लिए हार्मोंस में बदलाव को जिम्मेदार मानते हैं। चूंकि, गर्भावस्था के दौरान शरीर को अधिक खून बनाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, शायद इसलिए भी क्रेविंग होती है।
गर्भावस्था में अच्छी नींद लेने के तरीके
दिनभर में खूब पानी पिएं और रात को सोने से पहले ज्यादा पानी न पिएं वरना बार-बार पेशाब आएगा।
योग, ब्रीदिंग एक्सरसाइज और मेडिटेशन से स्ट्रेस कम होगा और बार-बार नींद नहीं टूटेगी।
आप अच्छी नींद के लिए प्रेगनेंसी पिलो और सर्पोटिव कुशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे नींद आने में आसानी होती है।
मसालेदार और तली हुई चीजें न खाएं, क्योंकि इसकी वजह से सीने में जलन और नींद में दिक्कत हो सकती है।
मतली से बचने के लिए तला-भुना भी न खाएं। रात को सोने से पहले कोई मधुर संगीत सुनें। इससे तनाव कम होता है।
रात को सोने से पहले गुनगुने पानी से नहाएं। ये नसों को आराम देता है और नींद अच्छी आती है।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पेट के बल नहीं सोना चाहिए क्योंकि इससे आपको दिक्कत हो सकती है। खासतौर पर प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में पेट के बल सोना काफी मुश्किल हो सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि आप पेट के बल न सोएं।
इसके अलावा प्रेगनेंसी में करवट लेकर सोना ज्यादा बेहतर रहता है। इस पोजीशन को प्रेगनेंसी की बेस्ट स्लीप पोजीशन मानी जाती है।
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