यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं का दावा है कि गर्भावस्था के दौरान पेरासिटामोल के सेवन से गर्भस्थ शिशु के दिमाग के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और बच्चे को एडीएचडी जैसे मानसिक रोग होने की आशंका अधिक हो जाती है।
जो महिलाएं अधिक समय तक इस पेनकिलर का सेवन करती हैं उनके शिशु को यह रिस्क तीन गुना अधिक होता है।
उनका मानना है कि गर्भास्था के दौरान तकरीबन आधा से अधिक गर्भवती महिलाएं इस दवा का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के करती हैं।
शोध में पाया गया कि पेरासिटामोल के अधिक सेवन से हाइपरएक्टिविटी से जुड़ी बीमारियों का रिस्क अधिक हो जाता है। इतना ही नहीं, यह गर्भ में पल रहे शिशु के शरीर में हार्मोनल असंतुलन भी पैदा कर सकता है जिससे उसका मानसिक विकास प्रभावित होता है।
हालांकि इस मामले में ब्रिटेन के एनएचएस ने पेरासिटामोल के इस नुकसान को पर्याप्त वैज्ञानिक तथ्यों के न होने के आधार पर खारिज किया है।
प्रेगनेंसी में टेबलेट खाने से क्या होता है?