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प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में क्या क्या होता है?

Language: Hindi | Published: 11 Nov 2022 | Views: 41
प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में क्या क्या होता है?
गर्भावस्था का दूसरा महीना शुरू होते ही शरीर में कई तरह के बदलाव नजर आने लगते हैं। बेशक, पहली बार गर्भवती महिला के लिए ये बदलाव कुछ परेशानी भरे हो सकते हैं, लेकिन इनका अनुभव भी अपने आप में खास होता है, क्योंकि मां बनने के सुखद अहसास की ओर यह दूसरा कदम जो है।

मॉमजंक्शन के इस लेख में हम गर्भावस्था के दूसरे महीने यानी पांचवें से आठवें सप्ताह के बारे में चर्चा करेंगे। दूसरे महीने में क्या-क्या लक्षण नज़र आते हैं, शरीर में क्या बदलाव होते हैं, इस दौरान क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए, ऐसे तमाम पहलुओं के बारे में हम विस्तार से बताएंगे।
गर्भावस्था के दूसरे महीने के लक्षण |
गर्भावस्था के दूसरे महीने में शरीर में हार्मोन्स बदलने लगते हैं। हालांकि, इस महीने के कुछ लक्षण पहले महीने जैसे ही होते हैं, लेकिन इसी के साथ कुछ नए लक्षण भी नज़र आते हैं। ये कुछ इस प्रकार के हो सकते हैं :

अगर आपकी ब्रा टाइट होने लगी है, तो घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ऐसा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ने से हो रहा है। इन हार्मोन्स के कारण स्तन का आकार बढ़ने लगता है। इसके अलावा, निप्पल के आसपास का भाग कड़ा हो सकता है।

हार्मोन्स में बदलाव के कारण स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है।

आपको मॉर्निंग सिकनेस हो सकती है, जिसमें जी मिचलना, चक्कर आना व उल्टी आने जैसा अहसास होगा।



प्रेग्नेंसी के दूसरे महीने में शरीर में होने वाले बदलाव

इस महीने आपका गर्भाशय बढ़कर एक संतरे के आकार का हो जाता है।

आपको बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है। ऐसा गर्भाशय के फैलने के कारण होता है।

थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाने का मन करता है। वहीं कुछ महिलाओं को फर्स्ट ट्राइमेस्टर के दौरान भूख बहुत कम लगने लगती है, जिससे उनका वजन भी कम हो जाता है।

योनि में दर्द, खुजली व उससे हल्का रक्त आ सकता है। ब्लीडिंग होने पर अपनी गायनो से जरूर परामर्श लें।

शारीरिक बदलाव होने के कारण सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है।

आपका वज़न पहले से थोड़ा बढ़ने लगता है। कुछ महिलाओं का वजन कम होने लगता है। क्योंकि इस दौरान उल्टी और जी मिचलाने की शिकायत होना आम बात है। मॉर्निंग सिकनेस की वजह से महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान कम खाना खाती हैं, जिससे उनका वजन कम होने लगता है।

इस दौरान कई चीजोंं की गंध पसंद नहीं आती। अब किसे, कौन सी गंध परेशान करती है, यह हर गर्भवती महिला का अपना अलग अनुभव होता है।

इस दौरान सीने में जलन भी हो सकती है।



गर्भावस्था के दूसरे महीने में बच्चे का विकास और आकार

गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के बारे में जानना बेहद सुखद अनुभव है। हर मां अपने होने वाले बच्चे के विकास को महसूस करती है और उसे समझती है। जानिए गर्भावस्था के दूसरे महीने में बच्चे का विकास कैसे होता है और उसका आकार कितना होता है:

दूसरे महीने में भ्रूण का आकार करीब 1 इंच का हो जाता है (1) और उसका वज़न करीब 14 ग्राम तक हो सकता है।

इस महीने तक भ्रूण का हृदय काम करना शुरू कर देता है और दिमाग भी विकसित होने लगता है।(1)

आंख, नाक, होंठ, लिवर और कान बनने शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा दांत बनने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है।



गर्भावस्था के दूसरे महीने में देखभाल

गर्भावस्था हर महिला के लिए एक नाज़ुक दौर है। इस दौरान गर्भवती का विशेष ध्यान रखना होता है, ताकि वह एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सके। यहां हम आपको बता रहे हैं कि गर्भवती की दूसरे महीने में कैसी देखभाल करनी चाहिए।



गर्भावस्था के दूसरे महीने में क्या खाना चाहिए? |

फोलेट से भरपूर खाद्य पदार्थ: फोलेट यानी फोलिक एसिड विटामिन-बी का एक प्रकार है, जो गर्भावस्था के शुरुआती चरण में लेना जरूरी है। यह शिशु की रीढ़ की हड्डी और दिमागी विकास के लिए जरूरी है। इसके लिए आप पालक, हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स, बींस, चिकन, मांस व साबुत अनाज का सेवन कर सकती हैं। (3) इसके अलावा, डॉक्टर आपको जरूरत के अनुसार फोलिक एसिड के अनुपूरक भी दे सकते हैं।

आयरन युक्त भोजन: आयरन शरीर के लिए बहुत जरूरी है। गर्भावस्था में आयरन की कमी से एनीमिया की शिकायत हो सकती है। इसके लिए आप सेब, पालक व हरी पत्तेदार सब्जियां खा सकती हैं। गर्भावस्था में केवल आयरन युक्त भोजन ही काफ़ी नहीं है, इसलिए डॉक्टर आपको आयरन के अनुपूरक भी दे सकते हैं। ज्यादातर तीसरे महीने के बाद डॉक्टर आयरन और कैल्शियम सप्लीमेंट रिकमेंड करते हैं।

कैल्शियम युक्त भोजन: गर्भावस्था के दूसरे महीने में कैल्शियम की ज़रूरत बढ़ जाती है, क्योंकि इस दौरान शिशु की हड्डियां सख्त होनी शुरू जाती हैं। इसके लिए आप डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही, पनीर आदि का सेवन कर सकती हैं।

प्रोटीन युक्त भोजन: इस दौरान प्रोटीन की संतुलित मात्रा लेना ज़रूरी है। दालें, दूध व अंडे जैसी चीजोंं में प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है।



गर्भावस्था के दूसरे महीने में क्या नहीं खाना चाहिए?

कुछ चीज़ें ऐसी भी हैं, जिनका सेवन आपको नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं गर्भावस्था के दूसरे महीने के दौरान क्या नहीं खाना चाहिए :

कच्चा मांस: इस दौरान कच्चा मांस खाने से बचें। इसमें लिस्टेरिया नामक बैक्टीरिया होता है, जो शिशु के विकास में बाधा पहुंचाता है।

सॉफ्ट चीज़: दूसरे महीने में सॉफ्ट चीज़ खाने से बचें, इससे बच्चे और मां दोनों को नुकसान हो सकता है।

शराब व तंबाकू: गर्भावस्था के दौरान शराब व तंबाकू का सेवन करना मां व शिशु दोनों के लिए हानिकारक है।

कच्चे अंडे: इस दौरान कच्चा अंडा न खाएं। कच्चे अंडे के सेवन से साल्मोनेला संक्रमण का खतरा हो सकता है। इस संक्रमण से गर्भवती को उल्टी और दस्त लग सकते हैं।

उच्च स्तर मर्करी वाली मछली: इस तरह की मछलियां खाने से बचना चाहिए। स्पेनिशमैकेरेल, मार्लिनयाशार्क, किंगमैकेरेल औरटाइलफिशजैसी मछलियों में मर्करी का स्तर ज़्यादा होता है। इनसे भ्रूण के विकास में बाधा आती है।

गैर पाश्चराइज्ड दूध: गर्भावस्था में गैर पाश्चराइज्ड दूध नहीं पीना चाहिए। इसमें लिस्टेरिया नामक बैक्टीरिया होता है, जिससे गर्भपात और समय पूर्व प्रसव का ख़तरा बढ़ सकता है। (4)



गर्भावस्था के दूसरे महीने के लिए व्यायाम

गर्भावस्था के शुरुआती समय में योग और व्यायाम काफ़ी फ़ायदेमंद रहते हैं। आप एक सही प्रशिक्षक की निगरानी में रहकर व्यायाम करें। शुरुआत में हल्के व्यायाम करें और इसे रोज़ाना 30 मिनट तक करने की कोशिश करें। आप यहां बताए व्यायाम दूसरे महीने के दौरान कर सकती हैं :

तकरीबन 20 मिनट रोज़ाना सैर करने की कोशिश करें।

आप चाहें तो कुछ देर के लिए तैराकी भी कर सकती हैं।

वेट ट्रेनिंग जैसे व्यायाम कर सकती हैं।

इसके अलावा अनुलोम-विलोम व ध्यान लगाने जैसे योग आपके लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकते हैं।

ध्यान रहे कि कमर के बल मुड़ने वाले और पेट मोड़ने वाले व्यायाम करने से बचें।

नोट : कोई भी व्यायाम करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से परामर्श आवश्य लें।



गर्भावस्था के दूसरे महीने के दौरान स्कैन और परीक्षण

खान-पान व व्यायाम करने के अलावा गर्भवती के लिए ज़रूरी है कि वह समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाए। डॉक्टर हर महीने निम्नलिखित जांच करते हैं :

यूरिन टेस्ट

शुगर की जांच: इसके जरिए पता किया जाता है कि शुगर का स्तर सही है या नहीं।

प्रोटीन टेस्ट: इसमें किडनी व उच्च रक्तचाप की जांच की जाएगी।

रक्त जांच

हिमोग्लोबिन और आयरन के स्तर की जांच की जाएगी।

गर्भवती महिला को कहीं कोई संक्रमण तो नहीं है, इसकी जांच की जाएगी।

साथ ही गर्भवती के वज़न की जांच भी की जाएगी।



गर्भावस्था के दूसरे महीने के दौरान सावधानियां

गर्भावस्था में आपको क्या करना है और क्या नहीं करना, इसकी जानकारी रखना ज़रूरी है।



गर्भावस्था के दूसरे महीने में क्या करें?

ज़्यादा से ज़्यादा आराम करें। यह होने वाले शिशु और गर्भवती दोनों के लिए अच्छा है।

खूब तरल पदार्थ का सेवन करें और खुद को हाइड्रेट रखें।

डॉक्टर की सलाह से फोलिक एसिड और अन्य अनुपूरक लेते रहें।

फल और सब्जियों को खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोएं और उनका छिल्का हटाकर खाएं।

एक बार में भोजन करने की जगह दिनभर में थोड़ा-थोड़ा और कई बार खाएं। इससे खाना पचाने में आसानी होगी।

इस महीने में स्तनों में भारीपन आना शुरू हो जाता है, इसलिए सपॉर्टिव ब्रा पहनना शुरू कर सकती हैं।

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