गर्भावस्था के दौरान कई बार महिलाओं को कुछ ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिनका उनके या उनके होने वाले शिशु की सेहत पर कितना गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, इसका हमें अंदाजा भी नहीं हो पाता है।
बहुत अधिक उल्टियां
गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में उल्टियां आना या जी मचलना सामान्य लक्षण हैं लेकिन बहुत अधिक उल्टियां आएं तो डॉक्टर से मिलें क्योंकि इनसे आपको डीहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है जो मां और गर्भ में पल रहे शिशु, दोनों की सेहत के लिए ठीक नहीं है।
ब्लीडिंग होना
गर्भावस्था के बाद भी अगर पीरियड्स हो रहे हैं तो इसे कतई हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इस अवस्था को एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहते हैं जिसमें फर्टाइल अंडे सही जगह पर नहीं होते हैं। बहुत अधिक ब्लीडिंग मिसकैरेज का भी लक्षण हो सकती है।
बच्चे की गतिविधियां कम होना
इसका कोई निर्धारित पैमाना तो नहीं कि बच्चे की कितनी गतिविधि होनी चाहिए लेकिन गर्भावस्था के दौरान बच्चे की गतिविधियों का एहसास हर मां को होता है। अगर आपको बच्चे की गतिविधियां कम लगती है तो इसे जांचने का एक आसान तरीका है। कुछ ठंडा खाएं और फिर करवट लेकर थोड़ी देर लेटें। इस दौरान बच्चे की गतिविधियां हो रही हैं या नहीं, इस पर ध्यान दें। दो घंटों में बच्चा कम से कम दस बार किक मारेगा तो सब सामान्य है, वरना डॉक्टर से तुरंत मिलें।
फ्लू
गर्भावस्था के दौरान फ्लू व संक्रमण से होने वाला खतरा सामान्य दिनों से कहीं अधिक होता है। ऐसे में अगर गर्भावस्था के दौरान फ्लू होता है तो तुरंत इलाज करवाएं।
तेज सिर दर्द या देखने में दिक्कत
गर्भावस्था के आखिरी तीन महीनों में अगर बहुत तेज सिर दर्द हो, देखने में दिक्कत हो और पेट में अधिक दर्द हो तो गर्भ में पल रहे शिशु के लिए यह अधिक खतरा हो सकता है। समय समय पर बीपी चेक करवाएं।
गर्भावस्था के दौरान खतरे के कारण?