किस स्थिति में नवजात शिशु की छींक होती है नॉर्मल, जानें कब माता-पिता को करनी चाहिए चिंता
शिशु के पैदा होते ही माता-पिता उससे जुड़ी हर चीज का ख्याल बेहद सोच समझकर रखने लगते हैं। बच्चे के खाने-पीने से लेकर उसे आने वाली एक छींक भी उनके लिए चिंता...
शिशु के पैदा होते ही माता-पिता उससे जुड़ी हर चीज का ख्याल बेहद सोच समझकर रखने लगते हैं। बच्चे के खाने-पीने से लेकर उसे आने वाली एक छींक भी उनके लिए चिंता करने का विषय बन सकती है। ऐसे में यह सवाल कई माता-पिता के मन को परेशान करता है कि क्या वाकई शिशु को आने वाली छींक सामान्य होती है या फिर नहीं और यह कब बच्चे के लिए खतरनाक हो सकती है। आइए जानते हैं इस सवाल का सही जवाब।क्या नवजात शिशु का छींकना सामान्य है?
छींक एक तरह का प्रोटेक्टिव रिफ्लक्स (कीटाणुओं से बचाव की क्रिया) है, जिसे नर्वस सिस्टम नियंत्रित करता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पूरे बॉडी को कंट्रोल करने वाली तंत्रिका तंत्र सही से कार्य कर रही है।एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) द्वारा प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि मां के गर्भ से मिल रही दवा के अचानक रुकने से भी नवजात को छींक आती है, जिसे नियोनेटल एब्सटीनेंस सिंड्रोम (NAS) कहते हैं। इसके अलावा एलर्जी, सर्दी या फिर बिना किसी खास कारण के भी शिशु कई बार छींकता है। किस स्थिति में नवजात शिशु का छींकना सामान्य-
-शिशु की नाक साफ करते समय उसे छींक आ सकती है। ऐसा हर बच्चे के साथ नहीं होता है, लेकिन कुछ बच्चों के साथ यह हो सकता है।
-मां का दूध पीते समय शिशु का एक नथुना मां की त्वचा से दब जाता है, जिसे खोलने के लिए शिशु छींक सकता है।
-जन्म के शुरुआती दिनों में शिशुओं की लार ज्यादा बहती है। इसे कई बार शिशु निगल जाते हैं। जब यह लार छोटे बच्चों के वायु मार्ग में जमा होते हैं, तो उन्हें छींक आ सकती है।
-शिशु की नाक बंद होने पर उसे छींक आ सकती है। यह शरीर की स्वाभाविक क्रिया है। ऐसे में नाक पूरी तरह खोलने के लिए भी नवजात को छींक आ सकती है।
-धूल के छोटे-छोटे कण हवा के माध्यम से नाक में प्रवेश कर जाते है। इनके नाक में पहुंचने पर शिशु को छींक आ सकती है।
नवजात शिशुओं को छींक आने का क्या कारण है?