Google AdSense Header Slot

ब्रीच बेबी टर्निंग के लक्षण?

Language: Hindi | Published: 26 Jan 2022 | Views: 9
ब्रीच बेबी टर्निंग के लक्षण?
नौवें महीने में डिलीवरी से कुछ हफ्ते पहले शिशु का सिर नीचे की ओर घूम जाता है, इसे वर्टेक्‍स पोजीशन कहते हैं। नॉर्मल डिलीवरी के लिए बच्‍चे का इस पोजीशन में आना बहुत जरूरी होता है। इससे मां और बच्‍चे, दोनों को ही प्रसव के दौरान कम परेशानी होती है लेकिन अगर डिलीवरी डेट तक बच्‍चे का सिर नीचे योनि की ओर नहीं आता है तो यह मां और डॉक्‍टर दोनों के लिए चिंता का कारण बन जाता है।
कुछ मामलों में डिलीवरी के समय तक बच्‍चे का सिर ऊपर और पैर नीचे योनि की ओर रहते हैं। इसमें पेट में बच्‍चा उल्‍टा होता है जिसे अंग्रेजी में ब्रीच पोजीशन भी कहा जाता है। यदि डिलीवरी से कुछ समय पहले आपको बच्‍चे के उल्‍टे होने का पता चला है तो आप डॉक्‍टर या दाई की मदद से बच्‍चे को सही पोजीशन में ला सकते हैं।
​पेट में बच्‍चा उल्‍टा हो तो क्‍या करें

पेट में बच्‍चा उल्‍टा हो जाए तो डॉक्‍टर और दाई के अलावा मां खुद भी बच्‍चे को सही पोजीशन में लाने की कोशिश कर सकती है। सोने की एक पोजीशन ऐसी है जो इस काम में आपकी मदद कर सकती है।

'द परफेक्‍ट पुश' की ओनर और बोर्ड सर्टिफाइड फैमिली नर्स प्रैक्टिशनर रू खोसा का कहना है कि सही पोजीशन और पोस्‍चर से पेल्विस को खुलने में मदद मिलती है। कई ऐसी पोजीशन होती हैं जिनमें बच्‍चे को पेट के अंदर ज्‍यादा जगह मिल पाती है। आपको भी इन पोजीशन पर ध्‍यान देना है।
खोसा कहती हैं कि दोनों घुटनों और एड़ियों के नीचे तकिया लगाकर करवट लेकर सोना चाहिए। शिशु को पेट में जितनी ज्‍यादा जगह मिलेगी, उसके लिए वर्टेक्‍स पोजीशन में आना उतना ही आसान होगा।

ऐसा जरूरी नहीं है कि आपको बाईं करवट सोकर ही पूरी रात निकालनी है। आप चाहें तो अपनी सुविधा के अनुसार दाईं करवट भी सो सकती हैं। डिलीवरी के बाद शिशु की देखभाल में आपको कई रातें जागना पड़ेगा, इसलिए अभी अपनी नींद पूरी करने की कोशिश करें।

इसके अलावा प्रेग्‍नेंसी के आखिरी महीनों में पीठ के बल सोने से बचना चाहिए। इससे गर्भाशय और शिशु तक ऑक्‍सीजन और पोषक तत्‍व पहुंचाने वाली रक्‍त वाहिका दब सकती है।

नौवें महीने में दिन-ब-दिन पेट बढ़ता रहता है और इस समय आपको करवट लेकर सोना चाहिए। प्रेग्‍नेंसी के आखिरी महीनों में बाईं करवट सोना सबसे ज्‍यादा फायदेमंद रहता है। इसमें इंफीरियर वेना कावा नामक नस से रक्‍त का प्रवाह बढ़ता है जो कि ह्रदय से खून लेकर शिशु तक पहुंचाती है।

बाईं करवट सोने से इस नस पर कम दबाव पड़ता है जिससे शिशु तक पर्याप्‍त खून पहुंच पाता है।
गर्भावस्‍था के शुरुआती दिनों में आप पीठ या पेट के बल लेट सकती हैं लेकिन जैसे-जैसे पेटका साइज बढ़ता है, बच्‍चे को गर्भाशय के अंदर जगह कम पड़ने लगती है। आखिरी कुछ महीनों में बाईं करवट सोकर आप बच्‍चे को गर्भाशय के अंदर पर्याप्‍त जगह दे सकती हैं। इससे डिलीवरी तक बच्‍चे को वर्टेक्‍स पोजीशन में आने में बहुत मदद मिलती है।
Share this article:

Facebook | Twitter | WhatsApp