ओवुलेशन की प्रक्रिया की शुरुआत शरीर में फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन यानी एफएसएच के रिलीज से होती है। ये मासिक चक्र के 6 से 14वें दिन के बीच होता है। एफएसएच ओवरी के अंदर अंडे को मैच्योर होने में मदद करता है ताकि वो आगे जाकर भ्रूण का रूप ले सके।
अंडे के मैच्योर होने पर शरीर में ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन यानी एलएच रिलीज होता है जो कि एग के रिलीज को ट्रिगर करता है। एलएच के बढ़ने के 28 से 36 घंटे के बाद ओवुलेशन शुरू हो सकता है।
क्या सिर्फ ओवुलेशन पीरियड में प्रेगनेंट हो सकते हैं
ऐसा नहीं है कि महिलाएं केवल ओवुलेशन पीरियड में ही गर्भधारण कर सकती हैं। एग रिलीज होने के 12 से 24 घंटे के अंदर ही फर्टिलाइज हो सकता है, स्पर्म कुछ विशेष स्थितियों में महिलाओं के प्रजनन मार्ग में 5 दिनों तक रह सकता है।
इसलिए अगर आप ओवुलेशन के दौरान या ओवुलेशन के दिन ही सेक्स करती हैं तो आप प्रेगनेंट हो सकती हैं।
ओवुलेशल में कितनी बार सेक्स करने से प्रेगनेंट होते हैं
प्रेगनेंट होने के लिए सिर्फ फर्टाइल विंडो के दौरान सेक्स करने की जरूरत होती है। फटाईल विंडो 6 दिन की होती है। इसमें ओवुलेशन वाला दिन और एग रिलीज होने के बाद स्पर्म के प्रजनन मार्ग में रहने वाले 6 दिन शामिल हैं। ये वही पीरियड होता है जब सेक्स करने से गर्भधारण हो सकता है।
बच्चे के लिए कोशिश कर रहे कपल्स को फर्टाइल विंडो के हर दिन या एक दिन छोड़कर एक दिन सेक्स करने से कंसीव करने की संभावना काफी बढ़ सकती है।
गर्भधारण करने के लिए ओवुलेशन वाला दिन और इसके बाद के दो दिन सबसे सही होते हैं।
अगर ओवुलेशन न हो तो
अगर आपको हर महीने समय पर पीरियड नहीं आ रहे हैं तो हो सकता है आपका ओवुलेशन अनियमित हो या कुछ मामलों में ऐसा भी हो सकता है कि ओवुलेशन हो ही नहीं रहा हो। इस स्थिति में आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
इसके अलावा तनाव और डायट का असर भी हर महीने के ओवुलेशन पर पड़ता है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या एमेनोरिया की वजह से भी ओवुलेशन अनियमित या पूरी तरह से बंद हो सकता है।
इन स्थितियों के कारण हार्मोनल असंतुलन, चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल आना, एक्ने और यहां तक कि बांझपन भी हो सकता है।
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