सीपीएपी मशीन से शिशु को आसानी से दी जा सकेगी ऑक्सीजन
एम्स में निर्मित सीपीएपी मशीन से नवजातों को ऑक्सीजन दी जाएगी। इसका प्रयोग नवजात को ओटी में सांस देने के लिए किया जाता है। जानकारों की माने तो डफरिन में एक माह तक चलने वाले ट्रॉयल के बाद इसकी सफलता दर देखते हुए अन्य अस्पतालों में भी मशीन का प्रयोग किया जाएगा।
एनएचएम की ओर से मिली मशीन
डफरिन अस्पताल में इस सीपीएपी मशीन को एनएचएम की ओर से लगाया गया है। ओटी में नवजात शिशुओं को सांस लेने की तकलीफ पर इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। अभी नवजात शिशुओं को एनआईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर पर लिटाया जाता है। वेंटिलेटर पर ट्रैकिया में ट्यूब डालकर सांस दी जाती है, जिससे शिशु को काफी तकलीफ होती है। ट्रॉयल के लिए आई मशीन से डॉक्टरों ने बिना किसी ट्यूब के नाक के रास्ते से हल्के प्रेशर से नवजातों को ऑक्सीजन दी।
पैर से भी चला सकते हैं मशीन
इस मशीन को डॉक्टर हाथ के बजाए पैर से भी चला सकते हैं। जिन बच्चों के फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं होते, उन्हें मशीन से धीरे-धीरे ऑक्सीजन दी जाती है। जिससे शिशु के फेफड़े को बढ़ने में मदद मिलती है। यह मशीन वेंटिलेटर की अपेक्षा काफी बेहतर है।
वर्जन
एक माह तक परीक्षण के बाद मशीन की जानकारी को डॉक्टर एनएचएम को भेजेंगे। वहां इसकी रिपोर्ट तैयार होगी।
नवजात शिशु को वेंटिलेटर पर क्यों रखा जाता है?