विज्ञान कहता है, यह एक तरह का ऑप्टिकल इम्यूजन है, यानी एक भ्रम है. ऐसा होने की सही वजह है प्रकाश की किरणें. आसान भाषा में समझें तो प्रकाश में सात रंग होते हैं. इनमें से जो भी रंग किसी भी चीज पर पड़कर परावर्तित होता है, हमें वहीं रंग नजर आता है.
जैसे- कोई वस्तु प्रकाश की इन सातों किरणों को परावर्तित कर देती है तो वो हमें सफेद नजर आती है. वहीं, जो चीज इन सभी किरणों को अवशोषित कर लेती है वो काली नजर आती है. किरणों के परावर्तन का यह सिद्धांत नसों के मामले में भी लागू होता है.
नसों में लाल रंग का खून बहता है, इस हिसाब से तो इसे लाल नजर आना चाहिए, लेकिन नहीं होता. विज्ञान के मुताबिक, प्रकाश की किरणों में 7 रंग होते हैं. इसलिए जब प्रकाश की किरणें नसों पर पड़ती है तो लाल रंग की किरणें अवशोषित यानी एब्जॉर्ब हो जाती हैं, लेकिन किरणों में मौजूद नीला रंग अवशोषित नहीं होता, यह परावर्तित हो जाता है. इसलिए इंसान को नसें नीले रंग की नजर आती हैं.
नसों का रंग नीला क्यों होता है?