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गर्भावस्था में पित्त अम्ल अधिक होने पर क्या होता है?

Language: Hindi | Published: 11 Nov 2022 | Views: 13
गर्भावस्था में पित्त अम्ल अधिक होने पर क्या होता है?
गर्भावस्था में ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस: लक्षण, कारण और उपचार

गर्भावस्था में ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस यकृत से जुड़ी सभंवतया एक गंभीर स्थिति है। यह यकृत में पित्त के इकट्ठा होने की वजह से होती है। इसके कारण बहुत ज्यादा खुजलाहट होती है, विशेषक रात के समय, मगर चकत्ते नहीं होते। खुजलाहट हथेलियों और पांवों के तलवों से शुरु होती है और फिर शरीर के अन्य हिस्सों में होने लगती है। इसके अन्य लक्षणों में मिचली, त्वचा और आंखों में पीलापन, गहरे रंग का पेशाब और फीके रंग का मल आना शामिल है। ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस की वजह से समय से पहले प्रसव, श्वसन संकट सिंड्रोम, मिकोनियम निगल लेना और मृत शिशु के जन्म जैसे जटिलताएं हो सकती हैं। आप पर नजदीकी निगरानी रखने की जरुरत होगी और यदि शिशु का जन्म समय से पहले करवाना हो तो डॉक्टर आपको प्रसव प्रेरित करवाने या पूर्व-नियोजित सिजेरियन ऑपरेशन करवाने की सलाह दे सकती हैं।
ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस क्या है?
ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस (ओसी) को इंट्राहेपेटिक कोलेस्टेसिस ऑफ प्रेगनेंसी (आईसीपी) भी कहा जाता है। यह स्वास्थ्य स्थिति आपके यकृत (लिवर) को प्रभावित करती है। इसकी वजह से बहुत ज्यादा खुजलाहट हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोनल बदलावों और तेजी से बढ़ते पेट की वजह से आपकी त्वचा में सामान्य से ज्यादा रूखापन और खुजलाहट हो सकती है। मगर यदि आपको प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस हो, तो आपको बिना चकत्तों वाली बहुत ज्यादा खुजलाहट होगी। ऐसा आमतौर पर गर्भावस्था के अंत के चरण में होता है और अक्सर हथेलियों और पांवों के तलवों में यह खुजलाहट होती है।

अगर इसका उपचार न किया जाए, तो कोलेस्टेसिस की वजह से आपके शिशु को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं। लगातार निगरानी और उपचार से इसके खतरे को कम किया जा सकता है।
गर्भावस्था में कोलेस्टेसिस होने की वजह क्या होती है?
यह स्पष्ट नहीं है कि ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस किस वजह से होता है। हालांकि, कोलेस्टेसिस का मुख्य लक्षण खुजली होना है और यह शरीर में पित्त की मात्रा बढ़ने से जुड़ी है।

लिवर हमारे शरीर में संसाधन और शुद्धिकरण का महत्वपूर्ण काम करता है। शरीर के लिए पोषक तत्व बनाने के अलावा यह शरीर से अपशिष्ट पदार्थो को बाहर निकालने में मदद करता है, जिनकी हमें जरुरत नहीं होती। यह ऐसा कुछ हद तक पित्त (बाइल) का उत्पादन करके करता है। पित्त हरा-पीला द्रव होता है, जो कि कोलेस्ट्रॉल, पित्त लवण (बाइल साल्ट या बाइल एसिड), बिलिरुबिन (एक रंजक), पानी और इलैक्ट्रोलाइट्स से बना होता है।

पित्त लिवर से निकलकर आपकी पित्त की थैली (गॉलब्लैडर) में जमा हो जाता है। जब भी आप कुछ खाती हैं तो गॉलब्लैडर आपकी छोटी आंतों में पित्त छोड़ देता है, जहां यह वसा को पचाने में मदद करता है। मगर जब आपको प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस हो, तो पित्त लवण आपके शरीर में बढ़ने लगता है। यह आपकी त्वचा के नीचे इकट्ठा होने लगता है, जिससे बहुत ज्यादा खुजलाहट होती है।

यह भी माना जाता है कि ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस होने के पीछे आनुवांशिक, हॉमोनल और पर्यावरण संबंधी कारण भी हो सकते हैं।

आनुवांशिक
कोलेस्टेसिस कुछ जातीय समूहों में ज्यादा आम है और यह स्थिति परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही होती है। यह अक्सर भारतीय या पाकिस्तानी मूल में ज्यादा होता है, 70 में से एक महिला इससे प्रभावित होती है। अगर आपकी माँ या बहन को ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस हुआ था तो आपको भी यह होने की संभावना रहती है।

हॉर्मोन संबंधी
ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस अधिकतर तीसरी तिमाही में शुरु होता है जब गर्भावस्था हॉर्मोन ईस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टीरोन अपने चरम पर होते हैं। अगर आपके गर्भ में जुड़वा शिशु हैं या आप प्रजनन उपचार की सहायता से गर्भवती हुई हैं, तो ऐसा होने की संभावना ज्यादा रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन स्थितियों में हॉर्मोनों का स्तर और ज्यादा होता है।

पर्यावरण संबंधी
ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस सर्दियों के महीनों में ज्यादा आम है। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ विटामिन और मिनरल्स जैसे कि विटामिन डी आदि सर्दियों में शरीर में कम होता है।

प्रेगनेंसी के दौरान जिन महिलाओं को कोलेस्टेसिस हुआ, आमतौर पर उनमें से दो-तिहाई महिलाओं के साथ अगली गर्भावस्थाओं में भी यह स्थिति रही। साथ ही जिन महिलाओं के पेट में जुड़वा या इससे ज्यादा शिशु पल रहे हों और जिन महिलाओं का यकृत संबंधी बीमारी का इतिहास रहा हो, उनमें ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस ज्यादा आम है।
प्रेगनेंसी में ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस कब शुरु होता है?
आपको शायद ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस के लक्षण तीसरी तिमाही में महसूस होंगे, जब हॉर्मोनों का स्तर अपने चरम पर होता है।

हालांकि, कुछ मामलों में यह पहली तिमाही में भी शुरु हो सकता है।
गर्भावस्था में ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस के क्या लक्षण होते हैं?
गर्भावस्था में ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस के लक्षण निम्नांकित हैं:

बहुत ज्यादा खुजली
ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस का मुख्य लक्षण है खुजली होना। गर्भावस्था में खुजलाहट और त्वचा में रुखापन एक आम समस्या है, मगर गर्भावस्था में कोलेस्टेसिस की वजह से होने वाली खुजली बहुत ज्यादा परेशान करने वाली होती है।

खुजलाहट आमतौर पर तीसरी तिमाही में शुरु होती है और सबसे पहले यह हथेलियों और तलवों पर होती है। मगर यह शरीर पर कहीं भी हो सकती है। ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस की वजह से होने वाली खुजलाहट बहुत तेज होती है और रात के समय यह और ज्यादा बढ़ जाती है।

प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस की खुजली की वजह से चकत्ते नहीं होते। मगर आपकी त्वचा लाल हो सकती है, और बहुत ज्यादा खुजली करने की वजह से त्वचा में खरोंच पड़ सकती है और इसमें असहजता व जलन हो सकती है।

उबकाई आना या भूख कम होना
आपको हल्की मिचली हो सकती है या आप बीमार या असहज सा महसूस कर सकती हैं। हो सकता है आपको कुछ खाने की भी इच्छा न हो। आपको पेट में ऊपर दाईं तरफ दर्द भी महसूस हो सकता है।

पीलिया
कुछ महिलाओं को लिवर में बदलाव होने की वजह से खुजली के अलावा अन्य लक्षण भी होते हैं।

खून में बिलिरुबिन का स्तर बढ़ने की वजह से आपको शायद अपनी त्वचा या आंखों में पीलापन दिखाई देगा।

असामान्य पेशाब और मल
आपका पेशाब सामान्य से ज्यादा गहरे रंग का और मल सामान्य से हल्के रंग का (या ग्रे रंगत वाला) दिख सकता है।

अगर आपको लगे कि आपको कोलेस्टेसिस है या कोई अन्य चिंताजनक लक्षण लगे तो अपनी डॉक्टर से बात करें। बिना उपचार और निगरानी के कोलेस्टेसिस आपके शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस का पता कैसे चलता है?
प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस का पता लगाने के लिए डॉक्टर शारीरिक जांच कर सकते है। और लिवर फंक्शन टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं, ताकि पता चल सके कि लिवर सही ढंग से काम कर रहा है या नहीं। इससे आपके खून में पित्त अम्ल (बाइल एसिड) के स्तर का भी पता चल सकेगा। कई हफ्तों तक खुजलाहट रहने के बाद ही शायद लिवर या पित्त से जुड़ी समस्याओं का जांच में पता चल सकेगा, इसलिए हो सकता है आपको ये जांच दोबारा करवानी पड़े।

आपकी आंत में पित्त का प्रवाह अवरुद्ध होने के अन्य कारण भी हो सकते हैं। अल्ट्रासाउंड स्कैन से पता चल सकेगा कि इस परेशानी की वजह कुछ और जैसे कि पित की थैली में पथरी (गॉलस्टोन्स) तो नहीं है।

अन्य स्वास्थ्य स्थितियां जैसे कि वायरल संक्रमणों की वजह से भी यकृत से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए आपकी डॉक्टर ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस की पुष्टि करने से पहले खून की कुछ विशिष्ट जांचें करवाने को कह सकती हैं।
ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस का मेरी गर्भावस्था पर क्या असर पड़ेगा?
ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस से शायद आपके स्वास्थ्य को नुकसान न पहुंचे, मगर खुजलाहट की वजह से असहजता हो सकती है। आपको यह जानकर तसल्ली होगी कि शिशु के जन्म के बाद यह खुजलाहट जल्द ही ठीक हो जानी चाहिए।

यह खुजलाहट अक्सर रात के समय ज्यादा बढ़ जाती है। इस वजह से हो सकता है आप रात को ठीक से सो न पाएं और थकी-थकी महसूस करें।

ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस की वजह से आपके खून की थक्के बनाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, मगर सामान्यत: ऐसा होता नहीं है। अगर आपको पहले से ही खून के थक्के न बन पाने से जुड़ा विकार है, हल्की रंगत का मल या गर्भावस्था की शुरुआत में ही ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस की गंभीर स्थिति है, तो डॉक्टर आपको विटामिन 'के' का सप्लीमेंट दे सकती हैं। यह खून के थक्के बनने में मदद करेगा।

अगर आपको ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस है, तो डॉक्टर आप और आपके गर्भस्थ शिशु पर नजदीकी निगरानी रखेंगे। इसमें निम्न जांचें और टेस्ट शामिल हैं:

आपके शिशु के दिल की धड़कन सुनना
आपके शिशु की हलचल पर नजर रखना
शिशु के विकास और सेहत की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैन करवाना

प्रेगनेंसी में कोलेस्टेसिस से गर्भस्थ शिशु किस तरह प्रभावित होता है?
गर्भावस्था में माँ को ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस होने पर सबसे मुख्य चिंता गर्भ में पल रहे शिशु के समय से पहले जन्म लेने की होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि डॉक्टर को लगता है कि समय से पहले जन्म लेना शिशु के लिए सुरक्षित है या फिर हो सकता है आपका प्रसव नियत तिथि से पहले ही शुरु हो जाए।

समय से पहले आपका प्रसव प्रेरित करवाया जाएगा या नहीं यह बाइल एसिड के स्तर पर निर्भर करता है। यह स्तर जितना ज्यादा होगा उतनी ही ज्यादा समय से पहले पूर्वनियोजित या तुरंत जन्म करवाने की संभावना होगी।

पित्त अम्ल का उच्च स्तर होने से प्रीमैच्योर बर्थ का खतरा बढ़ सकता है और दुर्भाग्यवश मृत शिशु के जन्म का भी खतरा रहता है। इसी कारण से डॉक्टर खून की जांचों के जरिये आपके पित्त अम्ल के स्तर पर नजर रखती हैं।

अगर दवा से पित्त का स्तर कम नहीं होता या फिर अल्ट्रासाउंड या हृदय जांच से किसी समस्या का अंदेशा हो तो आपके शिशु का जन्म तुरंत करवाया जाएगा। या फिर आपकी और शिशु के स्वास्थ्य और आपके गर्भावस्था के चरण को देखते हुए डिलीवरी को कुछ समय टाला भी जा सकता है, ताकि शिशु को विकसित होने का और समय मिल सके। मगर संभवतया ड्यू डेट से पहले ही आपका प्रसव प्रेरित कर दिया जाएगा या सिजेरियन आॅपरेशन किया जाएगा, ताकि मृत शिशु के जन्म (स्टिलबर्थ) का खतरा टाला जा सके।

साथ ही, अगर आपको ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस है तो जन्म से पहले गर्भ में ही शिशु द्वारा पहला मलत्याग (मिकोनियम) करने की आशंका रहती है। अगर यह मल शिशु के वायुमार्ग में चला जाए, तो इससे कई बार शिशु के लिए श्वसन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इस स्थिति को अंग्रेजी में मिकोनियम एस्पिरेशन सिंड्रोम कहते हैं। गर्भ के भीतर ही शिशु के फेफड़ों में अगर पित्त अम्ल चला जाए, तो इससे भी शिशु को सांस लेने से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

जन्म के तुरंत बाद आपके नवजात शिशु की जांच की जाएगी, ताकि स्पष्ट हो सके कि उसे किसी उपचार की जरुरत तो नहीं है। कुछ शिशु स्वस्थ होते है, और उन्हें केवल निगरानी की जरुरत होती है। जो शिशु गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं, उन्हें अतिरिक्त देखभाल और उपचार के लिए नवजात आईसीयू में भर्ती किया जा सकात है।
गर्भावस्था में ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस का उपचार कैसे किया जाता है?
ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस का एकमात्र इलाज है डिलीवरी करवाना। इस बीच, आपकी डॉक्टर लक्षणों से राहत देने के लिए उचित उपचार बता सकती हैं।

डॉक्टर आपको अर्सोडिओक्सिकॉलिक एसिड (यूडीसीए) नामक दवा दे सकती है, जो आमतौर पर ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस के लिए इस्तेमाल की जाती है। इस दवा से आपकी खुजलाहट कम हो सकती है, लिवर सही ढंग से काम करने में मदद मिल सकती है और पित्त लवण का स्तर भी कम हो सकता है।

डॉक्टर आपको क्रीम और संभवतया एंटिहिस्टेमीन दवा भी दे सकती हैं, ताकि आपको खुजली से राहत मिले और आप आराम से सो सकें। हालांकि, ये कितनी कारगर हैं, इस बारे में ज्यादा प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
क्‍या प्राकृतिक उपचार कोलेस्टेसिस की वजह से होने वाली खुजली से राहत दे सकते हैं?
ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस की समस्या वाली कुछ महिलाओं का मानना है कि समय-समय पर ठंडे पानी से नहाना और ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनने से खुजली से राहत मिलती है।

कुछ अन्य महिलाओं का मानना है कि ठंडक देने वाली प्राकृतिक क्रीम जैसे कि एलोवेरा आदि लगाने से आराम मिलता है। इसके बाद इसे पानी से धो दें।

ठंडक वाले कमरे में रहने और प्रभावित जगहों पर थोड़ी देर आइस पैक लगाने से भी बेहतर महसूस हो सकता है।

आपने शायद सुना हो कि कुछ हर्बल उपचार ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। मगर इन्हें आजमाने से पहले हमेशा अपनी डॉक्टर से बात करें। जड़ी-बूटिंया और इनसे बने उत्पाद प्राकृतिक माने जाते हैं, मगर जरुरी नहीं है कि ये सुरक्षित भी हों। हो सकता है आप जो पहले से दवा ले रही हैं, ये उनके साथ सही मेल न खाएं। यह भी संभव है कि गर्भवती महिला और उसके अजन्मे शिशु के लिए ये सुरक्षित न हों।

साथ ही, खुजली वाली जगह पर कोई भी हर्बल तेल, उबटन आदि लगाने में भी एहतियात बरतें। ऐसे कुछ उत्पादों से चकत्ते हो सकते हैं या स्थिति और बिगड़ सकती हैं। अगर आप कोई लोशन, तेल, क्रीम, उबटन लगाना चाहें, तो पहले डॉक्टर से पूछ लें।

आप हमारे कम्युनिटी फोरम में अन्य माँओं और गर्भवती महिलाओं से जुड़ सकती हैं। वे आपको अपने अनुभव से कुछ सुझाव व सलाह दे सकती हैं।
क्या डिलीवरी के बाद ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस की समस्या ठीक हो जाएगी?
आपको यह जानकर राहत मिलेगी कि आमतौर पर डिलीवरी के बाद कुछ दिनों में ही खुजली ठीक हो जाती है। आपको खून की जांचें करवानी होगी ताकि पता चल सके कि लिवर पहले की तरह सामान्य काम कर रहा है या नहीं। यह अक्सर डिलीवरी के बाद छह सप्ताह बाद डॉक्टरी चेक-अप के दौरान होता है।

आमतौर पर, जांच से पता चलेगा कि आपका लिवर सामान्य काम कर रहा है और आपकी ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस की स्थिति अब ठीक हो गई है। अगर जांच से पता चले कि लिवर में अभी भी समस्या है, तो आपको कुछ समय बाद फिर से जांच करवानी होगा। अगर डिलीवरी के आठ सप्ताह बाद भी आपका लिवर सामान्य स्थिति में नहीं आता, तो आपको किसी विशेषज्ञ डॉक्टर के पास भेजा जाएगा। हो सकता है आपको इंट्राहेप्टिक कोलेस्टेसिस ऑफ प्रेगनेंसी (आईसीपी) के अलावा कोई और समस्या हो जो लिवर को प्रभावित कर रही है।

ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस होने के बाद आप शिशु को स्तनपान करवा सकती हैं, यह सुरक्षित है। अगर आप डिलीवरी से पहले खुजलाहट कम करने के लिए यूडीसीए दवा ले रही थीं, तो इसकी थोड़ी सी मात्रा आपके स्तनदूध में होगी, मगर इतनी मात्रा नुकसानदेह नहीं होगी।

आपको शायद कुछ तरह की गर्भनिरोध गोलियां न लेने की सलाह दी जाए। डॉक्टर आपको बताएंगी कि गर्भनिरोध का कौन सा तरीका आपके लिए सही रहेगा।

अगर आपको ओसी हुआ था, तो भविष्य में आपको पित्त की थैली में पथरी और लिवर से जुड़ी दीर्घकालीन बीमारी हो सकती है। इस बात की भी संभावना रहती है कि अगली बार फिर से गर्भवती होने पर भी आपको ओसी की समस्या हो सकती है। अपनी स्थिति के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप अपनी डॉक्टर से बात कर सकती हैं।
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