छोटे बच्चों को फल खिलाएं या जूस पिलाएं? एक्सपर्ट से जानें सेहत के लिए क्या है ज्यादा फायदेमंद
Fruits Vs Juices For Babies: छोटे बच्चों को फल खिलाएं या जूस, इस बात को लेकर पेरेंट्स काफी परेशान रहते हैं, जानें एक्सपर्ट की राय।
छोटे बच्चों को फल खिलाएं या जूस पिलाएं? एक्सपर्ट से जानें सेहत के लिए क्या है ज्यादा फायदेमंद
जब बच्चा छोटा होता है तो उसके खानपान का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। पेरेंट्स होने के नाते हम सभी अपने बच्चों को बेस्ट देना चाहते हैं। जब बच्चा छोटा होता है खासकर 1 साल से छोटा, तो उसे क्या खिलाएं क्या नहीं इस बात को लेकर पेरेंट्स काफी परेशान रहते हैं। 6 महीने तक बच्चे को सिर्फ दूध पिलाने की सलाह दी जाती है, लेकिन उसके बाद बच्चे को ठोस पदार्थ खिलाने शुरु कर दिया जाता है। इस दौरान पेरेंट्स बच्चे के खानपान को लेकर काफी चिंतित रहते हैं, उन्हें लगता है कि शिशु को जब ठोस पदार्थ खिलाते हैं तो इसे खाने में बच्चे को परेशानी होती है, क्योंकि इस उम्र तक शिशु के दांत नहीं निकलते हैं। साथ ही अगर दांत निकलते भी हैं तो वह पूरी तरह से भोजन को चबा पाने में असमर्थ होते हैं। इसलिए पेरेंट्स बच्चों को ठोस पदार्थ खिलाने की बजाए लिक्विड पिलाना ज्यादा पसंद करते हैं। जिसमें सबसे ज्यादा कॉमन है बच्चों को जूस पिलाना।
हम में से ज्यादातर लोग शिशु को फल खिलाने से हैं और इसके बजाए उन्हें फलों का जूस पिलाते हैं। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि फलों का जूस पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या बच्चों को फल खिलाने की जगह शिशु को जूस पिलाना सही है? क्या शिशु को जूस पिलाने से फल खिलाने के समान ही फायदे मिलते हैं? इस लेख में हम बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सांची रस्तोगी (MD Paediatrics) से जानेंगे शिशु को फल खिलाना ज्यादा फायदेमंद है या जूस पिलाना (Fruit Or Juice Which Is Better For Babies In Hindi)।
Fruit Or Juice Which Is Better For Babies In Hindi
शिशु को फल खिलाना ज्यादा फायदेमंद है या जूस पिलाना (Fruit Or Juice Which Is Better For Babies In Hindi)
डॉ. सांची के अनुसार बहुत से लोग सोचते हैं कि बच्चों को फलों का जूस देना साबुत फल खिलाने की तुलना में बेहतर है क्योंकि उनके पास फलों को काटने या चबाने के लिए दांत नहीं होते हैं, जो कि सच नहीं है। वास्तव में, फलों के रस या अन्य ड्रिंक्स की तुलना में शिशु को फल खिलाना ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि फल फाइबर से भरपूर होते हैं साथ ही उनका टेक्सचर भी अलग-अलग होता है। जिससे फल खाना सिर्फ उनके शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मौखिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। यहां तक कि " इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) की मानें तो 2 साल से कम उम्र के बच्चों को फलों का जूस पिलाने की सलाह नहीं दी जाती है। आप 2 से 5 साल तक के बच्चे को दिन में 125ml जूस दे सकते हैं, और 5 साल से ऊपर के बच्चे को 20ml जूस पिला सकते हैं।"
फलों के रस की बजाए फल खाना क्यों ज्यादा बेहतर है?
जूस में सिर्फ फलों का रस होता है, जब फलों से जूस निकाला जाता है तो फलों का गूदा अलग हो जाता है। जिससे फलों में मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व निकल जाते हैं। जूस में सिर्फ फलों का रस और शुगर रह जाती है। फलों के रस में कैलोरी का मात्रा ज्यादा होती है। साथ ही ये बहुत अधिक मीठे होते हैं। जूस की तुलना में साबुत फल खाना इसलिए बेहतर है क्योंकि उनमें फाइबर कंटेंट मौजूद होता है साथ ही अन्य जरूरी पोषक तत्व भी मौजूद रहते हैं। साथ ही जब आप फल को सीधे तौर पर खाते हैं तो इससे पाचन बेहतर होता है और पोषक तत्वों का अवशोषण भी अच्छी तरह होता है।
एक्सपर्ट क्या सलाह देते हैं?
अगर आप शिशु को फल की बजाए जूस अधिक पिलाते हैं तो इससे शिशु का पाचन खराब हो सकता है। फलों के रस के अत्यधिक सेवन से पेट में दर्द, पेट फूलना, दस्त, दांतों में कैविटी और अनुचित वजन बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। छोटे बच्चों के लिए, पपीता, केला, आम का गूदा जैसे बीज रहित गूदे वाले फलों का सेवन बसे अच्छा है। हालांकि, कटे हुए फलों के बहुत छोटे और सख्त टुकड़ों से बचें क्योंकि क्योंकि बच्चे के लिए उसे चबा पाना मुश्किल हो सकता है।
बच्चों को कौन सा जूस पीना चाहिए?