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नवजात शिशु को कितना रोना चाहिए?

Language: Hindi | Published: 18 Oct 2022 | Views: 23
नवजात शिशु को कितना रोना चाहिए?
जब बच्चा जन्म लेता है तो वह मां की कोख से अलग होता है. जन्म के समय पर बच्चे का रोना उसके जीवन का संकेत है. जब जन्म के बाद बेबी फर्स्ट क्राई करता है तब पता चलता है कि उसके फेफड़े और हार्ट काम कर रहे हैं.

इस बारे में हेल्थ एक्सपर्ट्स व गायनोकोलॉजिस्ट मानते हैं कि रोने से बच्चे के स्वास्थ्य का पता चलता है. अगर बच्चा तेजी से रोता है तो इसका मतलब है वो स्वस्थ्य है. अगर बच्चा बहुत धीमे आवाज में रोता है तो कुछ स्वास्थ्य परेशानियां हो सकती हैं.

नवजात शिशु जन्म लेने से पहले गर्भनाल के माध्यम से सांस ले रहा होता है. जन्म के कुछ सेकेंड बाद बच्चा खुद से सांस लेता है. जब नवजात शिशु सांस लेता है तो नाक और मुंह में जमें तरल पदार्थ को बाहर करता है. इस प्रक्रिया में बच्चा रोने लगता है. जब बच्चा खुद से सांस नहीं ले पाता और फ्लूइड को बाहर नहीं कर पाता तो डॉक्टर सक्शन ट्यूब की मदद से ऐसा करते हैं.

गर्भ में पलने के बाद बच्चा जब जन्म लेता है तो वह अगले 24 घंटे बहुत शांत रह सकता है. ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि बच्चा बाहर के वातावरण के साथ कुद को एडजस्ट कर रहा होता है.

शिशु का रोना जरूरी होता है क्योंकि वह रोने के माध्यम से ही अपनी जरूरतों को बताता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बच्चे के रोने की आवाज मां सो रही होती है तब भी उसे सुनाई दे जाती है. यह एक प्रकृति का नियम जैसा है.

एक स्वस्थ्य बच्चे को एक दिन या 24 घंटे में कम से कम 2-3 घंटे रोना ही चाहिए.

अगर नवजात शिशु 3 घंटे से अधिक रोता है तो विशेष देखभाल की जरूरत हो सकती है. अगर बच्चा 4 घंटे से ज्यादा रो रहा है तो फिर डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए. बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है उसके रोने का समय कम होने लगता है.
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