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जन्म देने के बाद मेरे मूत्रमार्ग में दर्द क्यों होता है?

Language: Hindi | Published: 19 Oct 2022 | Views: 9
जन्म देने के बाद मेरे मूत्रमार्ग में दर्द क्यों होता है?
गर्भावस्था में मूत्रमार्ग संक्रमण
गर्भवती महिला पेट दर्द की वजह से पेट पर हाथ रखे हुए

In this article

मूत्रमार्ग का संक्रमण (यू.टी.आई.) क्या है?
क्या गर्भावस्था के दौरान मूत्रमार्ग संक्रमण होना आम है?
क्या मुझे यूटीआई होने से मेरे गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंच सकता है?
मूत्रमार्ग संक्रमण के क्या लक्षण हैं?
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का इलाज कैसे होता है?
मूत्रमार्ग के संक्रमण से बचने के लिए मैं क्या कर सकती हूं?
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मूत्रमार्ग का संक्रमण (यू.टी.आई.) क्या है?
मूत्रमार्ग का संक्रमण (यूरीनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन - यूटीआई) हानिकारक जीवाणुओं (बैक्टीरिया) के मूत्रपथ में प्रवेश के कारण होता है। मूत्रमार्ग में शामिल होते हैं:

गुर्दे (किडनी)
मूत्रवाहिनियां (यूरेटर), जो मूत्र को गुर्दे से मूत्राशय तक ले जाती हैं
मूत्राशय (ब्लैडर)
मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा), जो मूत्राशय से पेशाब को बाहर ले जाता है


जब हानिकारक जीवाणु मूत्रपथ के किसी भी हिस्से में प्रवेश करते हैं, तो उस हिस्से में सूजन व जलन हो सकती है। बाद में इसमें इनफेक्शन हो जाता है।

यूटीआई आमतौर पर आपकी त्वचा, योनि या गुदा के बैक्टीरिया का मूत्रमार्ग में प्रवेश करने और फिर ऊपर तक पहुंचने की वजह से होता है।

मूत्रमार्ग संक्रमण होना सामान्य बात है। लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं को अपने जीवन काल में कम से कम एक बार यह संक्रमण होता है।

मूत्रमार्ग संक्रमण कई तरह का होता है:

जो इनफेक्शन मूत्राशय को प्रभावित करता है उसे लोअर यूटीआई या सिस्टाइटिस कहा जाता है। सिस्टाइटिस यौन क्रियाओं में सक्रिय 20 से 50 साल की महिलाओं में काफी आम है।
जो इनफेक्शन गुर्दों तक पहुंच चुका होता है उसे अपर यूटीआई या पाइलोनेफ्राइटिस कहा जाता है।
यह भी संभव है कि आपके मूत्रमार्ग में संक्रमण हो और आपके इसके कोई लक्षण महसूस न हों। इसे एसिम्टोमेटिक बैक्टीरुरिया कहा जाता है।

क्या गर्भावस्था के दौरान मूत्रमार्ग संक्रमण होना आम है?
हां। गर्भावस्था में आपके शरीर में होने वाले बदलाव आपको मूत्रमार्ग संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं।

प्रोजेस्टीरोन आपकी मूत्रवाहिनियों की मांसपेशियों को शिथिल करता है। यह गुर्दों से मूत्राशय को जाने वाले पेशाब के प्रवाह को धीमा बनाता है। आपके बढ़ते हुए गर्भाशय का भी यही प्रभाव पड़ता है। इसका मतलब है कि जीवाणुओं को बाहर निकलने से पहले पलने-बढ़ने का अधिक समय मिल जाता है। इससे इनफेक्शन होने की आशंका बढ़ जाती है।
क्या मुझे यूटीआई होने से मेरे गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंच सकता है?
यह गर्भस्थ शिशु को प्रभावित कर सकता है, इसलिए यूटीआई होने पर शीघ्र एंटिबायोटिक उपचार बहुत जरुरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि मूत्रमार्ग संक्रमण होने से गर्भ में जलन व असहजता हो सकती है, जिससे आपका प्रसव समय से पहले शुरु हो सकता है। यूटीआई को निम्न स्थितियों के साथ भी जोड़ा गया है:

प्री-एक्लेमप्सिया
पानी की थैली जल्दी फटना
समय से पहले जन्म
कम जन्म वजन शिशु


यदि इसका उपचार न किया जाए, तो लोअर यूटीआई बढ़कर उपरी यूटीआई में तब्दील हो सकता है। इससे आपकी और गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।
मूत्रमार्ग संक्रमण के क्या लक्षण हैं?
संभव है कि आपको यूटीआई हो और इसके कोई लक्षण महसूस न हों, खासकर कि गर्भावस्था में।

इसलिए गर्भावस्था की शुरुआत में आपको पेशाब की जांच करवानी चाहिए। यदि पेशाब में बैक्टीरिया का पता चलता है, तो डॉक्टर आपको यूरीन कल्चर जांच करवाने के लिए कह सकते हैं। इससे पता चलेगा कि इनफेक्शन कौन से बैक्टीरिया की वजह से है और इसके आधार पर आपको एंटिबायोटिक दवाएं दी जाएंगी। फिर चाहे आपको कोई लक्षण हों या नहीं।

यदि आप यूरीन टेस्ट के परिणाम देखें, तो आपको ल्यूकोलाइट्स (सफेद रक्त कोशिकाएं) और नाइट्राइट्स (बैक्टीरिया की मौजूदगी के प्रमाण) जैसे शब्द देखने को मिलेंगे। बहुत से ल्यूकोलाइट्स का मतलब है कि आपका शरीर इनफेक्शन से लड़ रहा है और बहुत से नाइट्राइट्स का मतलब है कि आपके पेशाब में बैक्टीरिया मौजूद है, आमतौर पर आंतो से एशेरिकिया कोलाइ (ई कोलाइ) बैक्टीरिया।

मूत्राशय में यूटीआई (सिस्टाइटिस) के लक्षणों में शामिल हैं:

पेशाब करते समय दर्द या जलन
पेशाब करने की तीव्र इच्छा या सामान्य से ज्यादा पेशाब आना
पेट के निचले हिस्से में या पीठ में दर्द
पेशाब में थोड़ा खून आना
सामान्यत: अस्वस्थ सा महसूस होना


यदि आपको गर्भावस्था में यूटीआई के लक्षण हों, तो जरुरी है कि आप तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

कई बार पेट में या पीठ में दर्द हल्के या मध्यम संकुचनों जैसे महसूस हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर आपके लक्षणों के बारे में बहुत से सवाल पूछ सकते हैं और पेशाब की जांच करवाने के लिए कहेंगे।

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यदि इनफेक्शन आपके गुर्दों तक फैल गया है (अपर यूटीआई) तो इससे आप गंभीर रूप से बीमाार हो सकती हैं। इसके लक्षणों में शामिल हैं:

100.4 डिग्री फेहरनहाइट या इससे तेज बुखार
पीठ, श्रोणि या बगल में लगातार दर्द
कंपकंपी
मिचली और उल्टी


यदि ये लक्षण हो, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यदि आपकी डॉक्टर उपलब्ध न हों, तो अस्पताल के आपातकाल विभाग में जाएं।
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का इलाज कैसे होता है?
यदि आपको यूटीआई है तो डॉक्टर आपको एंटिबायोटिक दवाएं देंगी। यदि आपको दर्द हो तो वे आपको पैरासिटामोल लेने के लिए कह सकती हैं। मूत्राशय संक्रमणों के लिए एंटिबायोटिक दवाएं काफी प्रभावी होती हैं और डॉक्टर आपको ऐसी दवा देंगे जो गर्भावस्था में सुरक्षित हों।

गर्भवती महिलाओं के लिए आमतौर पर सात दिनों तक एंटिबायोटिक्स लेने की सलाह दी जाती है। उपचार खत्म होने के बाद डॉक्टर शायद ​एक बार फिर पेशाब की जांच करवाना चाहेंगी, ताकि सुनिश्चित हो सके कि इनफेक्शन ठीक हो गया है। हो सकता है वे डिलीवरी तक नियमित तौर पर आपके पेशाब की जांच करवाती रहें।

यदि आपका इनफेक्शन गुर्दों तक पहुंच गया है, तो आपको निगरानी के लिए कुछ समय तक अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। आपको ड्रिप लगा कर नसों के जरिये एंटिबायोटिक दवाएं दी जा सकती हैं। यह जरुरी है कि आपको शीघ्र सही देखभाल मिले, मगर कई दुर्लभ मामलों में गुर्दों का इनफेक्शन सेप्सिस में बदल सकता है। ऐसा तब होता है जब शरीर अपने ही उत्तकों और अंगों पर हमला करना शुरु कर देता है।

यदि आपको बार-बार यूरीनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन होता रहता है, तो डॉक्टर आपको कम खुराक वाली एंटिबायोटिक दवा रोजाना लेने के लिए कह सकती हैं। हालांकि, यदि आप हर रोज एंटिबायोटिक्स लेना न चाहें तो वे आपको नियमित जांच करवाने की सलाह दे सकती हैं।

आपके पति को यूरीन इनफेक्शन के लिए जांच करवाने की जरुरत नहीं है, क्योंकि यूटीआई यौन संचारित रोग नहीं है।

कई बार परिवार व मित्रजन वैकल्पिक या हर्बल उपचार लेने की सलाह दे सकते हैं। मगर, केवल एंटिबायोटिक ही इनफेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया को मार सकती हैं। इसलिए डॉक्टर से उपचार लेने में देरी न करें।
मूत्रमार्ग के संक्रमण से बचने के लिए मैं क्या कर सकती हूं?
यूटीआई से बच पाना हर बार संभव नहीं होता। इस बात के प्रमाण नहीं है कि इसका कोई कारगर उपाय है, मगर आम सलाहों में शामिल हैं:

पेशाब को रोके नहीं। जैसे ही आपको मूत्र त्याग करने का एहसास हो शौचालय का उपयोग करें। मूत्राशय में ज्यादा समय तक पेशाब रहने से संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।
संभोग के तुरंत बाद शौचालय ज़रूर जाएं।
मलत्याग करने के बाद, जीवाणु को गुदा से योनि में फैलने से रोकने के लिए अपने आपको आगे से पीछे की ओर धोएं और पौंछे।
नहाने के लिए सौम्य, सुगंधहीन क्लींजर का इस्तेमाल करें और टब में नहाने की बजाय शावर या बाल्टी से नहाएं।
सिंथेटिक की बजाय सूती अंडरवियर पहनें, जो तंग नहीं हों। साथ ही टाइट जीन्स और पैंट भी न पहनें।
खूब सारा तरल पदार्थ पीएं, विशेषकर पानी। ये आपके शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में सहायता करता है।
सार्वजनिक शौचालय के इस्तेमाल के दौरान सीट पर न बैठें। पूरा बैठने की बजाय कोशिश करें कि थोड़ा झुककर पेशाब करें, क्योंकि सीट आमतौर पर कीटाणुओं से भरी होती है। यदि विकल्प हो और आपको आरामदेह लगे तो आप भारतीय शैली के शौचालय का इस्तेमाल कर सकती हैं।
टॉयलेट सीट पर बैठने से पहले उसे कीटाणुमुक्त करने के लिए बाजार में कई उत्पाद उपलब्ध हैं। इनमें से अधिकांश स्प्रे के तौर पर आते हैं, जिन्हें आप सीट पर छिड़क सकती हैं, जिससे बैक्टीरिया मर जाते हैं। कई ऐसे भी उत्पाद हैं, जिनके इस्तेमाल से आप खड़े होकर पेशाब कर सकती हैं। आपको जो उचित लगे, वह विकल्प चुन सकती हैं।
अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। अपना अंडरवियर रोजाना बदलें।

आपने शायद सुना हो कि करौंदे (क्रेनबेरी) का जूस या इसके कैपसूल लेने से यूटीआई में फायदा होता है। करौंदे से बने उत्पाद एंटिबायोटिक दवा के विकल्प नहीं है, खासकर यदि आप गर्भवती हैं तो।

हालांकि, करौंदे का जूस पीने से लक्षणों में सुधार आ सकता है, जैसे कि जलन आदि में और इससे शिशु को नुकसान पहुंचने के प्रमाण भी नहीं हैं। हालांकि, करौंदे के जूस या कैप्सूल को उपचार के तौर पर इस्तेमाल करने से पहले अपनी डॉक्टर से बात अवश्य करें।

अच्छी बात यह है कि अगर आपको एंटिबायटिक्स दवाएं दी गई हैं, तो इन्हें लेने के पहले दिन के बाद से ही संभवतः आप लक्षणों में सुधार महसूस करेंगी।
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