मां बनने के दौरान शरीर में कई तरह की जटिलताएं आती हैं. जब आप प्रेग्नेंट होती हैं तो इस बात की आशंका हमेशा बनी रहती है कि आपमें खून की कमी या एनीमिया हो सकता है। दरअसल, जब एनीमिया होती है तो हेल्दी ब्लड सेल्स नहीं बनते. यानी ब्लड सेल्स में हीमोग्लोबिन की मात्रा बहुत कम हो जाती है. चूंकि हीमोग्लोबिन ही ऑक्सीजन को शरीर के सभी अंगों तक पहुंचाता है, इसलिए ऑक्सीजन को आपके शरीर के विभिन्न अंगों और बच्चे तक पहुंचने में दिक्कत होती है. प्रेग्नेंसी के दौरान बॉडी खून को ज्यादा बनाती है ताकि बच्चे का विकास हो सके. वेबएमडी के मुताबिक जब शरीर में आइरन या अन्य पोषक तत्वों की कमी हो जाती है तो खून का बनना भी कम हो जाता है. प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में हीमोग्लोबिन यानी HB का लेवल ज्यादा होना चाहिए. प्रेग्नेंट महिलाओं में हीमोग्लोबिन का लेवल 12 से कम नहीं होना चाहिए. अगर 11 से कम हो तो इसका मतलब है कि आपको एनीमिया है. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो मां और बच्चे दोनों की सेहत को खतरा हो सकता है.
विज्ञापन
हीमोग्लोबिन कमी के लक्षण क्या हैं
प्रेग्नेंसी के दौरान अगर शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाए तो सबसे ज्यादा थकान रहती है.
घबराहट और कमजोरी महसूस होती है. .
त्वचा, होंठ और नाखून पीले पड़ने लगते हैं.
कभी-कभी चक्कर भी आने लगता है.
सांस लेने में कभी-कभी दिक्कत हो सकती है, सांस फूलने लगता है.
दिल की धड़कन तेज हो सकती है.
किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है.
प्रेग्नेंसी के सातवें महीने में हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए?