अगर आप उन महिलाओं में से हैं जिनकी प्रेग्नेंसी बिलकुल शुरुआती स्टेज में हैं तो आपको इस दौरान अपना सबसे ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। जी हां, प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही यानी 1 से 12 हफ्ते का समय गर्भवती महिला और उसके होने वाले बच्चे के लिए सबसे अहम और मुश्किल होता है। इसकी वजह ये है कि इन शुरुआती 3 महीनों में ही सबसे ज्यादा मिसकैरिज का खतरा रहता है। आंकड़ों की मानें तो प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में गर्भपात का खतरा 85 प्रतिशत होता है और इसीलिए इस दौरान प्रेग्नेंट महिला को केयरफुल रहने की जरूरत होती है।
सेब के साइज का होता है आपका बच्चा
प्रेग्नेंसी के शुरुआती 3 महीने में ही बच्चे की सबसे ज्यादा ग्रोथ होती है। एक छोटी सी कोशिका वाले भ्रूण से आपका बच्चा इन 3 महीनों में बढ़ने लगता है। बच्चे के हाथ-पैर, बॉडी सिस्टम और ऑर्गन्स सब इसी दौरान बनने शुरू हो जाते हैं। यहां तक की इस समय तक ब्रेन का डिवेलपमेंट भी शुरू हो जाता है। हालांकि साइज की बात करें तो इस दौरान आपका बच्चा सिर्फ 4-5 इंच बड़ा और 30-40 ग्राम यानी एक सेब के साइज का होता है। बावजूद इसके बच्चे का नर्वस सिस्टम, जेनेटिक्स, शरीर के अहम अंग, बाल, हाथ-पैर, उंगलियां सब कुछ बनने शुरू हो जाते हैं।
हेल्दी ग्रोथ के लिए न्यूट्रिएंट्स का करें सेवन
चूंकि इस दौरान बच्चे के शरीर में इतने सारे बदलाव हो रहे होते हैं लिहाजा ये बेहद जरूरी है कि आप अपने बच्चे की हेल्दी ग्रोथ के लिए उसे सही पोषक तत्व देती रहें ताकि उसके विकास में किसी तरह की दिक्कत ना हो। न्यूट्रिएंट्स यानी पोषक तत्वों की कमी और किसी भी तरह के केमिकल्स की वजह से न सिर्फ बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है बल्कि गर्भपात का भी खतरा रहता है। ऐसे में शुरुआती 3 महीने में आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं, यहां जानें...
शुरुआती 3 महीने में क्या करें क्या नहीं
- घर का बना हुआ हेल्दी और फ्रेश खाना खाएं और बाहर की चीजें खाने से परहजे करें क्योंकि आपको पता नहीं कि उसमें किस तरह के हानिकारक रंग या अडिक्टिव्स पड़े हैं जो आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता हैं।
- बहुत की महिलाओं को इन शुरुआती 3 महीनों में बहुत उल्टी आती है और वो कुछ ठीक से खा नहीं पातीं। इसलिए एक बार में ज्यादा खाने की बजाए छोटे-छोटे पोर्शन्स में खाएं लेकिन बार-बार खाएं।
- जहां तक संभव हो हेल्दी और बैलेंस्ड डायट का सेवन करें और इस दौरान अपने कैलरी इनटेक के बारे में न सोचें क्योंकि आपको अपने वजन से ज्यादा इस वक्त बच्चे की सेहत के बारे में सोचना है।
- डॉक्टर की सलाह पर जरूरी फॉलिक ऐसिड और विटमिन सप्लिमेंट्स का भी सेवन करें।
- अच्छी नींद लें ताकि आपको थकान महसूस ना हो और आप हमेशा तरोताजा फील करें। खुद को बेवजह थकाने की जरूरत नहीं है। इस वक्त आराम ज्यादा जरूरी है।
- डॉक्टर से पूछे बिना किसी भी तरह की एक्सर्साइज शुरू न करें।
- स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, तंबाकू हर तरह की केमिकल वाली चीजों से पूरी तरह से दूर रहें।
- जिन जगहों पर वायु प्रदूषण का लेवल हाई हो वहां न जाएं और अगर कोई स्मोकिंग कर रहा हो तो उससे भी दूर रहें क्योंकि आपकी सांस के जरिए हानिकारक प्रदूषक तत्व बच्चे तक भी पहुंच सकते हैं।
- वैसे तो कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल न करना ही सेफ होगा लेकिन अगर आप चाहें तो नैचरल और हर्बल कॉस्मेटिक्स यूज कर सकती हैं जिसमें किसी तरह का कोई केमिकल ना हो।
प्रेग्नेंसी के बाद दिख रहे स्ट्रेच मार्क्स से हैं परेशान, इन नैचरल चीजों को करें यूज
जी हां, प्रेग्नेंसी के 13वें हफ्ते से लेकर 21वें हफ्ते के बीच स्ट्रेच मार्क्स उभरने शुरू होते हैं और हकीकत यही है कि आप इन स्ट्रेच मार्क्स से पूरी तरह से बच नहीं सकतीं। हालांकि इन्हें कम जरूर किया जा सकता है। आपको बता दें कि स्ट्रेच मार्क्स सिर्फ टमी के आसपास के हिस्से पर ही नहीं बल्कि थाईज यानी जांघ, हिप्स, पैरों का काफ वाला हिस्सा, आर्म्स और ब्रेस्ट पर भी हो सकते हैं। डॉक्टरों की मानें तो स्ट्रेच मार्क एक तरह से घाव का निशान है जो हमारी स्किन के बहुत जल्दी फैलने या सिकुड़ने की वजह से होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान अचानक बढ़े वजन की वजह से महिलाओं को स्ट्रेच मार्क्स हो जाते हैं। मार्केट में ढेरों क्रीम्स, ऑइल और ऑइंटमेंट बिक रहे हैं जो इस बात का दावा करते हैं कि इन्हें लगाने से स्ट्रेच मार्क्स नहीं होते या फिर पूरी तरह से दूर हो जाते हैं। लेकिन हम आपको बता रहे हैं उन नैचरल चीजों के बारे में जिनका इस्तेमाल कर आप स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पा सकती हैं और वो भी बिना किसी साइड इफेक्ट के
पहली तिमाही क्यों महत्वपूर्ण है?