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नवजात शिशु को बुखार आने पर क्या करना चाहिए?

Language: Hindi | Published: 18 Oct 2022 | Views: 32
नवजात शिशु को बुखार आने पर क्या करना चाहिए?
पहली बार नवजात शिशु को बुखार आने पर, इस लक्षण को न करें नजरअंदाज, तुरंत भागें डॉक्‍टर के पास
पहली बार पेरेंट बनने पर नए-
नए एक्‍सपीरियंस मिलते हैं। वहीं शिशु को पहली बार बुखार होने पर भी न्‍यू पेरेंट्स की जान निकल जाती है।
हर किसी के लिए पेरेंटिंग एक अलग एक्‍सपीरियंस होता है और इस सफर में हर पेरेंट को अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अपने बच्‍चे को नौ महीने तक गर्भ में रखना और उसे पहली बार अपनी गोद में उठाना, ये कुछ ऐसे एहसास होते हैं जिन्‍हें भुलाया नहीं जा सकता है।प्रेग्‍नेंसी के नौ महीनों के उतार-चढ़ाव के बाद शिशु का जन्‍म होने पर आपकी पेरेंटिंग का सफर शुरू होता है। जब नवजात शिशु बीमार पड़ता है, तो पेरेंट्स की टेंशन और जिम्‍मेदारी दोनों ही बढ़ जाती हैं।शिशु को बुखार में तड़पते हुए देखना बहुत मुश्किल होता है लेकिन इस समय आपको परेशान होने या हड़बड़ी दिखाने की बजाय इस परेशानी से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत होती है।
​बुखार कैसे चेक करें
नवजात शिशु के सिर पर अपनी हथेली के पीछे वाला हिस्‍सा लगाकर देखें। अगर माथा गरम लग रहा है, तो थर्मोमीटर से फीवर चेक करें। आप बच्‍चे में बुखार के अन्‍य लक्षण जैसे कि चिड़चिड़ापन, सुस्‍ती और बेवजह थकान को भी नोटिस करें।
​सही थर्मोमीटर चुनें
यदि आपका बच्‍चा 3 महीने से कम उम्र का है, तो उसका बॉडी टेंपरेचर 100.4 डिग्री फारेनहाइट से ज्‍यादा नहीं होना चाहिए। अगर टेंपरेचर इससे ज्‍यादा है, तो शिशु को तुरंत डॉक्‍टर के पास लेकर जाएं।शिशु के लिए रेक्‍टल थर्मोमीटर का ही इस्‍तेमाल करें। इस्‍तेमाल से पहले रेक्‍टल थर्मोमीटर को गर्म और साबुन के पानी में जरूर धो लें। सही रीडिंग आने के लिए एक मिनट का इंतजार करें।
​आप हैं सबसे सही
अगर टेंपरेचर बुखार जितना भी नहीं है, तो बुखार के लक्षणों पर ध्‍यान दें और उसी के मुताबिक शिशु की देखभाल करें। शिशु को पहली बार बुखार होना, पेरेंट्स को डरा देता है क्‍योंकि उन्‍हें इसके बारे में ज्‍यादा कुछ पता ही नहीं होता है।

शिशु में सुस्‍ती, थकान और चिड़चिड़ेपन के साथ उल्‍टी, रैश और देर तक न रो पाने जैसे बिहेवरियल बदलाव भी देखें।
​डॉक्‍टर की सलाह है जरूरी
शिशु को बुखार होने पर, बेहतर होगा कि आप डॉक्‍टर से सलाह लें। डॉक्‍टर से पूछे बिना शिशु को कोई दवा न दें क्‍योंकि डॉक्‍टर ही बताए पाएंगे कि किस उम्र के शिशु को किस दवा की कितनी खुराक देनी चाहिए।
नवजात शिशु बहुत छोटा होता है और उसकी इम्‍यूनिटी तो अभी बनी भी नहीं होती है इसलिए आप खुद से कोई दवा देने की बजाय एक बार डॉक्‍टर से जरूर बात कर लें।
​नोट करें ये बात
यहां दी गई सलाह और सुझावों को डॉक्‍टरी इलाज का विकल्‍प नहीं माना जा सकता है। इसलिए शिशु को बुखार होने पर डॉक्‍टर से बात करनी जरूरी है। इस मामले में कोई लापरवाही न बरतें।

जब नवजात शिशु को बुखार हो, तो मां उसके पास ही रहे। आप शिशु को अपनी गोद में रखें ताकि बच्‍चे को थोड़ा सुरक्षित और सुकून महसूस हो सके। इस समय बच्‍चा चिड़चिड़ा हो सकता है या रो सकता है। सिर्फ मां ही ऐसी स्थिति में बच्‍चे को शांत कर सकती है।
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