गर्भावस्था
इंप्लांटेशन(implantation) ब्लीडिंग-
प्रेग्नेंसी की शुरुआत में आपको हल्की ब्लीडिंग हो सकती है, लेकिन इससे कोई नुकसान नहीं है। इसे 'स्पॉटिंग' (spotting) कहते हैं। ऐसा तब होता है, जब बढ़ता हुआ भ्रूण खुद को आपकी कोख की दीवारों में प्रत्यारोपित करता है। इस तरह की ब्लीडिंग अक्सर उस समय के आसपास होती है, जब आपके पीरियड का समय होने वाला होता है।
सर्विकल (cervical) बदलाव-
प्रेग्नेंसी से सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) में बदलाव हो सकता है और इसकी वजह से कभी-कभी ब्लीडिंग हो सकती है। उदाहरण के लिए- यौन संबंध बनाने के बाद।
गर्भपात या एक्टोपिक प्रेग्नेंसी
गर्भावस्था के शुरुआती 12 हफ्तों के दौरान योनि से रक्तस्राव होना गर्भपात या एक्टोपिक प्रेग्नेंसी(ectopic pregnancy) का संकेत हो सकता है। हालांकि, कई महिलाएं, जिन्हें गर्भावस्था के इस पड़ाव पर ब्लीडिंग होती है, वे सामान्य होती हैं और सफलतापूर्वक गर्भवती होती हैं।
प्रेगनेंसी में ब्लड आने का क्या मतलब होता है?