Google AdSense Header Slot

प्रसव के प्रकार?

Language: Hindi | Published: 05 Mar 2020 | Views: 7
प्रसव के प्रकार?
अलग-अलग प्रकार के प्रसव के तरीकों के बारे मे जानें
3 वर्ष पहले

गर्भावस्था माँ के लिए अनमोल होता है। इस दुनिया में एक बच्चे को लेकर आना एक बड़ा काम होता है। पूरे नौ महीने अपने गर्भ मे शिशु की देखभाल करने के बाद जब प्रसव का वक़्त आता है तो माँ के मन मे कई प्रकार की शंकाएँ उत्पन्न होने लगती हैं। यद्यपि बच्चे के जन्म के लिए एक सामान्य तरीका है, किन्तु चिकित्सा विज्ञान में प्रगति के साथ, प्रसव के कई प्रकार के तरीकों का विकास हुआ है ताकि उस वक़्त सामने आए किसी भी जटिलता या जोखिम का मुक़ाबला सफलता से किया जा सके। ऐसे मे अपने डॉक्टर से आपको प्रसव के विभिन्न प्रकार के विषय मे जानकारी लेनी चाहिए ताकि आपका मन शांत हो और आप निश्चिन्त रूप से प्रसव करने के लिए तैयार हो सकें।

1) जानिए : प्रसव के विभिन्न प्रकार

जब कोई महिला अपनी योनि से बच्चे को जन्म देती है तो उसे योनि प्रसव कहते हैं। यह प्रसव का आम रूप है। इस प्रकार के प्रसव मे महिला को किसी प्रकार की दवा की आवश्यकता नहीं होती। साथ ही इसमे बच्चे के जन्म का समय भी निश्चित नहीं होता है। योनि प्रसव के लाभ:

कम समय के लिए अस्पताल मे रहना होता है
कम संक्रमण दर
महिला जल्दी ठीक हो जाती है

अधिकाँश लोग योनि प्रसव और प्राकृतिक प्रसव, दोनों को एक ही समझते हैं। मगर, इन दोनों में थोड़ा अंतर है। योनि प्रसव में सामान्य दवाइयों, मेडिकल उपरकरण या अन्य चिकित्साई सहायता से प्रसव कराया जाता है, जबकि प्राकृतिक प्रसव में यह प्रयास किया जाता है कि शरीर को विभिन्न मुद्रा या अभ्यास के जरिए ही प्रसव कराया जाय।

इस प्रकार के प्रसव मे अलग अलग शारीरिक मुद्रा और व्यायाम को अपनाया जाता है। इस प्रकार के प्रसव को किसी जानकार नर्स द्वारा घर पर या अस्पताल मे भी कराया जाता है। इसमे सारी तैयारियां पहले से कर के रखनी होती हैं। इसमे प्रसव के तुरंत बाद माँ और बच्चे को एक दूसरे का स्पर्श (स्किन-टू-स्किन टच) दिया जाता है।

वास्तविक जीवन में सबकुछ तय योजना के अनुसार नहीं होता है। हर कोई योनि प्रसव करना चाहता है लेकिन कभी-कभी आपको जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामले में सीज़ेरियन डिलीवरी एक अच्छा विकल्प है। इस प्रसव में, बच्चे को मां के पेट से शल्य चिकित्सा के जरिए गर्भाशय को खोलकर प्रसव कराया जाता है। सी-सेक्शन की आवश्यकता निम्नलिखित परिस्थितियों में हो सकती है:

एकाधिक गर्भ (जुड़वां, तिहरा, आदि)
शिशु का बड़ा आकार
पहला बच्चा शल्य चिकित्सा, सी-सेक्शन, या गर्भाशय की अन्य जटिलताओं के कारण
गर्भ में शिशु की गलत जगह में होने से
किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के कारण

पानी में जन्म एक पानी के टैंक या बर्थिंग पूल का उपयोग करके पानी में शिशु जन्म देने की प्रक्रिया है। इस दौरान माँ को पानी में बैठाकर प्रसव का प्रयास किया जाता है। इस प्रक्रिया के पानी में होने से प्रसव के दर्द से आराम मिलत है और पानी में होना ज्यादा सुखदायक होता है। पानी आपके वजन को थामने में मदद कर सकता है, जिससे शरीर पर अधिक नियंत्रण महसूस होता है। यदि आपकी गर्भावस्था स्वस्थ हैं और आपकी डॉक्टर का यह मानना है कि यह आपके और आपके बच्चे के लिए सुरक्षित है, तो पानी का जन्म देना आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

फोरसेप्स प्रसव ऑपरेटिव योनि डिलीवरी का ही एक प्रकार है। योनि प्रसव के दौरान कभी-कभी इसकी आवश्यकता होती है। फोरसेप्स प्रसव में, डॉक्टर जन्म योनी से बाहर आने के लिए बच्चे को एक फोर्सप (बड़े चिमटे जैसा उपकरण) के जरिए सहायता प्रदान करता है।

वैक्यूम निष्कर्षण का उपयोग भी योनि प्रसव के दौरान कभी-कभी किया जाता है। इसमें प्रसव के दौरान, एक डॉक्टर बच्चे के सिर पर वैक्यूम निष्कर्षण लगा कर बच्चे को योनि से बाहर निकालने में मदद करता है। इसके लिए वैक्यूम (वैक्यूम पंप जैसा उपकरण) का उपयोग किया जाता है। वैक्यूम के आखिर में एक मुलायम कप होता है जो बच्चे के सिर के ऊपर लगाया जाता है। इसके सहारे बच्चे को बाहर आने मे मदद दी जाती है।

विभिन्न प्रकार के प्रसव तकनीकों के अपने फायदे और नुकसान होते हैं। अधिकाँश मसलों में यह स्वयं के नियंत्रण में नहीं होता की कौन सा प्रसव का तरीका अपनाया जायेगा और परिस्तिथि के अनुसार और डॉक्टर की सलाह से प्रसव का तरीका बदल भी सकता हैं। इसलिए, सभी तरीको के बारे में जान लेने से आप प्रसव के समय संदेह-रहित रह सकेंगी।
Share this article:

Facebook | Twitter | WhatsApp