आपके स्कैन या तो डायग्नोस्टिक सेंटर में होंगे या फिर मेटरनिटी हॉस्पिटल के अल्ट्रासाउंड विभाग में किए जाएंगे। अल्ट्रसाउंड स्कैन आमतौर एक कमरे में किए जाते हैं और कमरे में रोशनी बहुत कम रखी जाती है, ताकि डॉक्टर को स्क्रीन पर तस्वीरें बेहतर ढंग से दिख सकें।
आप कौन सा स्कैन करवा रही हैं, इसे देखते हुए आपको शायद अपनी सलवार या पैंट उतारनी पड़ सकती है या कपड़े बदलकर गाउन पहनना पड़ सकता है। आपको स्कैन के लिए परीक्षण टेबल पर लेटने के लिए कहा जाएगा।
अधिकांश मामलों में पति या साथ में आए परिवार के सदस्य या मित्र को स्कैन के दौरान कमरे में रहने की अनुमति दी जाती है। हालांकि, बेहतर है इस बारे में एप्वाइंटमेंट लेते समय आप पूछ लें।
एब्डोमिनल स्कैन
पहली तिमाही में, एब्डोमिनल स्कैन (पेट पर से स्कैन) आमतौर पर भरे हुए मूत्राशय के साथ किए जाते हैं। आपको अपने अप्वाइंटमेंट से पहले कई गिलास पानी पीना होगा, ताकि स्कैन के दौरान आपका मूत्राशय भरा हुआ हो। इससे आपको काफी असहजता हो सकती है, मगर मूत्राशय के भरे होने से गर्भाशय पेट में उपर की तरफ खिसकता है और आंतें भी उपर की ओर चढ़ती हुए रास्ते से हट जाती हैं।
पेट पर से स्कैन के लिए आपको पीठ के बल लेटना होता है। डॉक्टर आपके पेट पर ठंडा जैल लगाएंगी ताकि ध्वनि तरंगों का प्रवाह बेहतर हो सके। फिर वे ट्रांसड्यूसर को आपके पेट पर आगे-पीछे घुमाती हैं, ताकि ध्वनि तरंगे संचारित हो सकें।
ट्रांसवेजाइनल स्कैन
अगर, आपका शिशु अभी भी श्रोणि में काफी गहराई पर है या फिर आपका वजन सामान्य से ज्यादा है, तो तस्वीरें ज्यादा स्पष्ट दिखाई नहीं देंगी। इस स्थिति में, आपको योनि के जरिये स्कैन यानि ट्रांसवेजाइनल स्कैन (टीवीएस) करवाना होगा।
ट्रांसवेजाइनल स्कैन से शिशु की काफी स्पष्ट तस्वीरें मिलेंगी, खासकर यदि आप गर्भावस्था के एकदम शुरुआती चरण में हैं। इस तरह के स्कैन में मूत्राशय भरा हुआ रखने की जरुरत नहीं होती।
टीवीएस स्कैन के लिए आपको कमर से नीचे के कपड़े उतारने होंगे और परीक्षण टेबल पर लेटना होगा। नर्स आपकी टांगों को चादर से ढक देंगी और आपको अपने घुटने मोड़ने होंगे और तलवे बिस्तर पर समतल रखे होने चाहिए। आपको अपनी टांगे थोड़ी खोलनी होंगी ताकि डॉक्टर प्रोब को अंदर डाल सकें और स्कैन करने के लिए उन्हें पर्याप्त जगह मिल सके। यह अवस्था लगभग वैसी ही होती है जैसे कि आंतरिक जांच करवाते समय रखनी होती है।
वेजाइनल ट्रांसड्यूयसर लंबा और संकरा होता है और आपकी योनि में आसानी से फिट हो जाता है। ट्रांसवेजाइनल स्कैन में डॉक्टर आपकी योनि के भीतर नए और कीटाणुमुक्त (स्टेराइल) आवरण (शीथ) से ढका हुआ संकरा सा प्रोब डालेंगी। यह आवरण कोंडोम जैसा दिखता है। वे काफी सारा जैल लगाकर इसे चिकना कर लेंगी, ताकि यह आसानी से अंदर प्रवेश कर जाए। प्रोब को बहुत ज्यादा अंदर तक डालने की जरुरत नहीं होती, इसलिए यह आपको और आपके शिशु को किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाता।
सामान्य अल्ट्रासाउंड में कुछ मिनटों से लेकर आधे घंटे तक का समय लगता है। हालांकि, कभी-कभार इससे भी ज्यादा समय लग सकता है।
अल्ट्रासाउंड की अवधि बहुत से कारणों पर निर्भर करती है, जैसे कि:
किस तरह का अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है
अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉक्टर का अनुभव
स्कैन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण
गर्भस्थ शिशु के आसपास तरल की मात्रा
शिशु की अवस्था और आपकी शारीरिक संरचना
ध्यान रखें कि अल्ट्रासाउंड डॉक्टर महिला या पुरुष कोई भी हो सकता है। यदि आपको पुरुष डॉक्टर से टीवीएस स्कैन करवाने में संकोच या असहजता महसूस हो, तो अपनी डॉक्टर से बात करें। वे आपकी सहजता के लिए महिला अल्ट्रासाउंड डॉक्टर के पास भेज सकती हैं।
प्रेगनेंसी में मेरे अल्ट्रासाउंड स्कैन कब-कब होंगे?
गर्भावस्था में किए जाने वाले नियमित स्कैन निम्नांकित हैं:
डेटिंग एंड वायबिलिटी स्कैन, छह से नौ सप्ताह के बीच। इस स्कैन से सही ड्यू डेट का पता चलता है। आप शिशु के दिल की धड़कन भी इस स्कैन में सुन सकती हैं।
न्यूकल ट्रांसलुसेंसी (एनटी) स्कैन गर्भावस्था में एक विशेष समय पर किया जाता है। इसे अर्ली मोर्फोलॉजी स्कैन भी कहा जाता है। यह 11 हफ्ते व दो दिन और 13 हफ्ते व छह दिन की गर्भावस्था के बीच किया जाता है। यह स्कैन करवाने का सबसे बेहतर समय 12 सप्ताह की गर्भावस्था है। अधिक सटीक परिणाम के लिए इस स्कैन के साथ खून की जांच (डबल मार्कर टेस्ट) करवाने के लिए भी कहा जा सकता है। आपके गर्भाशय में रक्त के प्रवाह की जांज भी इसी चरण पर की जाती है।
एनॉमली स्कैन (टिफ्फा या अल्ट्रासाउंड लेवल II स्कैन) 18 से 20 हफ्ते की प्रेगनेंसी में कराया जाता है। इसमें देखा जाता है कि शिशु का विकास उचित ढंग से हो रहा है और उसमें कोई संरचनात्मक विकार तो नहीं हैं।
ग्रोथ स्कैन या फीटल वेलबींग स्कैन 28 से 32 सप्ताह की गर्भावस्था के बीच कराया जाता है। इस स्कैन में शिशु के ग्रोथ पैटर्न का पता चलता है, जिसके आधार पर डॉक्टर आपको आहार योजना संबंधी सलाह दे सकते हैं। यदि ब्लड टेस्ट करवाना हो, तो भी डॉक्टर बात सकेंगे।
ग्रोथ स्कैन और कलर डॉप्लर अध्ययन, 36 से 40 सप्ताह की गर्भावस्था के बीच कराया जाता है। इस अंतिम स्कैन में शिशु की अवस्था और वजन को देखा जाता है। इसमें शिशु के चारों तरफ मौजूद तरल की जांच की जाती है और देखा जाता है कि गर्भनाल कहीं शिशु की गर्दन में लिपटी तो नहीं है। डॉप्लर अध्ययन में शिशु के महत्वपूर्ण अंगों में रक्त के प्रवाह को दर्शाया जाता है।
आपको इससे भी ज्यादा स्कैन की जरुरत करवाने की जरुरत पड़ सकती है, यदि:
आपने पहले कम जन्म वजन शिशु को जन्म दिया था
आपकी उम्र 35 साल या इससे ज्यादा है
आपने प्रजनन उपचारों की मदद से गर्भधारण किया है।
आपके गर्भ में जुड़वा या इससे ज्यादा शिशु पल रहे हैं।
आपको अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं जैसे कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप भी है।
आपका शिशु अपने चरण से छोटा या बड़ा मापा गया है।
गर्भावस्था में कोई अनियमितता या जटिलता होना जैसे कि ऐजिंग प्लेसेंटा, एमनियोटिक द्रव का स्तर कम या ज्यादा होना, गर्भनाल में रक्त संचरण में अनियमितता आदि।
गर्भस्थ शिशु में किसी असामान्यता का पता चलना, जिसमें नजदीकी निगरानी रखने की जरुरत हो।
मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा बच्चा डॉपलर से सिर नीचे है?