इस बात का जवाब विज्ञान नहीं दे सकता, और भगवान को बीच में लाकर मैं नास्तिकों को नाउम्मीद नहीं करना चाहती. इसलिए मेरा जवाब ये है कि इसमें कुदरत का हाथ है.
जन्म के कुछ महीनों बाद तक मेरा बेटा मुझे मेरी खुशबू से पहचानता था, मेरे स्पर्श से पहचानता था, मेरी आवाज़ से पहचानता था. अब एक तीन-चार महीने के बच्चे को ये सब याद कैसे रहता था, इसका जवाब सिर्फ़ कुदरत के पास है.
एक बार उसके पिता ने मेरा परफ़्यूम लगाकर उसे नींद से उठाना चाहा, लेकिन नहीं, वो मेरी इस कृत्रिम खुशबू को नहीं, मेरी अपनी व्यक्तिगत खुशबू से पहचानता था इसलिए रोने लगा और मेरे पास आते ही चुप हो गया.
नवजात माँ को कैसे पहचानता है?