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प्रसव के बाद आयुर्वेदिक दवा?

Language: Hindi | Published: 01 Jul 2021 | Views: 17
प्रसव के बाद आयुर्वेदिक दवा?
आयुर्वेद के अनुसार डिलीवरी के बाद जापे में ऐसे करनी चाहिए मां की देखभाल
आयुर्वेद द्वारा बताए गए नियमों का पालन करके आप हर हाल में स्‍वस्‍थ और निरोगी रह सकते हैं, इसलिए आज हम आपको डिलीवरी के बाद आयुर्वेदिक नियमों की मदद से स्‍वस्‍थ रहने के तरीकों के बारे में बता रहे हैं।

डिलीवरी के बाद शरीर पूरी तरह से टूट जाता है। मांसपेशियां, हड्डियां और शरीर का हर एक अंग दर्द और कमजोरी महसूस करता है। यही वजह है कि डिलीवरी के बाद और जापे के दौरान महिलाओं की अच्‍छी तरह से देखभाल करना जरूरी होता है।

आयुर्वेद में भी यही कहा गया है कि प्रसव के बाद महिलाओं की देखभाल बहुत महत्‍वपूर्ण होती है। आयुर्वेद में त्रिदोष यानी वात, पित्त और कफ का जिक्र किया गया है और डिलीवरी के दौरान वात दोष में बहुत खराबी आ जाती है और इसकी वजह से त्‍वचा में रूखापन, पेट फूलने, कब्‍ज, जोड़ों में दर्द और शरीर में सूजन आ जाती है। ऐसे में शरीर के अंदर वात दोष को संतुलित करने के लिए कुछ जरूरी उपाय किए जा सकते हैं।


गर्म पानी से नहाना
गर्म पानी से नहाने से बदन दर्द और तनाव से राहत मिलती है। पोस्‍टपार्टम ही नहीं, बल्कि पीरियड्स वगैरह में पेट दर्द या मांसपेशियों के दर्द को कम करने से भी गर्म पानी उपयोगी साबित हो सकता है।
जापे के पहले तीन दिनों में पिएं कांसा तप, पूरे शरीर की गंदगी होगी साफ

10 चम्‍मच अजवाइन और बूरा लेनी है (अजवाइन की मात्रा से आधी से ज्‍यादा)। इस रेसिपी में आपको इतना घी लेना है कि अजवाइन और बूरा को मिलाने पर सामग्री थोड़ी पतली बने।

अब जानते हैं कि घर पर जापे के लिए कांसा तप कैसे बना सकते हैं :
सबसे पहले अजवाइन को मिक्‍सी में पीस लें।अजवाइन को बारीक पीसें क्‍योंकि डिलीवरी के बाद मोटी अजवाइन चबाने में दिक्‍कत हो सकती है।अब एक समतल तले वाले बर्तन में अजवाइन के पाउडर को डालें।इसके बाद अजवाइन पाउडर में बूरा को डाल दें।बूरा और अजवाइन को एक सा‍थ मिला लें।

घी को अच्‍छी तरह से गर्म कर लें।थोड़ा-थोड़ा कर के घी को पाउडर में डालना है।घी इतनी मात्रा में डालना है कि पतला पेस्‍ट तैयार हो जाए।मिश्रण सहित इस समतल बर्तन को पेड़ू पर यानि पेट के नीचे वाले हिस्‍से पर रखें।इससे पेट की सिकाई होती रहेगी।इतने मां आधी-आधी चम्‍मच करते हुए इस मिश्रण को खाती रहे।


डिलीवरी के बाद शरीर की सारी गंदगी बाहर निकल जाती है। ऐसा कहा जा सकता है कि कांसा तप डिलीवरी के बाद बॉडी को डिटॉक्सिफाई करता है।

प्रसव के बाद मां का दूध गाढ़ा होता है जिसे स्‍तनों से खींचने में शिशु को दिक्‍कत होती है। कांसा तप लेने से मां का दूध पतला होता है जिससे बच्‍चा आसानी से ब्रेस्‍ट से दूध को खींच पाता है।

कभी-कभी बच्‍चे को दूध पचता नहीं है जिसकी वजह से दूध पीते ही बच्‍चा उल्‍टी कर देता है या उसे पेट दर्द होने लगता है। मां के कांसा तप पीने से बच्‍चे का पाचन ठीक होता है और उसे इस तरह की दिक्‍कतें कम आती हैं।

आप कांसा तप जिस बर्तन में बना रहे हैं, उसका बेस समतल यानि चौड़ा होना चाहिए।कांसा तप को सीधा पेट पर न रखें बल्कि पहले पेट पर कोई सूती कपड़ा रखें और फिर उसके ऊपर कांसा तप रखें।कपड़ा इतना मोटा होना चाहिए कि उसकी गरमाई से न तो स्किन जले और स्किन पर्याप्‍त गरमाई भी पहुंच सके।इसे नाभि के नीचे वाले हिस्‍से पर रखना है।इसकी दिनभर में 8 से 10 चम्‍मच खा सकते हैं। खाने से शरीर अंदर से साफ होता है और सिकाई से शारीरिक दर्द दूर होता है।

इससे शरीर रिलैक्‍स महसूस करता है और टांकों को भी भरने में मदद मिलती है। नहाने के बाद टांके वाली जगह को आराम से सुखाएं, जिससे कि वहां पर संक्रमण और पस बनने का खतरा न रहे।
पोस्‍टपार्टम बेल्‍ट पहनें
आयुर्वेद के अनुसार, बेल्ट पहनने से पेट को सपोर्ट मिलता है। डिलीवरी के बाद वात दोष के बढ़ने के कारण पेट में हवा भर जाती है।
आयुर्वेद की मानें तो पोस्‍टपार्टम बेल्ट की मदद से पेट का साइज कम करने में तो मदद मिलती ही है, साथ ही पेट की परत की मांसपेशियां भी ढीली होती हैं, जिससे मजबूती और संतुलन आता है। इससे कमर दर्द भी कम हो सकता है, लेकिन इस बेल्ट को ज्‍यादा टाइट न बांधें।
जापे के पहले तीन दिनों में पिएं कांसा तप, पूरे शरीर की गंदगी होगी साफ

10 चम्‍मच अजवाइन और बूरा लेनी है (अजवाइन की मात्रा से आधी से ज्‍यादा)। इस रेसिपी में आपको इतना घी लेना है कि अजवाइन और बूरा को मिलाने पर सामग्री थोड़ी पतली बने।

अब जानते हैं कि घर पर जापे के लिए कांसा तप कैसे बना सकते हैं :
सबसे पहले अजवाइन को मिक्‍सी में पीस लें।अजवाइन को बारीक पीसें क्‍योंकि डिलीवरी के बाद मोटी अजवाइन चबाने में दिक्‍कत हो सकती है।अब एक समतल तले वाले बर्तन में अजवाइन के पाउडर को डालें।इसके बाद अजवाइन पाउडर में बूरा को डाल दें।बूरा और अजवाइन को एक सा‍थ मिला लें।

घी को अच्‍छी तरह से गर्म कर लें।थोड़ा-थोड़ा कर के घी को पाउडर में डालना है।घी इतनी मात्रा में डालना है कि पतला पेस्‍ट तैयार हो जाए।मिश्रण सहित इस समतल बर्तन को पेड़ू पर यानि पेट के नीचे वाले हिस्‍से पर रखें।इससे पेट की सिकाई होती रहेगी।इतने मां आधी-आधी चम्‍मच करते हुए इस मिश्रण को खाती रहे।

डिलीवरी के बाद शरीर की सारी गंदगी बाहर निकल जाती है। ऐसा कहा जा सकता है कि कांसा तप डिलीवरी के बाद बॉडी को डिटॉक्सिफाई करता है।

प्रसव के बाद मां का दूध गाढ़ा होता है जिसे स्‍तनों से खींचने में शिशु को दिक्‍कत होती है। कांसा तप लेने से मां का दूध पतला होता है जिससे बच्‍चा आसानी से ब्रेस्‍ट से दूध को खींच पाता है।

कभी-कभी बच्‍चे को दूध पचता नहीं है जिसकी वजह से दूध पीते ही बच्‍चा उल्‍टी कर देता है या उसे पेट दर्द होने लगता है। मां के कांसा तप पीने से बच्‍चे का पाचन ठीक होता है और उसे इस तरह की दिक्‍कतें कम आती हैं।

आप कांसा तप जिस बर्तन में बना रहे हैं, उसका बेस समतल यानि चौड़ा होना चाहिए।कांसा तप को सीधा पेट पर न रखें बल्कि पहले पेट पर कोई सूती कपड़ा रखें और फिर उसके ऊपर कांसा तप रखें।कपड़ा इतना मोटा होना चाहिए कि उसकी गरमाई से न तो स्किन जले और स्किन पर्याप्‍त गरमाई भी पहुंच सके।इसे नाभि के नीचे वाले हिस्‍से पर रखना है।इसकी दिनभर में 8 से 10 चम्‍मच खा सकते हैं। खाने से शरीर अंदर से साफ होता है और सिकाई से शारीरिक दर्द दूर होता है

तेल से स्‍नान
जापे के 40 दिनों में आपको ऑयल बाथ जरूर लेना है। यहां तक कि जापे के बाद भी हफ्ते में एक या दो बार ऑयल बाथ लेना जारी रखें। इससे मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूती मिलती है और त्‍वचा की रंग में निखार आता है एवं शरीर को पोषण मिलता है। तेल मालिश के बाद गर्म पानी से नहाने से पूरे शरीर को ताकत मिलती है। नारियल तेल से रोज मालिश करने पर धीरे-धीरे स्‍ट्रेच मार्क्‍स भी गायब हो जाते हैं और रूखी त्‍वचा को पोषण मिलता है।

हर हाल में करें आराम
डिलीवरी के बाद महिलाओं का शरीर कमजोर हो जाता है और इस हालत में भी उन्‍हें बच्‍चे को दूध पिलाना होता है। डिलीवरी के बाद शुरुआती महीनों में तो चैन की नींद तक नहीं मिल पाती है और नींद की कमी से तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है। ऐसे में बेहतर होगा कि शिशु के सोने पर आप भी झपकी ले लें।

आयुर्वेद के अनुसार डाइट कैसी हो
अपनी डाइट में हल्‍दी, अदरक, धनिया, जीरा और सौंफ जैसे मसालों को शामिल करें। अभी दाल ज्‍यादा न खाएं क्‍योंकि इनकी वजह से गैस बन सकती है। अभी आपको और शिशु को कैल्शियम की बहुत जरूरत है इसलिए दिन में दो से तीन गिलास दूध पिएं। घी और हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं। ज्‍यादा से ज्‍यादा पानी पिएं।
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