प्रेगनेंट महिलाओं के शरीर में अक्सर हीमोग्लोबिन लेवल की कमी हो जाती है। इसके लक्षणों को सही समय पर पहचान कर समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है।
प्रेग्नेंसी में दिख रहे हैं कुछ ऐसे लक्षण, समझ लें गिर गया है हीमोग्लोबिन का लेवल
जिस हवा में सांस लेते हैं, उस हवा के जरिए ऑक्सीजन हीमोग्लोबिन की मदद से शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचता है। लाल रक्त कोशिकाओं में एक प्रोटीन अणु को हीमोग्लोबिन पाया जाता है। उम्र और लिंग के आधार पर, हर व्यक्ति में हीमोग्लोबिन का लेवल अलग होता है।
गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन लेवल कम होने का खतरा अधिक रहता है क्योंकि इस समय शिशु को दोगुनी मात्रा में खून की जरूरत होती है जिससे हीमोग्लोबिन की आवश्यकता भी बढ़ जाती है।
अगर आपको गर्भावस्था में कुछ खास लक्षण दिख रहे हैं, तो समझ लें कि आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो गई है जो कि एनीमिया का रूप ले सकती है।
लो हीमोग्लोबिन लेवल के लक्षण
गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर शुरुआत में इसके लक्षणों पर ध्यान नहीं जाता है। हालांकि, इस समस्या के बढ़ने पर लक्षण गंभीर रूप लेने लगते हैं। लो हीमोग्लोबिन लेवल के लक्षण, प्रेग्नेंसी में होने वाली कई अन्य समस्याओं से भी मेल खाते हैं, इसलिए कई बार महिलाएं इसके लक्षणों को पहचान नहीं पाती हैं।
अगर आपको काम करते समय बहुत जल्दी थकान महसूस होने लगती है या कमजोरी लग रही है तो एक बार अपना हीमोग्लोबिन लेवल जरूर चेक करवा लें।
इसके अलावा चक्कर आना, सांस लेने में दिक्कत होना, दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना, छाती में दर्द होना, त्वचा, होंठों और नाखूनों का पीला पड़ना, हाथ और पैर ठंडे होना और ध्यान लगाने में दिक्कत आना भी लो हीमोग्लोबिन लेवल के लक्षणों में शामिल हैं।
कैसे चलता है पता
प्रेग्नेंसी के बाद पहले प्रीनेटल चेकअप के दौरान हीमोग्लोबिन लेवल चेक करने के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट करवाते हैं। इसके लिए आपको दो तरह के ब्लड टेस्ट करवाने पड़ते हैं :
हीमोग्लोबिन टेस्ट : इसमें हीमोग्लोबिन की मात्रा का पता लगाया जाता है। हीमोग्लोबिन एक आयरन युक्त प्रोटीन है जो लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है। यह शरीर में फेफड़ों से ऊतकों तक ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है।
हेमाट्रोसिट टेस्ट : इसमें खून के नमूने में लाल रक्त कोशिकाओं की मात्रा का मापा जाता है।
अगर इन दोनों में से किसी भी एक टेस्ट में आपका हीमोग्लोबिन लेवल कम आता है, तो यह आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया का संकेत हो सकता है।
ऐसा जरूरी नहीं है कि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में ही हीमोग्लोबिन लेवल कम हो। प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही या तीसरी तिमाही में भी हीमोग्लोबिन लेवल में गिरावट आने की समस्या हो सकता है।
बचने का तरीका
आहार में कुछ जरूरी बदलाव कर के प्रेग्नेंसी में हीमोग्लोबिन की कमी से बचा या इसे दूर किया जा सकता है। गर्भवती महिला को दिन में कम से कम 30 मि.ग्रा आयरन लेना चाहिए।
अपने खाने में लीन और रेड मीट को शामिल करें। इसके अलावा अंडा, गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां, सूखे मेवे और बीज, बींस, दालें और टोफू खाएं। अगर आप खाने से आयरन की पूर्ति नहीं कर पा रही हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर आयरन के सप्लीमेंट भी ले सकती हैं। विटामिन सी युक्त चीजें भी खाएं जैसे कि खट्टे फल, स्ट्रॉबेरी, संतरा, कीवी, टमाटर और शिमला मिर्च आदि।
गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबिन कितना गिर जाता है?