नौंवे महीने में डिलीवरी के लिए बच्चे का सिर नीचे जन्म नलिका की ओर और पैर ऊपर पेट की ओर आने होते हैं। डिलीवरी के लिए यह पोजीशन सबसे सही होती है और अगर बच्चा समय पर इस पोजीशन में आ जाए तो डिलीवरी के समय होने वाली कई तरह की जटिलताओं के आने की संभावना कम हो जाती है।
कुछ मामलों में बच्चा डिलीवरी की पोजीशन में नहीं आता है और उसका सिर ऊपर और पैर की नीचे ओर होते हैं। गर्भ में इस पोजीशन में होने का बच्चा उल्टा होना या ब्रीच पोजीशन कहते हैं। डिलीवरी से पहले पेट में बच्चा उल्टा हो जाए तो शिशु को सुरिक्षत बाहर निकालने और मां के शरीर को कम से कम नुकसान पहुंचाने के लिए डॉक्टर कुछ विशेष तरीकों का उपयोग करते हैं, जिनमें से कुछ के बारे में यहां बताया गया है।
गर्भावस्था के 35वें या 36वें सप्ताह तक बच्चे को ब्रीच पोजीशन में नहीं माना जाता है। नॉर्मल प्रेग्नेंसी में आमतौर पर बच्चे का सिर डिलीवरी के लिए नीचे आ जाता है। प्रेग्नेंसी के 35वें हफ्ते से पहले ऐसा हो जाता है लेकिन अगर इस समय तक बच्चा नीचे ना आए तो इसके बाद साइज में बड़ा होने और पेट में जगह कम पड़ने की वजह से उसे डिलीवरी के लिए सही पोजीशन में आने में दिक्कत होती है।
अल्ट्रासाउंड की मदद से आप जान सकती हैं कि डिलीवरी डेट से पहले बच्चा सही पोजीशन में आया है नहीं।
बच्चा कब सीधा होता है?