भारत में काले और गोरे रंग पर बहुत चर्चा होती है। कहते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान काली चीजें खाने से बच्चे का रंग काला हो जाता है।
आपने भी प्रेगनेंट होने के बाद ऐसी कई चीजों के बारे में सुना होगा जिन्हें खाने से गर्भवती मां के बच्चे का रंग काला हो सकता है। माना जाता है कि प्रेग्नेंसी में काले जामुन खाने से भी महिला के गर्भस्थ शिशु का रंग काला हो सकता है।
आगे हम यही जानेंगे कि क्या सच में गर्भावस्था में जामुन खाने से बच्चे का रंग काला हो जाता है।
कैसे बनता है बच्चे का रंग
प्रेग्नेंसी में मेलानिन नामक हार्मोन बनता है। जब गर्भवती महिला के शरीर में मेलानिन का लेवल बढ़ जाता है, तब गर्भस्थ शिशु का रंग प्रभावित हो सकता है। वैसे तो माता-पिता के जीन्स पर बच्चे का रंग निर्भर करता है लेकिन कुछ मामलों में इसका उल्टा भी हो जाता है।
गर्भावस्था में पर्याप्त मात्रा में आयरन लेना जरूरी होती है वरना प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद भी एनीमिया का खतरा रहता है। वहीं बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए भी आयरन जरूरी होता है। लेकिन अगर गर्भवती महिलाएं ज्यादा आयरन खा लेती हैं, तो इसका असर शरीर के हार्मोनल स्तर पर पड़ता है और यह शिशु के रंग को प्रभावित करता है। ज्यादा आयरन वाली चीजें खाने से भी बच्चे के रंग पर असर पड़ सकता है इसलिए प्रेग्नेंसी में सीमित मात्रा में ही आयरन लें।
जामुन के बारे में क्या है कहना
कहते हैं कि जामुन एक ऐसा फल है जिसे खाने से गर्भवती मां का बच्चा काला पैदा हो सकता है। इस बात को साबित करने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है।
दिल्ली के लाजपत नगर में रिजॉयस अस्पताल की गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर सोनिया चावला कहती हैं कि बच्चे का रंग मां-बाप के रंग पर ही निर्भर करता है। बच्चे का रंग या तो मां पर जाएगा या फिर पिता पर।
डॉक्टर सोनिया बताती हैं कि कोई भी फल खाने से शिशु का रंग नहीं बदलता है और यह सिर्फ एक मिथ्या है।
आपने ये तो सुना ही होगा कि प्रेग्नेंसी में केसर का दूध पीने से बच्चा गोरा पैदा होता है। अमूमन हर इंसान इस बात पर भरोसा करता होगा। इसी तरह जामुन के बारे में भी कहा जाता है कि यह बच्चे के रंग पर असर डालता है। इस बात को साबित करने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण न होने के बावजूद भी आपको रिस्क नहीं लेना चाहिए।
प्रेग्नेंसी में आप जो भी कुछ खाएंगी, उसका सीधा असर बच्चे पर पड़ेगा इसलिए बेहतर होगा कि आप ऐसी चीजें न खाएं जो बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती हों।
हालांकि, जामुन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं इसलिए आप कुछ मात्रा में इनका सेवन जरूर कर सकती हैं।
दिन में दो बार से ज्यादा जामुन न खाएं और दो कटोरी जामुन ही खाएं। इससे कम मात्रा में भी खाएंगी, तो अच्छा होगा।
प्रेगनेंसी में क्या खाने से बच्चा काला होता है?