यूरिन करते समय जलन होती है और पेट में दर्द भी होता है। ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच करानी चाहिए और इसका इलाज शुरू करना चाहिए। कभी-कभी गर्भावस्था के समय हुए कब्ज या दस्त से भी पेल्विस पर जोर पड़ता है और काफी दर्द होता है।
पेल्विक गर्डल पेन का पता कैसे चलता है?
अगर आपको दर्द की शिकायत हो, तो डॉक्टर आपके श्रोणि क्षेत्र की जांच करेंगी। वे आपसे पूछेंगी कि आपको दर्द कब और कहां होता है।
ऐसी गतिविधियों को याद रखने का प्रयास करें जिनसे दर्द शुरु होता है, ताकि आप डॉक्टर को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे सकें।
कई बार पीजीपी को सियाटिका समझ लिया जाता है। अगर आप भी इसे लेकर शंका में हों, तो फिजियोथेरेपिस्ट को दिखाकर इसकी पुष्टि कर सकती हैं। हालांकि, यह सुनिश्चित कर लें कि आपके फिजियोथैरेपिस्ट को गर्भवती महिलाओं के उपचार का अनुभव हो।
श्रोणि करधनी दर्द का उपचार कैसे होता है?
अपनी डॉक्टर की सलाह का पालन करना, कुछ व्यायाम करना और अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करना श्रोणि करधनी दर्द के उपचार के मुख्य तरीके हैं:
डॉक्टर आपको फिजियोथेरेपिस्ट को दिखाने की सलाह देंगी। फिजियोथेरेपिस्ट आपको बताएंगी कि चलने या खड़े होने जैसी गतिविधियों के दौरान पीठ और श्रोणि क्षेत्र में दर्द होने से कैसे बचाव किया जाए।
फिजियोथेरेपिस्ट आपको श्रोणि क्षेत्र के आधार के लिए पट्टी (पेल्विक सपोर्ट बेल्ट) दे सकती है। बेल्ट से आपको दर्द से राहत मिल सकती है, विशेषकर जब आप सक्रिय व क्रियाशील हों।
व्यायाम, खासकर कि पेट, पेल्विक गर्डल, कूल्हे और श्रोणि क्षेत्र की मांसपेशियों के व्यायाम, ताकि आपके श्रोणि क्षेत्र और पीठ की स्थिरता में सुधार हो।
पानी में जिम जैसी एक्सरसाइज करने से भी दर्द से कुछ राहत मिल सकती है। मगर, यहां भी यही बात लागू होती है कि आपको विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए आयोजित कक्षाओं में ही शामिल होना चाहिए। हालांकि, हो सकता है ऐसी कक्षाएं आपके क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध न हों।
फिजियोथेरेपिस्ट आपके कूल्हे, पीठ या श्रोणि क्षेत्र को हल्के हाथों से दबा सकते हैं ताकि सख्त जगहों पर थोड़ी शिथिलता आए।
एक्यूपंक्चर से भी दर्द कम करने में मदद मिल सकती है और यह गर्भावस्था में सुरक्षित भी है। मगर आप ऐसे पेशेवर का चयन करें जिसे गर्भवती महिलाओं के उपचार का प्रशिक्षण और अनुभव हो।
टेन्स मशीन का इस्तेमाल भी सुरक्षित है और इससे भी मदद मिल सकती है। हालांकि, बहुत सी जगहों पर यह आसानी से उपलब्ध नहीं है। आप अपनी डॉक्टर से इस बारे में पूछें, शायद आप इसे ऑनलाइन खरीद पाएं।
अगर इन सब उपायों के बाद भी दर्द जारी रहे, तो आपकी डॉक्टर नियमित दर्द निवारक दवा पैरासिटामोल के सेवन की सलाह दे सकती हैं।
ध्यान रखें कि पीठ के निचले हिस्से में दर्द जैसी स्थितियों के लिए पैरासिटामोल अपने आप में प्रभावी दर्दनिवारक है, इस बारे में अधिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। अपनी डॉक्टर से पूछें कि कितनी पैरासिटामोल लेनी सही रहेगी और कितने समय तक। डॉक्टर आपको दर्दनिवारक दवाओं के मिश्रण या फिर कभी-कभार ज्यादा प्रबल दवाएं दे सकती हैं।
बिना डॉक्टरी पर्ची के मिलने वाली दवाएं या हर्बल उपचार डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। इनमें कुछ ऐसी सामग्रियां हो सकती हैं, जो गर्भस्थ शिशु के लिए सुरक्षित न हों।
जब आपको पेल्विक गर्डल पेन हो तो अपना ध्यान रखना बहुत जरुरी है। यदि आपको दर्द से राहत पाने के लिए दवाएं लेनी पड़ रही हैं, तो इसके लिए खुद को कसूरवार न मानें। यदि आपको निरंतर दर्द रहे, तो हो सकता है आपको ऐसा लगने लगे कि आप अब बाहर नहीं जा सकेंगी या पहले की तरह काम नहीं कर सकेंगी।
यदि पीजीपी की वजह से आपको अकेलापन या अवसाद (डिप्रेशन) सा लगने लगे, तो अपनी डॉक्टर को बताएं। शारीरिक तौर पर आपकी मदद करने के साथ-साथ वे आपको भावनात्मक तौर पर भी सहारा देंगी।
दर्द से राहत के लिए मैं क्या कर सकती हूं?
ऐसी चीजों पर ध्यान दें जो आपके श्रोणि क्षेत्र पर दबाव डालती हों:
जितना आप कर सकती हैं उतना सक्रिय रहें, मगर खुद पर इतना ज्यादा जोर भी न डालें कि आपको दर्द होने लगे। यदि किसी काम में आपको दर्द हो, तो वह छोड़ दें। यदि दर्द को बढ़ने दिया जाए, तो फिर इसे ठी होने में ज्यादा समय लग सकता है।
डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा बताई कई पेल्विक फ्लोर और पेट की एक्सरसाइज करें।
कामकाज के लिए दूसरों की मदद लें। भारी शॉपिंग बैग या पानी की बाल्टी उठाने से दर्द बढ़ सकता है।
पहले से योजना बनाएं ताकि ऐसी गतिविधियां आप कम से कम करें, जिनसे दर्द हो सकता है। आप घर में और बाहर भी चीजों को इधर-उधर लाने ले जाने के लिए पीठ वाले बैग का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे हिलने-डुलने पर आपका शारीरिक ढांचा एक सीध में रहता है।
अपनी टांगों को उतना ही फैलाएं, जितने तक दर्द न हो। खासतौर पर कार, बिस्तर या बाथटब में बैठते व उठते समय।
यदि संभव हो तो बिस्तर में करवट लेने के लिए आप हाथा और घुटनों का सहारा लें। या फिर अपने घुटनों को एक साथ मिलाकर और नितंबों को सिकोड़कर करवट लेने का प्रयास करें।
यदि आप लेटी हुई हैं, तो करवट लें, अपने घुटनों को एक साथ लाएं, अपनी टांगों को पलंग से नीचे हवा में रखें और बैठने का प्रयास करें।
कार में बैठते और उतरते समय अपने घुटनों को मिलाकर रखें। अपने नीचे घूमने वाला कुशन या प्लास्टिक बैग रखने से आपको अपनी टांगों को एक साथ उठाने में मदद मिलेगी। गाड़ी में बैठने के बाद प्लास्टिक बैग नीचे से हटा दें, ताकि ब्रेक लगने की स्थिति में आप फिसलें नहीं।
ऐसी गतिविधियों से दूर रहें जिनसे दर्द ज्यादा बढ़े या आपका श्रोणि क्षेत्र असमान अवस्था में आए, जैसे कि पालथी मारकर बैठना या अपने थोड़े बड़े बच्चे को कूल्हे पर उठाना। ऐसे व्यायाम न करें जिनमें उकड़ूं बैठना हो या टांगे फैलाना हो, क्योंकि इनसे कूल्हे में दर्द बढ़ सकता है।
अपनी टांगे मोड़कर और घुटनों के बीच तकिया लगाकर सोने का प्रयास करें। यह अवस्था आपके गर्भस्थ शिशु के लिए भी उचित है - तीसरी तिमाही में करवट लेकर सोने से मृतशिशु के जन्म का खतरा पीठ के बल सोने की तुलना में कम हो जाता है।
नियमित विश्राम करें या आमतौर पर खड़े होकर करने वाले काम अब बैठकर करें जैसे कि कपड़े प्रेस करना या खाना बनाना। जब भी संभव हो अपने हाथों और घुटनों के बल आ जाएं, ताकि श्रोणि क्षेत्र से गर्भस्थ शिशु का वजन हट जाए।
यदि आपको एसपीडी हो, तो आप बर्थ बॉल पर हल्का सा आगे की तरफ झुककर बैठ सकती हैं, ताकि सिम्फिसिस प्यूबिस जोड़ पर से दबाव कम हो सके।
कोशिश करें कि भारी सामान उठाएं या खिसकाएं नहीं। सुपरमार्केट में ट्रॉली को खींचने से अक्सर दर्द बढ़ सकता है, इसलिए हो सके तो ऑनलाइन खरीदारी करें, सामान की होम डिलीवरी करवाएं या किसी ओर से शॉपिंग के लिए कहें।
बेहतर है कि आप बार-बार सीढ़ियां चढें व उतरे नहीं। जब आपको सीढ़ियां चढ़नी पड़ें तो एक बार में एक ही कदम बढ़ाएं। जिस टांग में दर्द कम हो, उसे आगे बढ़ाएं और फिर दूसरी टांग को उसके पास लाएं। हर सीढ़ी ऐसे ही चढ़ें।
एक टांग पर खड़ी न हों। अपने कपड़े धीरे-धीरे और सावधानी से पहनें। अंडरवियर, सलवार, चूड़ीदार या पेंट को बैठकर पहनें।
प्रसव के लिए बर्थ पूल का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि पानी की वजह से आपके जोड़ों पर भार नहीं रहता और आप आसानी से हिल-डुल सकती हैं। हालांकि, यह विकल्प चुनिंदा अस्पतालों और मेटरनिटी सेंटर पर ही उपलब्ध है।
अगर आप नौकरीपेशा महिला हैं, तो आप नियोक्ता से अपने काम या काम के घंटों में बदलाव के बारे में बात कर सकती हैं।
दोस्त और परिवारजन आपको दर्द से राहत के लिए विशेष मालिश करवाने की सलाह भी दे सकते हैं। बहरहाल, किसी भी तरह की मालिश करवाने से पहले अपनी डॉक्टर से अवश्य बात करें।
हो सकता है कुछ मसाज थेरेपिस्ट या स्थानीय मालिशवालियों को नाजुक स्थितियों का सामना करने का ज्ञान व कौशल न हो। अगर मालिश सही तकनीक से न की जाए, तो इससे फायदे की बजाय नुकसान हो सकता है।
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