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गर्भावस्था प्रेरित उच्च रक्तचाप?

Language: Hindi | Published: 31 Mar 2019 | Views: 15
गर्भावस्था प्रेरित उच्च रक्तचाप?
रक्तचाप ज्यादा बढ़ने पर हो सकती हैं समस्याएं, वक्त पर इलाज कराने से हो सकता है समाधान
3 वर्ष पहले

जननी डेस्क. रक्तचाप यह दर्शाता है कि जब आपका दिल धड़कता है तो रक्त धमनी की दीवारें कितनी तीव्रता से दबाव डालतीं है। आपके शरीर में सभी ओर जाने के लिए रक्त दबाव की एक निश्चित मात्रा आवश्यक है, लेकिन बहुत अधिक दबाव गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। रक्तचाप को मरकरी मिलीमीटर (एमएम एचजी) में मापा जाता है। इस माप में दो संख्याएं होती हैं: शीर्ष (सिस्टोलिक) और निम्न (डायस्टोलिक)।



गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप

गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप का हल्का ऊपर-नीचे होना कोई चिंता का विषय नहीं। सामान्य तौर पर आपका रक्तचाप 110/70 और 120/80 के बीच रहना चाहिए। यदि आपका रक्तचाप 140/90 या उससे अधिक हैं, तो इसे अधिक रक्तचाप माना जाता है। 160/110 या उससे अधिक के रक्तचाप को गंभीर कहते है। हालांकि उच्च रक्तचाप वाली अधिकांश महिलाओं की गर्भावस्था सामान्य हो सकती है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान बहुत अधिक रक्तचाप रहना आपके और आपके बच्चे के लिए कई मुश्किलें पैदा कर सकता है।



गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप के संभावित कारण

अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होना
सक्रिय जीवन शैली का न होना
धूम्रपान या शराब पीना
कोई चिंता या तनाव होना
गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप का पारिवारिक इतिहास
गर्भ में एक से अधिक बच्चा होना
40 से अधिक की उम्र होना गर्भधारण होना
आईवीएफ जैसी तकनीक से गर्भधारण होना



उच्च रक्तचाप गर्भावस्था को कैसे प्रभावित करता है?

गर्भावस्था में रक्तचाप का थोड़ा उतार-चढ़ाव सामान्य है। आमतौर पर गर्भावस्था की शुरुआत में रक्तचाप थोड़ा गिरता है और फिर तीसरी तिमाही आते-आते पुराने स्तर पर आ जाता है। लेकिन अगर यह उच्च रक्तचाप स्थाई रूप से अधिक रहने लगता है तो कई समस्याओं को जन्म दे सकता है। यह गर्भ के साथ आपके दिल, गुर्दे या अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। उच्च रक्तचाप वाली महिलाओं में मधुमेह या गुर्दे की बीमारी जैसी अन्य बीमारियों के होने का जोखिम भी अधिक होता है।

1) गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के कारण होने वाली समस्याएं

यदि गर्भावस्था के 20वें सप्ताह बाद उच्च रक्तचाप होता है और आपके मूत्र में प्रोटीन आता है या ऐसे संकेत उभरते हैं कि कुछ अंग जैसे कि लीवर, ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं, तो यह प्रिक्लेम्पसिया नामक गंभीर स्थिति को संकेत हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान प्रिक्लेम्प्शिया तब विकसित होती है जब आपका रक्तचाप पहले से ही अधिक हो।

उच्च रक्तचाप के कारण आपके शरीर की प्रक्रिया ठीक से नहीं चल पाती और बच्चे को सभी आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते। ऐसे में वो सामान्य से धीरे बढ़ता हैं। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि उच्च रक्तचाप की समस्या कितनी गंभीर है।

उच्च रक्तचाप वाली गर्भवती महिलाएं सीज़ेरियन या सी-सेक्शन डिलीवरी होने के उच्च जोखिम पर होती हैं। इसकी वजह से अन्य जटिलताएं हो सकती हैं। औसतन, उच्च रक्तचाप वाली 10 महिलाओं में से 4 महिलाएं सी-सेक्शन द्वारा बच्चे को जन्म देती हैं।

इस स्थिति में, बच्चे के जन्म से पहले ही प्लेसेंटा का कुछ हिस्सा या पूरा हिस्सा गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाता है। प्लेसेंटल से संबंधित कई समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में, बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है, जिससे उसे तुरंत पैदा करने की आवश्यकता (समय से पहले) उत्पन्न हो जाती है।

उच्च रक्तचाप के कारण यदि गर्भवती महिला में जटिलताएं विकसित होती हैं, या ऐसा लगता है कि आपका बच्चा अच्छी तरह से विकसित नहीं हो रहा है, तो उसे जल्दी पैदा करना आवश्यक हो सकता है। रक्तचाप जितना गंभीर होगा, इसकी संभावना भी उतनी अधिक होगी।

गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप मां के साथ-साथ बच्चे के लिए भी खतरनाक हो सकता है। उच्च रक्तचाप के कारण गर्भावस्था की जटिलताओं में प्रीक्लेम्पसिया, औसत बच्चे से छोटे और सीज़ेरियन डिलीवरी की आवश्यकता होती है। यदि आपका रक्तचाप अधिक है, तो निरंतर अपने डॉक्टर की निगरानी में रहें। वो आपकी गर्भावस्था को सुरक्षित बना सकती है। यदि वक्त पर सही इलाज किया जाय तो गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप आमतौर पर गंभीर समस्याओं का कारण नहीं बनता। जननम की सलाह यही है की आप गर्भवती होने से पहले इसके प्रति सचेत रहें और गर्भावस्था के दौरान अपने रक्तचाप को कम रखने के लिए उचित उपाय करें, ताकि आने वाली खुशियों का स्वागत आप स्वस्थ तरीके से कर सकें।



नोट: जननम सही, सटीक और उपयोगी जानकारी उपलब्ध करने के लिए हमेशा आपके साथ हैं। लेकिन इसके साथ आपको डॉक्टर से सलाह लेना भी ज़रूरी है।
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