नॉर्मल डिलीवरी (सामान्य प्रसव) के लिए 11 टिप्स:
नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ाने वाले कारक
नीचे हम कुछ ऐसे कारकों के बारे में बता रहे हैं, जो नॉर्मल डिलीवरी होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं :
अगर गर्भवती महिला की पहले नॉर्मल डिलीवरी हुई हो।
अगर गर्भवती महिला को किसी तरह की शारीरिक बीमारी (जैसे- अस्थमा आदि) न हो।
अगर गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु का वजन सामान्य हो।
अगर गर्भवती महिला गर्भावस्था के दौरान किसी गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्या से ग्रस्त न हो।
अगर गर्भवती महिला गर्भावस्था के दौरान शारीरिक रूप से सक्रिय रहे।
अगर गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और खून में हिमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य हो
नॉर्मल डिलीवरी के संकेत और लक्षण
गर्भावस्था के 34वें सप्ताह से 36वें सप्ताह के बीच अगर भ्रूण का सिर नीचे की ओर आ जाए, तो यह नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ा देता है।
भ्रूण का सिर गर्भवती महिला की योनि पर दबाव डालता है, जिससे महिला को बार-बार पेशाब आता है। यह भ्रूण का नीचे आने का लक्षण हो सकता है।
अगर भ्रूण के नीचे की ओर आने से गर्भवती महिला को चलने-फिरने में परेशानी महसूस होने लगे, तो ये नॉर्मल डिलीवरी का लक्षण हो सकता है।
डिलीवरी का समय नजदीक आने पर गर्भवती महिला के गुदाद्वार की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं। इस कारण महिला को पतले मल की शिकायत हो सकती है। इसे नॉर्मल डिलीवरी का संकेत भी माना जा सकता है।
नार्मल डिलीवरी के लिए क्या क्या काम करना चाहिए?